भारतीय ध्वज / File Photo IANS
ग्लोबल साउथ के देशों के साथ भारत के संबंध गहरे ऐतिहासिक आधार पर टिके हैं। साझा औपनिवेशिक अतीत, स्वतंत्रता के संघर्ष और विकास व आत्मनिर्भरता की समान आकांक्षाओं ने इन रिश्तों को मजबूत किया है। समय के साथ भारत की भूमिका गुटनिरपेक्ष आंदोलन (NAM) के एक प्रमुख नेता से विकसित होकर आज दक्षिण-दक्षिण सहयोग (South-South Cooperation) के एक केंद्रीय स्तंभ के रूप में उभरी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने ग्लोबल साउथ के साथ अपनी साझेदारी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। भारत द्वारा G20 की अध्यक्षता संभालने के कुछ ही सप्ताह बाद 12-13 जनवरी 2023 को आयोजित पहला ‘वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ समिट (VOGSS)’ इस दिशा में एक ऐतिहासिक पहल थी। इसके बाद 2023 में दूसरा और 2024 में तीसरा शिखर सम्मेलन आयोजित हुआ।
भारत ने न केवल इन सम्मेलनों के जरिए ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं, चुनौतियों और आकांक्षाओं को वैश्विक मंचों पर मुखरता से उठाया, बल्कि “कथनी और करनी” के सिद्धांत पर चलते हुए इन देशों को हर संभव सहयोग भी दिया।
ग्लोबल साउथ में भारत की भूमिका आज निर्णायक बन चुकी है। बढ़ती आर्थिक ताकत, लोकतांत्रिक ढांचा और रणनीतिक भू-राजनीतिक स्थिति के बल पर भारत वैश्विक शासन व्यवस्था में समानता और न्याय की वकालत करता रहा है।
भारत के विकास सहयोग कार्यक्रम इस साझेदारी की रीढ़ हैं। भारतीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग (ITEC) कार्यक्रम के तहत भारत अब तक 160 से अधिक देशों को प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और तकनीकी सहायता प्रदान कर चुका है। स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि और सूचना प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में यह सहयोग ग्लोबल साउथ के मानव संसाधन विकास में अहम भूमिका निभा रहा है।
‘वसुधैव कुटुम्बकम’ की नीति
पिछले एक दशक से अधिक समय से ‘वसुधैव कुटुम्बकम’ (पूरा विश्व एक परिवार) भारत की विदेश नीति का मार्गदर्शक सिद्धांत रहा है। इसका सबसे सशक्त रूप भारत की G20 अध्यक्षता 2023 के दौरान देखने को मिला, जब भारत ने अपने कार्यकाल का आदर्श वाक्य ‘वन अर्थ, वन फैमिली, वन फ्यूचर’ रखा और यह सुनिश्चित किया कि सभी फैसले इसी भावना को प्रतिबिंबित करें।
वर्तमान स्थिति
हाल के वर्षों में ग्लोबल साउथ के साथ भारत की साझेदारी उसकी विदेश नीति का एक मुख्य स्तंभ बन गई है। G20 अध्यक्षता के दौरान भारत की सबसे बड़ी उपलब्धियों में अफ्रीकी संघ (AU) को G20 का पूर्ण सदस्य बनाना शामिल है। 54 अफ्रीकी देशों वाले इस संगठन की सदस्यता का मुद्दा वर्षों से लंबित था, जिसे भारत ने आम सहमति बनाकर साकार किया।
भारत की अर्थव्यवस्था में आई तेज़ वृद्धि ने ग्लोबल साउथ के साथ उसके जुड़ाव को और मजबूत किया है। 2014 में प्रधानमंत्री मोदी के सत्ता संभालने के समय भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था। आज यह चौथे स्थान पर है और अनुमान है कि 2027 तक तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है। भारत वर्तमान में दुनिया की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है, जहां हालिया तिमाही में GDP वृद्धि 8.2 प्रतिशत दर्ज की गई। अनुमान है कि भारत की अर्थव्यवस्था 2035 तक 10 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की हो जाएगी।
संकट में ‘पहला मददगार’
आर्थिक मजबूती के चलते भारत वैश्विक संकटों में एक ‘फर्स्ट रिस्पॉन्डर’ के रूप में उभरा है।
कोविड-19 महामारी के दौरान भारत ने 150 से अधिक देशों को दवाएं और 100 से ज्यादा देशों को ‘वैक्सीन मैत्री’ पहल के तहत 30 करोड़ से अधिक टीके उपलब्ध कराए, जिनमें से अधिकांश निःशुल्क थे।
2022 में श्रीलंका के गंभीर आर्थिक संकट के समय भारत ने 4.5 अरब डॉलर की सहायता दी। इसके अलावा अफगानिस्तान, मालदीव समेत कई देशों को वित्तीय मदद, खाद्यान्न और दवाइयां प्रदान की गईं। भूकंप, बाढ़ जैसी आपदाओं के समय भी भारत ने पड़ोसी और दूरस्थ देशों तक त्वरित सहायता पहुंचाई।
सहयोग के चार प्रमुख स्तंभ
आज ग्लोबल साउथ के साथ भारत की साझेदारी चार मुख्य क्षेत्रों पर आधारित है—
डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर और ‘इंडिया स्टैक’
भारत अपनी घरेलू डिजिटल सफलताओं को वैश्विक स्तर पर साझा कर रहा है। फिनटेक कूटनीति के तहत UPI अब नामीबिया, श्रीलंका और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई देशों में लागू या परीक्षण चरण में है, जबकि सोशल इम्पैक्ट फंड के जरिए भारत का 25 मिलियन डॉलर का योगदान छोटे देशों को डिजिटल पहचान और भुगतान प्रणाली विकसित करने में मदद कर रहा है।
स्वास्थ्य और फार्मास्यूटिकल नेतृत्व
‘दुनिया की फार्मेसी’ के रूप में भारत स्वास्थ्य लचीलापन बढ़ाने पर जोर दे रहा है, अफ्रीका और कैरिबियाई देशों को किफायती जेनेरिक दवाएं प्रदान कर रहा है और ग्लोबल साउथ के देशों में दवा नियामकों को प्रशिक्षण दे रहा है।
ग्लोबल डेवलपमेंट कॉम्पैक्ट
2024 में प्रस्तावित इस पहल का लक्ष्य विकास के लिए व्यापार को बढ़ावा देना और रियायती वित्त प्रदान कर विकासशील देशों को कर्ज़ के जाल से बचाना है।
जलवायु न्याय और ऊर्जा परिवर्तन
भारत ‘साझी लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों’ के सिद्धांत के तहत जलवायु न्याय और ऊर्जा परिवर्तन को बढ़ावा दे रहा है। इंटरनेशनल सोलर एलायंस (ISA) के 121 सदस्य देश हैं और मिशन LiFE टिकाऊ जीवनशैली को प्रोत्साहित करता है।
राजदूत अशोक सज्जनहार एक प्रतिष्ठित पूर्व भारतीय राजनयिक हैं, जिन्होंने भारतीय विदेश सेवा (IFS) में 34 वर्षों से अधिक समय तक सेवा दी है और भारत के कज़ाकिस्तान, स्वीडन और लातविया में राजदूत के रूप में कार्य किया है।
(इस लेख में व्यक्त विचार और राय लेखक के अपने हैं और आवश्यक नहीं कि यह ‘न्यू इंडिया अब्रॉड’ की आधिकारिक नीति या रुख को दर्शाते हों।)
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