आयोना मॉनसन / IANS
केरल के कन्नूर जिले के पहाड़ी कस्बे पय्यावूर में कक्षा 12 की 17 वर्षीय छात्रा आयोना मॉनसन की मौत ने पूरे इलाके को गमगीन कर दिया है। हालांकि, इस गहरे दुख के बीच आयोना और उसके परिवार ने ऐसा फैसला लिया, जिसने कई जिंदगियों को नई उम्मीद दी।
आयोना पय्यावूर के एक स्कूल में पढ़ती थी। सोमवार सुबह वह कथित तौर पर स्कूल की इमारत से कूद गई, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। यह घटना उसकी प्रयोगशाला मॉडल परीक्षाओं से ठीक कुछ दिन पहले हुई।
घायल हालत में उसे कन्नूर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां वह आईसीयू में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी। तमाम कोशिशों के बावजूद बुधवार रात उसने दम तोड़ दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
आयोना को उसके शिक्षक और सहपाठी एक होनहार, स्नेही और मेहनती छात्रा के रूप में जानते थे। वह पढ़ाई के साथ-साथ अन्य गतिविधियों में भी आगे रहती थी।
इस सबसे कठिन समय में आयोना के माता-पिता ने एक असाधारण और मानवीय फैसला लिया। उन्होंने अपनी बेटी के अंगदान की सहमति दी। आयोना का हृदय, दोनों किडनी और अन्य महत्वपूर्ण अंग दान किए गए, जिससे कई गंभीर मरीजों को नया जीवन मिल सका।
आयोना की एक किडनी घरेलू उड़ान के जरिए तिरुवनंतपुरम भेजी गई। यह राज्य में पहली बार था, जब किसी आंतरिक फ्लाइट का उपयोग अंग परिवहन के लिए किया गया। एयरपोर्ट से तिरुवनंतपुरम मेडिकल कॉलेज अस्पताल तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया ताकि प्रत्यारोपण समय पर हो सके।
वहीं, आयोना का हृदय चेन्नई भेजा गया, जहां एक गंभीर मरीज का इलाज चल रहा था। अन्य अंग केरल के अलग-अलग हिस्सों में जरूरतमंद मरीजों को दिए गए।
माता-पिता का कहना है, "वह भले हमारे बीच न हो, लेकिन उसके जरिए दूसरों को जीवन मिल रहा है।"
आयोना का अंतिम संस्कार शुक्रवार दोपहर 2:30 बजे तिरूर स्थित सेंट फ्रांसिस ऑफ असीसी चर्च के कब्रिस्तान में होगा।
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