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कीमतों की चुभन

आगे की तस्वीर में कुछ हद तक राहत की उम्मीद जरूर दिखाई देती है, लेकिन वह सीमित है। बढ़ोतरी की गति भले कम हो, लेकिन परिवारों के खर्च पर दबाव बना रहने के आसार हैं।

सांकेतिक चित्र... / REUTERS

अमेरिका के नवीनतम मुद्रास्फीति आंकड़ों से पता चलता है कि समग्र मुद्रास्फीति में कमी आने के बावजूद खाद्य पदार्थों की कीमतें दबाव में बनी हुई हैं। नवंबर 2025 के लिए जारी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक के अनुसार, पिछले वर्ष खाद्य पदार्थों की कीमतों में 2.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई। किराने के सामान (जिसे 'घर में खाया जाने वाला भोजन' कहा जाता है) की कीमतों में 1.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि घर के बाहर उपभोग किए जाने वाले भोजन की कीमतों में 3.7 प्रतिशत की अधिक वृद्धि दर्ज की गई। कुछ श्रेणियों में अधिक वृद्धि देखी गई। मांस, मुर्गी, मछली और अंडे की कीमतों में 4.7 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि गैर-मादक पेय पदार्थों की कीमतों में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। फलों और सब्जियों की कीमतों में लगभग कोई बदलाव नहीं हुआ, जबकि डेयरी उत्पादों की कीमतों में 1.6 प्रतिशत की गिरावट आई। कुल मुद्रास्फीति वार्षिक आधार पर 2.7 प्रतिशत रही।

इन औसत आंकड़ों के पीछे एक अलग सच्चाई भी है। अमेरिका में रहने वाले भारतीय परिवारों पर इसका असर कहीं ज्यादा महसूस किया जा रहा है, खासकर महीने के राशन बजट में। इसकी सबसे बड़ी वजह भारत से आने वाले उत्पादों पर टैरिफ में हुई तेज बढ़ोतरी है। 27 अगस्त 2025 से अमेरिका ने कई भारतीय सामानों पर शुल्क बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दिया। हालांकि बाद में 200 से अधिक खाद्य वस्तुओं पर टैरिफ हटाए गए, लेकिन उसका पूरा फायदा अभी तक ग्राहकों तक नहीं पहुंच पाया है।

भारतीय किराना दुकानों का कहना है कि समय भी इस असर को और गहरा बना रहा है। पहले जो सामान कम कीमत पर आयात हुआ था, वह अब लगभग खत्म हो चुका है। भारत से आने वाली नई खेप कहीं ज्यादा लागत पर पहुंच रही है। दुकानदारों के मुताबिक, अधिकांश चीजों की कीमतों में 5 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी हो चुकी है। चावल, दालें, मसाले, आटा, रेडी-टू-ईट भोजन और स्नैक्स जैसे रोजमर्रा के सामान अब पहले से महंगे हो गए हैं। भारत से व्यक्तिगत ऑर्डर मंगवाने की शिपिंग लागत भी कथित तौर पर दोगुनी हो गई है, जिससे उपभोक्ताओं पर और बोझ पड़ रहा है।

ऊर्जा की बढ़ती लागत भी इस दबाव को बढ़ा रही है। 2025 में अमेरिका में बिजली की कीमतें बढ़ी हैं, जिससे परिवहन और संचालन खर्च ऊपर गया है। टैरिफ और ऊर्जा लागत मिलकर वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के साथ-साथ आम परिवारों के बजट को भी कस रहे हैं।

आगे की तस्वीर में कुछ हद तक राहत की उम्मीद जरूर दिखाई देती है, लेकिन वह सीमित है। अमेरिकी कृषि विभाग के अनुमान के अनुसार, 2026 में खाद्य महंगाई की रफ्तार कुछ धीमी हो सकती है। कुल खाद्य कीमतों में 2.7 प्रतिशत, किराने के सामान में 2.3 प्रतिशत और रेस्तरां के खर्च में 3.3 प्रतिशत बढ़ोतरी का अनुमान है। यानी बढ़ोतरी की गति भले कम हो, लेकिन परिवारों के खर्च पर दबाव बना रहने के आसार हैं। 

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