अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प / REUTERS/Jonathan Ernst/File Photo
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर अनिवार्य मतदाता पहचान पत्र और नागरिकता प्रमाण की मांग दोहराते हुए कहा कि कड़े चुनावी नियम अमेरिकी लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए जरूरी हैं।
जॉर्जिया के रोम शहर में एक विनिर्माण संयंत्र में समर्थकों को संबोधित करते हुए ट्रम्प ने कहा, “हमें मतदाता पहचान पत्र चाहिए। हमें नागरिकता का प्रमाण चाहिए।” उन्होंने आरोप लगाया कि डेमोक्रेटिक पार्टी इन प्रस्तावों का विरोध इसलिए करती है क्योंकि “उनके पास जीतने का एक ही तरीका है—धोखाधड़ी।”
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ट्रम्प ने कहा, “डेमोक्रेट्स हमें मतदाता पहचान नहीं देना चाहते क्योंकि वे धोखा देना चाहते हैं।” उन्होंने यह भी खारिज किया कि मतदाता पहचान संबंधी नियम भेदभावपूर्ण हैं। उनके अनुसार, “वे कहते हैं कि मतदाता पहचान नस्लवादी है, लेकिन सर्वेक्षण बताते हैं कि 95 प्रतिशत लोग मतदाता पहचान चाहते हैं।”
राष्ट्रपति ने डाक के माध्यम से डाले जाने वाले मतपत्रों पर भी सख्ती की मांग की। उन्होंने कहा, “हमें डाक मतपत्र नहीं चाहिए,” और इन्हें “गड़बड़ी वाला” करार दिया। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि दूर तैनात सैन्यकर्मियों, बीमार, दिव्यांग या अस्थायी रूप से बाहर गए लोगों के लिए अपवाद रखा जा सकता है।
ट्रम्प ने मतदान केंद्रों पर दस्तावेज़ सत्यापन को अनिवार्य बनाने की भी वकालत की। उन्होंने कहा, “साबित कीजिए कि आप अमेरिकी हैं, कृपया नागरिकता का प्रमाण दीजिए,” और आरोप लगाया कि डेमोक्रेट्स इसका विरोध कर रहे हैं।
यह बयान ऐसे समय आया है जब जॉर्जिया राज्य हाल के चुनावी चक्रों में राजनीतिक और कानूनी विवादों का केंद्र रहा है। ट्रम्प ने अपने भाषण में फुल्टन काउंटी में हुई एक संघीय छापेमारी का भी जिक्र किया और आरोप लगाया कि मतपत्र जब्त किए गए तथा डेमोक्रेट्स सार्वजनिक जांच से बचना चाहते हैं।
ट्रम्प ने मतदाता पहचान और नागरिकता प्रमाण को दीर्घकालिक राजनीतिक रणनीति बताते हुए कहा, “रिपब्लिकन को यह लड़ाई जीतनी होगी। अगर हमने यह कर लिया तो हम 50 साल तक कोई चुनाव नहीं हारेंगे।”
अमेरिका में मतदाता पहचान संबंधी कानून राज्यों के अनुसार अलग-अलग हैं। कुछ राज्यों में सरकारी फोटो पहचान पत्र अनिवार्य है, जबकि अन्य राज्यों में गैर-फोटो पहचान या शपथपत्र की अनुमति दी जाती है। 2020 के चुनाव के बाद जॉर्जिया ने अपने मतदान कानूनों में सख्ती की थी, जिसमें अनुपस्थित मतपत्र प्रक्रिया और पहचान संबंधी प्रावधानों में बदलाव शामिल थे।
नागरिकता प्रमाण की अनिवार्यता पर भी संघीय और राज्य स्तर पर बहस जारी है। समर्थकों का कहना है कि इससे चुनावी ईमानदारी मजबूत होगी, जबकि विरोधियों का तर्क है कि इससे पात्र मतदाताओं के मतदान अधिकार प्रभावित हो सकते हैं।
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