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अमेरिका में बसे आईआईटियंस संवार रहे भारत में लोगों की जिंदगियां, जानें कैसे

डॉ. चैतन्य बुच न्यू इंडिया अब्रॉड को दिए इंटरव्यू में अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि 2,70,000 से अधिक भारतीय छात्र और इंजीनियर यहां इनोवेशन को आगे बढ़ाने में जुटे हैं।

डॉ. चैतन्य बुच व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक हैं। / Image provided

जो भारतीय अपनी मातृभूमि छोड़कर अमेरिका में आकर बस गए हैं, उनके दिल में अब भी भारत बसा है। इन भारतीयों ने अमेरिका की तरक्की में बड़ा योगदान दिया है। वे अपने भारतीय भाई-बहनों और बुजुर्गों की दिल खोलकर मदद करने से भी पीछे नहीं हटते हैं। ये कहना है कि व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक डॉ. चैतन्य बुच का। 

न्यू इंडिया अब्रॉड के साथ इंटरव्यू में डॉ बुच ने अमेरिका में भारतीय प्रवासियों के योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि 2,70,000 भारतीय छात्र और इंजीनियर यहां पर इनोवेशन को आगे बढ़ाने में जुटे हैं। अमेरिका में 60 प्रतिशत मोटल भारतीयों के हैं। वह 700 अरब डॉलर का योगदान देते हैं, जो अमेरिका के टैक्स रेवेन्यू का 6 प्रतिशत है।

व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन के कार्यों के बारे में बताते हुए डॉ बुच ने कहा कि WHEELS का मतलब Water (जल), Health (स्वास्थ्य), Energy (ऊर्जा), Education (शिक्षा), Livelihood (आजीविका) और Sustainability (स्थिरता) है। 

उन्होंने कहा कि हमारा काम दुनिया भर में इंजीनियरों और इनोवेटर्स के तकनीकी इनोवेशन का फायदा उठाना, उसे समाज के विभिन्न स्तरों पर लागू करना और लोगों को अस्वास्थ्यकर जीवनशैली से छुटकारा पाने में मदद करना है।

डॉ. बुच ने बताया कि व्हील्स ग्लोबल फाउंडेशन की स्थापना भारत के रॉकेट मैन के नाम से मशहूर पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की सलाह से प्रेरित होकर अमेरिका में बसे अखिल भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों द्वारा की गई थी। राष्ट्रपति कलाम ने आईआईटियंस को समाज एवं मरीजों की सहायता के लिए अपनी तकनीकी विशेषज्ञता का इस्तेमाल करने के लिए प्रोत्साहित किया था। उसी के अनुरूप फाउंडेशन का निर्माण हुआ।

इंडियन हेल्थ सेक्टर में भारतीय-अमेरिकियों की भूमिका

डॉ. बुच का कहना है कि भारतीय-अमेरिकी डॉक्टरों ने महत्वपूर्ण योगदान दिया है। इसे 'स्मॉल कम्युनिटी, बिग कंट्रीब्यूट्स, बाउंडलेस होराइजन्स' शीर्षक वाली इंडियास्पोरा इम्पैक्ट रिपोर्ट में भी दर्ज किया गया है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी डॉक्टर रोगी केंद्रित एशियाई चिकित्सा के बारे में सीखकर लाभान्वित हो सकते हैं, वहीं भारतीय डॉक्टर आईआईटियन्स और अन्य पेशेवरों की तकनीकी प्रगति से प्रेरणा ले सकते हैं। 

उन्होंने सुझाव दिया कि अमेरिकी और भारतीय पेशेवरों के बीच इस आदान-प्रदान को इलेक्ट्रॉनिक माध्यम व इंटरनेट के जरिए सुगम बनाया जा सकता है। मैं अमेरिका की कम से कम पांच यूनिवर्सिटीज को जानता हूं जो भारत में हालात सुधारने के लिए प्रयासरत हैं। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के किफायती तरीकों को सीखकर स्वास्थ्य देखभाल को व्यवस्थित बना सकता है।

व्हील्स फाउंडेशन की अभिनव स्वास्थ्य देखभाल

डॉ. बुच ने कहा कि व्हील्स फाउंडेशन का उद्देश्य स्पोकन ट्यूटोरियल के इस्तेमाल से सुलभ व किफायती स्वास्थ्य देखभाल की पेशकश करना है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र के गांव में नवजात कुपोषण पूरी तरह समाप्त किया है। मध्य प्रदेश में भी हम लाखों लोगों की मदद कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि प्रभावशाली स्वास्थ्य समाधान के लिए प्रौद्योगिकी हमेशा आवश्यक नहीं होती है। उदाहरण के लिए गुजरात के 33 जिलों में 10वीं या 12वीं स्वयंसेवक समुदाय के साथ जुड़कर उनकी बीमारियों के बारे में सरल सवाल पूछकर निदान में सहयो कर रहे हैं। यह जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य चिंताओं को दूर करने का प्रभावी तरीका साबित हो रहा है।

डॉ बुच ने कहा कि व्हील्स फाउंडेशन अपनी वैज्ञानिक एवं अनुसंधान समिति के माध्यम से कई दशकों से अमेरिका में बसे पूर्व आईआईटियंस को जोड़ता है। वे सभी न सिर्फ अपने ज्ञान और धन से योगदान करते हैं बल्कि कई बार मुफ्त में भी काम करते हैं। उन्होंने बताया कि फाउंडेशन स्वास्थ्य देखभाल की पहुंच बढ़ाने के लिए टेलीकांफ्रेंसिंग जैसी बुनियादी वीडियो तकनीक का उपयोग करके नवाचारों को अपनाता है।  

उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि हमारे सहयोगी दिल्ली से राजस्थान तक फैले इलाकों में वीडियो कैमरों का उपयोग करके दंत रोगियों को ऑनलाइन निदान, नुस्खे और उपचार सुविधा प्रदान करते हैं। वह मानसिक स्वास्थ्य पर भारत के 10,000 शिक्षकों और 5,000 स्कूलों को प्रशिक्षण देने पर काम कर रहे हैं। भारतीय प्राचीन विज्ञान की भी मदद ली जाती है। 

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