रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर रह चुके उर्जित रविंद्र पटेल को अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के नए एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर नियुक्त किए गए हैं। पटेल इससे पहले कई वर्षों तक भारत के अलावा अमेरिका समेत अन्य देशों में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत वर्ष 1990 में IMF से ही की थी। 1990 से 1995 तक उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष में भारत, अमेरिका बहामास और म्यांमार डेस्क के लिए काम किया।
उर्जित पटेल की अब IMF में एक्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद पर नियुक्ति के लिए भारत सरकार की ओर से अनुमति भी मिली है। पटेल की नियुक्ति तीन साल के लिए की गई है। उन्होंने सितंबर 2016 में रघुराम राजन से आरबीआई गवर्नर का पद संभाला था और दिसंबर 2018 में निजी कारणों का हवाला देते हुए पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि पटेल ने यह इस्तीफा RBI और मोदी सरकार के बीच लंबे समय से चल रहे सार्वजनिक विवाद के बाद दिया।
इस इस्तीफे के बाद पटेल को राष्ट्रीय लोक वित्त एवं नीति संस्थान का चेयरमैन नियुक्त किया गया था। बता दें कि मोदी सरकार ने उर्जित पटेल की रिपोर्ट के आधार पर ही नोटबंदी का फैसला लिया था। आरबीआई में उनके कार्यकाल के दौरान RBI ने महंगाई दर की सीमा तय की गई थी। उर्जित पटेल द्वारा पेश की गई रिपोर्ट के मुताबिक महंगाई 4 फीसदी की सीमा के नीचे ही होनी चाहिए। इस रिपोर्ट के बात केंद्र ने व्यापक स्तर पर रणनीतियां तैयार की और महंगाई दर के लक्ष्य को निर्धारित करने का कार्य किया गया।
उर्जित पटेल का जन्म केन्या में हुआ था। वे इससे पहले IMF में पांच वर्ष कार्य कर चुके हैं। पटेल ने येल यूनिवर्सिटी से इकोनॉमिक्स में पीएचडी, ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी से एम. फिल. और लंदन विश्वविद्यालय से बीएससी (B. Sc.) की डिग्री ली है।
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