कोलंबिया में राष्ट्रपति पद के लिए बेहद कड़े मुकाबले के बीच वोटों की गिनती को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। / (Photo: Xinhua)
कट्टर दक्षिणपंथी वकील और राजनीति में नए चेहरे, एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला ने राष्ट्रपति पद के लिए हुए बहुत करीबी मुकाबले में जीत का ऐलान किया है। इस मुकाबले में उन्होंने वामपंथी सीनेटर इवान सेपेडा को हराया, जिन्हें 48.70% वोट मिले थे। यह चुनाव बहुत ज्यादा विभाजित था और इसमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने डे ला एस्प्रिएला का समर्थन किया था। डे ला एस्प्रिएला ने सेपेडा को 2,50,000 से कुछ अधिक वोटों (कुल वोटों का 1% से भी कम) से हराया, जिसके बाद वोटिंग में गड़बड़ी के दावे किए गए।
'पैक्टो हिस्टोरिको' के इवान सेपेडा और 'साल्वासियोन नैशनल' के एबेलार्डो डे ला एस्प्रिएला के बीच हुए इस मुकाबले ने कोलंबियाई लोकतंत्र के भविष्य, शांति समझौतों को लागू करने, जमीन के अधिकारों, पलायन और लैटिन अमेरिका में देश की भूमिका पर जबरदस्त बहस छेड़ दी है।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी की पॉलिटिकल साइंटिस्ट और सीनियर फेलो बीट्रिज मैगालोनी ने ACoM की एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कोलंबिया के शहरों और अर्ध-शहरी इलाकों में रहने वाले लोग 'अपराध, जबरन वसूली और असुरक्षा का सामना करते हैं' और उन्हें डे ला एस्प्रिएला के 'अपराध के खिलाफ सख्त रुख' वाले संदेश में 'एक बहुत दिलचस्प समाधान' दिखता है।
कोलंबिया के नए राष्ट्रपति कौन हैं?
डे ला एस्प्रिएला, जिन्हें 'द टाइगर' (एल टिग्रे) उपनाम से जाना जाता है, एक बिजनेसमैन और राजनीति में नए हैं। उन्होंने इस वादे के साथ चुनाव लड़ा कि अगर वे जीतते हैं, तो देश में हथियारबंद समूहों के खिलाफ 90 दिनों तक जबरदस्त सैन्य अभियान चलाएंगे। उन्होंने सख्त 'कानून-व्यवस्था' एजेंडा का वादा किया, जिसमें हथियारबंद समूहों के साथ शांति बातचीत खत्म करना और बड़ी जेलें बनाना शामिल है।
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मैगालोनी ने कहा कि ये आपराधिक संगठन ड्रग तस्करी और तेल निकालने से अपनी कमाई करते हैं। वे लोगों से जबरन वसूली करके जीते हैं। उन लोगों को डे ला एस्प्रिएला ने अपने चुनावी बयानों में बार-बार नीचा दिखाया, जिनकी व्यापक रूप से नस्लवादी कहकर निंदा की गई थी।
समर्थकों का तर्क है कि कोलंबिया को अपराध से निपटने के लिए सख्त रवैये की जरूरत है। डे ला एस्प्रिएला ने कोलंबिया की आर्थिक और सुरक्षा संबंधी समस्याओं - जिसमें हथियारबंद समूहों से जुड़ी हिंसा में बढ़ोतरी भी शामिल है - के लिए 2022 से 2026 तक राष्ट्रपति रहे वामपंथी/प्रगतिशील गुस्तावो पेट्रो को जिम्मेदार ठहराया है।
एस्प्रिएला ने तेल और गैस सेक्टर को बढ़ावा देने, टैक्स कम करने और सरकारी ढांचे (स्टेट) का आकार 40 प्रतिशत तक कम करने का वादा किया है। हालांकि, उन्होंने कहा है कि वे पेट्रो द्वारा न्यूनतम वेतन में की गई 23 प्रतिशत की बढ़ोतरी और अन्य लोकप्रिय सामाजिक उपायों को बनाए रखेंगे।
इसका अमेरिका और कोलंबिया के रिश्तों पर क्या असर पड़ेगा?
