viewComments Assault on Maliwal, a stark reminder of the perils women face in politics

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मालीवाल पर हमला, AAP के दोहरे मानदंडों को उजागर करता है : राकेश मल्होत्रा

इस मसले पर विभिन्न राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रिया बेहद धीमी और पाखंड से भरी रही। इस घटना के बारे में पूछे जाने पर I.N.D.I.A. गठबंधन के कई नेताओं ने इसे पार्टी का 'आंतरिक मामला' कहकर टाल दिया। इस तरह से गठबंधन के नेताओं ने महिलाओं की सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे को अनदेखा कर दिया।

स्वाति मालीवाल के पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने और बयान देने के बाद AAP ने जल्दबाजी में घटना का बचाव करने की कोशिश की। / X/@swatijaihind

राकेश मल्होत्रा : भारत के राजनीतिक माहौल में एक गंभीर घटना घटी है। राज्यसभा सांसद और महिला अधिकारों की मुखर वकील स्वाति मालीवाल को कथित रूप से दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के निवास स्थान पर उनके निजी सचिव द्वारा हमला किया गया। महिला सांसद के साथ कथित हमले और दुर्व्यवहार ने भारतीय राजनीति पर एक काले साये को उजागर किया है। यह घटना, जो कथित तौर पर मुख्यमंत्री के इशारे पर हुई, महिलाओं की राजनीतिक क्षेत्रों में सुरक्षा और हमारे नेताओं की नैतिक चरित्र पर गंभीर सवाल उठाती है।

आम आदमी पार्टी (AAP) 32 घंटे तक इस घटना पर चुप रही। न तो इसकी पुष्टि की और न ही इसका खंडन किया। बाद में हमले को स्वीकार किया गया और सख्त कार्रवाई का वादा किया गया। लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आरोपित निजी सचिव के साथ सार्वजनिक रूप से दिखाई देने से संदेह और आक्रोश पैदा हुआ है। जवाबदेही के प्रति इस तरह की खुली उदासीनता ने जनता के विश्वास को कमजोर किया है और पार्टी के दोहरे मानदंडों को उजागर किया है।

AAP का जवाब या यों कहें जवाब का अभाव निराशाजनक था। पार्टी और उसके प्रवक्ता चार दिनों तक लगभग चुप्पी साधे रहे। स्वाति मालीवाल के पुलिस में एफआईआर दर्ज कराने और बयान देने के बाद पार्टी ने जल्दबाजी में घटना का बचाव करने की कोशिश की। इसके बाद ट्वीट, एडिटेड वीडियो और झूठे बयान सामने आए। इनका लक्ष्य पीड़िता को बदनाम करना और सच्चाई को छिपाना था।

इस मसले पर विभिन्न राजनीतिक नेताओं की प्रतिक्रिया बेहद धीमी और पाखंड से भरी रही। इस घटना के बारे में पूछे जाने पर I.N.D.I.A. गठबंधन के कई नेताओं ने इसे पार्टी का 'आंतरिक मामला' कहकर टाल दिया। इस तरह से गठबंधन के नेताओं ने महिलाओं की सुरक्षा के महत्वपूर्ण मुद्दे को अनदेखा कर दिया। AAP के संजय सिंह ने मीडिया में आश्वासन दिया कि पार्टी ठोस कार्रवाई करेगी, लेकिन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की निष्क्रियता के बाद उनके शब्द खोखले लगते हैं।

हालांकि कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी ने अपनी चिंता व्यक्त की। राजनीति में महिलाओं की सुरक्षा के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत पर जोर दिया। लेकिन वह अरविंद केजरीवाल की सीधी आलोचना करने से बचती रहीं। वहीं, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में समाजवादी पार्टी के मुूखिया अखिलेश यादव ने यह कहा कि 'इससे ज्यादा महत्वपूर्ण चीजें हैं'। ऐसे बयान साफ तौर पर एक ऐसी सोच को दिखाते हैं जो महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को नजरअंदाज करता है। इस तरह के उदासीन रवैये अस्वीकार्य हैं। ये महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए राजनीतिक प्राथमिकताओं में बदलाव की जरूरत को उजागर करते हैं।

दिल्ली महिला आयोग की एक प्रमुख सदस्य वंदना सिंह ने इस घटना की निंदा की। उन्होंने इस विडंबना पर रोशनी डाली कि दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष भी राजनीतिक क्षेत्र में सुरक्षित नहीं हैं। बीजेपी प्रवक्ता शाजिया इल्मी ने सवाल पूछा कि क्या मुख्यमंत्री केजरीवाल की जानकारी के बिना स्वाति मालीवाल पर हमला हो सकता है? वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी अपनी चिंता व्यक्त करते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की। हालांकि, कार्रवाई के लिए उठती ये आवाजें जैसे बहरों के कानों पर पड़ती नजर आ रही हैं।

