भारत में हुए 35वें 'नो इंडिया प्रोग्राम' (KIP) के प्रतिभागी। / High commision of India
भारत सरकार ने बताया है कि ‘नो इंडिया प्रोग्राम’ यानी भारत को जानो में पिछले पांच साल में 41 देशों के 1,060 युवाओं ने भाग लिया है। इसमें मॉरीशस के युवाओं की संख्या सबसे ज्यादा रही है। जबकि अमेरिका से मात्र 16 लोगों ने हिस्सा लिया है। यह जानकारी 2 अप्रैल को राज्यसभा में दी गई।
विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने लिखित जवाब में यह जानकारी साझा की। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में प्रवासी भारतीयों की रुचि बहुत ज्यादा है। उन्होंने बताया कि हर बैच में 40 लोगों की क्षमता होती है लेकिन आवेदन इससे ज्यादा आते हैं।
सरकार के आंकड़ों के अनुसार मॉरीशस से 214 प्रतिभागी रहे। फिजी से 187 लोगों ने भाग लिया। गयाना से 99, त्रिनिदाद और टोबैगो से 95 और सूरीनाम से 90 प्रतिभागी शामिल हुए। दक्षिण अफ्रीका से 76 लोगों ने हिस्सा लिया और अमेरिका से 16 प्रतिभागी रहे।
मंत्री ने कहा कि सरकार लगातार इस कार्यक्रम की समीक्षा करती है। इसका उद्देश्य प्रवासी युवाओं को भारत से जोड़ना है। यह जुड़ाव सांस्कृतिक, भावनात्मक और विकास से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों और विदेशों में भारतीय मिशनों से प्रतिक्रिया ली जाती है। इसका उपयोग कार्यक्रम को बेहतर बनाने में किया जाता है।
उन्होंने कहा कि प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अपने अनुभव साझा किए हैं। उन्होंने दूसरों को भी इसमें शामिल होने की सलाह दी है।
सरकार ने बताया कि कार्यक्रम को बढ़ाने के लिए नए कदम उठाए गए हैं। डिजिटल माध्यम और सोशल मीडिया का उपयोग किया जा रहा है। वीडियो, चित्र और प्रश्नोत्तरी के जरिए युवाओं को जोड़ा जा रहा है। विदेशों में भारतीय मिशनों ने भी जागरूकता अभियान चलाए हैं।
मंत्री ने कहा कि हर बार आवेदन की संख्या ज्यादा होती है इसलिए चयन प्रक्रिया में अलग-अलग देशों का ध्यान रखा जाता है। ‘नो इंडिया प्रोग्राम’ का उद्देश्य प्रवासी युवाओं को उनकी जड़ों से जोड़ना है। इसके तहत उन्हें भारत की संस्कृति, विरासत और विकास के बारे में बताया जाता है।
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