रो खन्ना, नित्या रमन और अमी बेरा। / File Photo
कैलिफोर्निया के हालिया प्राइमरी चुनावों ने एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है। भारतीय-अमेरिकी अब अमेरिकी राजनीति का अभिन्न हिस्सा बन चुके हैं।
आज भारतीय मूल के उम्मीदवार डेमोक्रेट और रिपब्लिकन दोनों दलों से चुनाव लड़ रहे हैं। वे प्रगतिशील और मध्यमार्गी विचारधाराओं का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। अब उनकी भूमिका केवल चुनाव लड़ने तक सीमित नहीं है, बल्कि वे एक-दूसरे के खिलाफ भी मुकाबला कर रहे हैं और बड़े राजनीतिक पदों की दौड़ में शामिल हैं।
कैलिफोर्निया के मध्यावधि चुनावों की प्राइमरी में कई भारतीय-अमेरिकी उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें सैन फ्रांसिस्को की 11वीं कांग्रेसनल सीट से सैकत चक्रवर्ती, 22वीं कांग्रेसनल सीट से डॉक्टर जसमीत बैंस और 14वीं कांग्रेसनल सीट से वकील एवं उद्यमी राखी इसरानी शामिल थीं। हालांकि ये उम्मीदवार नवंबर के चुनाव के लिए आगे नहीं बढ़ सके।
सैकत चक्रवर्ती ने कहा कि वह सस्ती आवास व्यवस्था, स्वास्थ्य सेवा और लोकतंत्र के लिए अपना काम जारी रखेंगे। वहीं डॉक्टर जसमीत बैंस ने स्वास्थ्य सेवा को सभी का अधिकार बनाने के मुद्दे पर चुनाव लड़ा। उन्होंने कैलिफोर्निया की जंगल की आग के दौरान राहत कार्यों में भी अहम भूमिका निभाई थी। राज्य विधायक के रूप में उन्होंने फेंटानिल नशे के खिलाफ 2 करोड़ डॉलर से अधिक की राशि सुनिश्चित की और कामकाजी माताओं व पूर्व सैनिकों के लिए करों में राहत दिलाई।
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