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US में भारतीय मूल से जुड़े संगठन GOPIO ने Rutgers कैंपस में इस मांग का किया विरोध

रटगर्स (Rutgers) यूनिवर्सिटी में कश्मीरी झंडे के प्रदर्शन को लेकर छात्रों की मांग के बारे में GOPIO के अध्यक्ष डॉ. थॉमस अब्राहम ने रटगर्स (Rutgers) यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट जोनाथन होलोवे को एक लेटर लिखा है। उन्होंने कहा कि यह एक खतरनाक विचार है। इस मांग पर विचार करके आप भारत की अखंडता पर सवाल उठा रहे हैं। कश्मीर भारत का ही हिस्सा है।

यूनिवर्सिटी कैंपस में विस्थापित लोगों के झंडे प्रदर्शित करने की छात्रों की मांग का विरोध करने के लिए एक पत्र लिखा। / @RutgersU

डॉ. थॉमस अब्राहम ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन ऑफ पीपुल ऑफ इंडियन ओरिजिन (GOPIO) के अध्यक्ष हैं। उन्होंने रटगर्स (Rutgers) यूनिवर्सिटी के प्रेसिडेंट जोनाथन होलोवे को यूनिवर्सिटी कैंपस में विस्थापित लोगों के झंडे प्रदर्शित करने की छात्रों की मांग का विरोध करने के लिए एक पत्र लिखा। दरअसल, छात्रों ने रटगर्स कैंपस में अंतरराष्ट्रीय झंडे प्रदर्शित करने की जगह पर फिलिस्तीनियों, कुर्दों सहित कश्मीरी झंडे के प्रदर्शन की मांग की है। GOPIO ने कश्मीर को लेकर कड़ा ऐतराज जताया है।

डॉ. थॉमस अब्राहम का कहना है कि हम यह पढ़कर बहुत आश्चर्यचकित हैं कि आप रटगर्स कैंपस में अंतरराष्ट्रीय झंडे प्रदर्शित करने वाले सभी क्षेत्रों में फिलिस्तीनियों, कुर्दों और कश्मीरियों के झंडे प्रदर्शित करने के लिए प्रदर्शनकारी छात्रों की मांग पर विचार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह एक खतरनाक विचार है। इस मांग पर विचार करके आप भारत की अखंडता पर सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का ही हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि कश्मीर के लिए अलग झंडा नहीं है। कश्मीर के निवासी विस्थापित लोग नहीं हैं। वास्तव में, विस्थापित लोग हिंदू अल्पसंख्यक हैं, जिन्हें हिंसा के कारण कश्मीर छोड़ना पड़ा। अगर रटगर्स कश्मीर का ऐसा झंडा दिखाते हैं तो इसके खिलाफ छात्रों के विरोध की शुरुआत होगी। पत्र में अब्राहम ने लिखा है कि एक सार्वजनिक शैक्षणिक संस्थान के रूप में रटगर्स विश्वविद्यालय के पास दुनिया भर के देशों के आंतरिक संघर्षों में शामिल होने का कोई कारण नहीं है।

GOPIO 35 देशों में फैला हुआ गैर-लाभकारी, सामुदायिक सेवा और एडवोकेसी समूह है। GOPIO के न्यूयॉर्क क्षेत्र में सात और न्यू जर्सी में तीन सक्रिय चैप्टर्स हैं। GOPIO की शुरुआत 1989 में न्यूयॉर्क में भारतीय मूल के लोगों के पहले सम्मेलन में हुई थी। शुरुआत से ही इसकी एक प्रमुख गतिविधि दुनिया भर में भारतीय मूल के लोगों के नागरिक और मानवाधिकारों के उल्लंघन के खिलाफ वकालत रही है।

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