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प्रौद्योगिकी और भविष्य पर वार्ता का आयोजन, GCCI के आग्रह पर आये प्रो. गुप्तारा

प्रो. गुप्तारा ने निष्कर्ष निकाला कि यदि हम कुछ असत्यताओं से छुटकारा पा लेते हैं और तदनुसार अपनी वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संरचनाओं में सुधार करते हैं तो प्रौद्योगिकी समस्याओं को सुलझाने और बढ़ाने की दोहरी भूमिका निभाना बंद कर देगी और प्रणालीगत रूप से सकारात्मक भूमिका में आ जाएगी। 

अपनी वार्ता के दौरान प्रो. गुप्तारा। / GCCI

जीओपीआईओ (ग्लोबल ऑर्गनाइजेशन ऑफ पीपल ऑफ इंडियन ओरिजिन ) चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (GCCI) ने यूके स्थित प्रोफेसर प्रभु गुप्तारा की एक वार्ता की सह-मेजबानी की। वार्ता का विषय था- प्रौद्योगिकी और भविष्य। प्रो. गुप्तारा साल्ट डेजर्ट मीडिया, यूके के कार्यकारी अध्यक्ष और यूबीएस के पूर्व सलाहकार हैं।

यह वार्ता यूबीएस द्वारा न्यूयॉर्क शहर के अपने मुख्यालय में आयोजित की गई थी। प्रो. गुप्तारा ने 'प्रौद्योगिकी और भविष्य: निहितार्थ, जोखिम और अवसर क्या हैं' विषय पर बात की। बातचीत में हमारे समाज पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट ऑफ थिंग्स, रोबोटिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी विघटनकारी प्रौद्योगिकियों के प्रभाव पर भी चर्चा की गई।

 प्रो. गुप्तारा एक सार्वजनिक बुद्धिजीवी और व्यावसायिक सलाहकार हैं जो प्रौद्योगिकी के भविष्य पर ध्यान केंद्रित करते हैं। चालीस साल पहले उन्होंने मेनफ्रेमम कंप्यूटर पर प्रोग्राम करना सीखा। 15 वर्षों तक उन्होंने दुनिया के अग्रणी धन प्रबंधक यूबीएस के बोर्ड को सलाह दी और यूबीएस थिंक टैंक का आयोजन किया। इंटरनेट बैंकिंग, ऑफशोरिंग और अन्य पहलों का नेतृत्व किया। वह व्हार्टन, फ्राइबर्ग विश्वविद्यालय, इनसीड में भी विजिटिंग प्रोफेसर रहे। 

कार्यक्रम की शुरुआत यूबीएस के वरिष्ठ उपाध्यक्ष द्वारा स्वागत से हुई। GOPIO अध्यक्ष डॉ. थॉमस अब्राहम ने भारतीय मूल के लोगों के वैश्विक संगठन (GOPIO) और GCCI  के बारे में बात की और बताया कि कैसे GCCI  प्रवासी भारतीयों के छोटे और मध्यम व्यवसायों के लिए एक नेटवर्किंग मंच प्रदान करेगा और उन्हें भारतीय व्यवसायों से जोड़ेगा। कार्यक्रम में GOPIO के वैश्विक राजदूत प्रकाश शाह और कनेक्टिकट, मैनहटन और न्यू जर्सी चैप्टर के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

प्राचीन काल से प्रौद्योगिकी के इतिहास का सर्वेक्षण करने के बाद प्रोफेसर गुप्तारा ने पूछा कि उन प्रौद्योगिकियों के पीछे का ज्ञान पूरी तरह से गायब क्यों हो गया। उन्होंने सुझाव दिया कि ये प्रौद्योगिकियां अधिकांश आबादी की कीमत पर अभिजात वर्ग के लाभ के लिए थीं और अभिजात वर्ग ज्ञान को शक्ति मानता था, इसीलिए ईर्ष्यापूर्वक इसकी रक्षा करता था। 

उन्होंने निष्कर्ष निकाला कि यदि हम कुछ असत्यताओं से छुटकारा पा लेते हैं और तदनुसार अपनी वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक संरचनाओं में सुधार करते हैं तो प्रौद्योगिकी समस्याओं को सुलझाने और बढ़ाने की दोहरी भूमिका निभाना बंद कर देगी और प्रणालीगत रूप से सकारात्मक भूमिका में आ जाएगी।

प्रो. प्रभु गुप्तारा की वार्ता के बाद जीओपीआईओ और यूबीएस के अधिकारी। / GCCI

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