जीत की घोषणा के बाद, डी ला एस्प्रिएला को ट्रंप का बधाई संदेश मिला। ट्रंप ने रविवार को अपने 'ट्रुथ सोशल' प्लेटफॉर्म पर लिखा- उन्होंने बड़ी जीत हासिल की! ट्रंप ने कहा कि रविवार के चुनाव के नतीजे कोलंबिया के भविष्य और अमेरिका के साथ उसके रिश्तों के लिए बहुत अहम हैं।
एस्प्रिएला सालों तक मियामी में रहे और उनको ट्रंप का खुला समर्थन मिला था। वे एक खास पॉलिसी एजेंडा के साथ पद संभाल रहे हैं। इसमें मिलिट्री कार्रवाई, सुरक्षा सहयोग बढ़ाना और माइग्रेशन पर सख्त रुख अपनाना शामिल है, जो वॉशिंगटन की क्षेत्रीय प्राथमिकताओं से पूरी तरह मेल खाता है।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने लिखा कि ट्रंप प्रशासन आपकी आने वाली सरकार के साथ मिलकर क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने, अमेरिका में अवैध माइग्रेशन को खत्म करने और हमारे आर्थिक संबंधों को मजबूत करने के लिए काम करने को लेकर उत्साहित है।
खुद अमेरिका की नागरिकता लेने वाले डी ला एस्प्रिएला ने कहा है कि वे इन समूहों से निपटने के लिए अमेरिकी सेना की मदद का स्वागत करेंगे।
बोगोटा स्थित 'सेंट्रो डी एस्टुडियोस सोशियोजुरिडिकोस लैटिनोअमेरिकानोस' (CESJUL) के एंथ्रोपोलॉजिस्ट एलेक्स सिएरा ने चेतावनी दी कि कोलंबिया में 57 से ज्यादा हथियारबंद समूह (जिनमें लड़ने की क्षमता है) पहले से ही इलाकों पर कब्जा जमाए हुए हैं। यह स्थिति नई हिंसा के खतरनाक दौर का खतरा पैदा करती है।
विदेश नीति और सुरक्षा
इस नतीजे से कोलंबिया की विदेश नीति सीधे तौर पर बदल जाएगी। यह अमेरिका (जिसमें अमेरिका के साथ नशीली दवाओं के खिलाफ और माइग्रेशन सहयोग शामिल है) और चीन जैसी वैश्विक ताकतों के बीच जियोपॉलिटिकल संतुलन बनाने, साथ ही पड़ोसी वेनेजुएला के साथ संबंधों को तय करेगा।
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी में पॉलिटिकल साइंस की प्रोफेसर और सीनियर फेलो बीट्रिज़ मैगालोनी ने कहा कि कोलंबिया वेनेजुएला के माइग्रेंट्स के लिए सबसे बड़ा देश रहा है, जिसने बड़े पैमाने पर हिंसा, आर्थिक तबाही और राजनीतिक दमन से भागकर आए लगभग 30 लाख लोगों को शरण दी है।
डी ला एस्प्रिएला की संभावित जीत दक्षिण अमेरिकी देशों में दक्षिणपंथी झुकाव के पैटर्न को दिखाती है। चिली, अर्जेंटीना, कोस्टा रिका, बोलीविया और इक्वाडोर के वोटरों ने हाल के चुनावों में दक्षिणपंथी राष्ट्रपतियों को चुना है।
एस्प्रिएला इजराइल के साथ संबंध बहाल करके और दूतावास को वापस यरूशलेम ले जाकर इजराइल के खिलाफ पिछले राष्ट्रपति की नीति को भी बदल देंगे।
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