यह घटना एक मूलभूत प्रश्न उठाती है कि राजनीति में महिलाएं कितनी सुरक्षित हैं? महिलाओं के प्रतिनिधित्व में प्रगति के बावजूद, राजनीतिक क्षेत्र अभी भी खतरों और गहरे जड़े हुए लिंगवाद से भरा हुआ है। स्वाति मालीवाल का अनुभव शारीरिक और मानसिक दुर्व्यवहार का एक स्पष्ट प्रमाण है, जो सत्ता के पदों पर बैठी महिलाओं को अभी भी झेलना पड़ता है।

इस मामले में आम आदमी पार्टी द्वारा दिखाया गया पाखंड बेहद स्पष्ट है। यह पार्टी है जिसने पारदर्शिता, जवाबदेही और न्याय की लड़ाई के वादे पर अपनी पहचान बनाई थी। लेकिन जब पार्टी की एक महिला सांसद पर हमला होता है, तो उनकी पहली प्रतिक्रिया चुप्पी साधना, फिर पीड़िता को दोषी ठहराना और गलत जानकारी फैलाना होता है। यह न केवल पार्टी की विश्वसनीयता को कमजोर करता है, बल्कि महिलाओं के प्रति व्यवहार के मामले में एक चिंताजनक दोहरा मानदंड को उजागर करता है।

इन घटनाओं को ध्यान में रखते हुए एक मूल सवाल उठता है कि जब महिला सत्ता के गलियारों में भी सुरक्षित नहीं हैं, तो हम महिलाओं को राजनीति में भाग लेने के लिए कैसे भरोसा दिला सकते हैं? मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर एक महिला सांसद पर हमला महज एक अलग घटना नहीं है। यह हमारी राजनीतिक व्यवस्था को प्रभावित करने वाली एक गहरी बीमारी का लक्षण है। हमें सिस्टम में विश्वास बहाल करने के लिए तत्काल और खास कार्रवाई करने की आवश्यकता है।

इनमें ये बातें शामिल हो सकती हैं:
- पारदर्शी जांच: एक तेज, पारदर्शी और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, जिसमें लोगों को नियमित अपडेट दिया जाए।
- जवाबदेही: मुख्यमंत्री को अपने कार्यों और स्टाफ के आचरण के लिए पूरी तरह से जवाबदेह होना चाहिए। इसमें जांच के परिणामों के आधार पर इस्तीफा या निलंबन की कार्रवाई भी शामिल है।
- संस्थागत सुधार: महिला आयोग को मजबूत बनाना और यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि कानूनी एजेंसियां ​​इस तरह के मामलों की जांच के लिए सक्षम और प्रतिबद्ध हैं।
- न्यायिक निगरानी: न्यायपालिका को यह सुनिश्चित करने के लिए एक सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए कि ऐसे हाई प्रोफाइल लोगों से जुड़े मामले को दबाया न जाए।

मुख्यमंत्री के घर पर एक महिला सांसद पर हमला राजनीति में महिलाओं के सामने आने वाली चुनौतियों की याद दिलाता है। महिलाओं पर होने वाली हिंसा के खिलाफ एकजुट मोर्चे का आह्वान करता है। हमारे नेताओं और संस्थानों से जवाबदेही की मांग करता है। तभी हम सभी के लिए एक सुरक्षित और समावेशी राजनीतिक माहौल बनाने की उम्मीद कर सकते हैं।

स्वाति मालीवाल पर हमला महज एक अलग घटना नहीं है। यह राजनीतिक व्यवस्था में एक अधिक महत्वपूर्ण समस्या का लक्षण है। महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और राजनीतिक स्थिति पार्टी के प्रति वफादारी और राजनीतिक चालबाजी से पहले आनी चाहिए। इन मौलिक मुद्दों का हल किए बिना, महिलाओं के लिए वास्तव में एक समावेशी और सुरक्षित राजनीतिक माहौल का वादा अधूरा ही रहेगा।

(लेखक राकेश मल्होत्रा 'Five Global Values' के संस्थापक हैं। जो सम्मान, आत्मविश्वास, विश्वास, खुशी और ज्ञान के पांच मूल्यों को जीने और बच्चों को सिखाने के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाते हैं। वे Global Indan Diaspora के संस्थापक और Federation of Indian Association के पूर्व अध्यक्ष भी हैं। इस लेख में व्यक्त विचार और राय लेखक के हैं और जरूरी नहीं कि वे New India Abroad की आधिकारिक नीति या स्थिति को दर्शाते हों।)

 

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