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ICE डिटेंशन सेंटर में सबसे ज्यादा भारतीय, अमानवीय हालात में जी रहे जिंदगी!

ला रेसिस्टेंसिया ग्रुप की इमिग्रेशन एक्टिविस्ट मारू मोरा विलाल्पांडो ने ब्रीफिंग में डिटेंशन सेंटर की बदहाली पर कई खुलासे किए।

ला रेसिस्टेंसिया टैकोमा का संगठन है जो डिटेंशन में रहने वाले अप्रवासियों के लिए लड़ता है। / Facebook : La Resistencia

वाशिंगटन के टैकोमा स्थित इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (आइसीई) डिटेंशन सेंटर में कैद भारतीय नागरिक रणधीर सिंह ने दो साल तक भूख हड़ताल की। यह अनशन डिटेंशन सेंटर में कैदियों की दयनीय स्थिति के खिलाफ विरोध स्वरूप किया गया था। 

ला रेसिस्टेंसिया ग्रुप से जुड़ी इमिग्रेशन एक्टिविस्ट और लैटिनो एडवोकेसी की सीईओ मारू मोरा विलाल्पांडो ने एथनिक मीडिया सर्विसेज की ब्रीफिंग में डिटेंशन सेंटर की बदहाली को लेकर कई जानकारी शेयर कीं। उन्होंने बताया कि टैकोमा सेंटर में कैद नागरिकों में सबसे ज्यादा भारतीय हैं।  

आइसीई के आंकड़ों के अनुसार, पिछले 30 दिनों में 2 लाख से अधिक अप्रवासियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें से कम से कम 8,000 को देश से बाहर भेज दिया गया है।  

इमिग्रेशन डिटेंशन सेंटर को संचालित करने की जिम्मेदारी जीईओ (GEO) नामक प्राइवेट प्रिजन कंपनी को दी गई है। आरोप है कि सेंटर में कैदियों को अमानवीय हालात में रखा जाता है। चार्ल्स डी ओ'डेनियल नामक एक कैदी की चार साल तक आइसोलेशन में रहने के बाद मौत हो गई। जोस सांचेज़ कास्त्रो की मौत मेडिकल आइसोलेशन में हुई। 

ला रेसिस्टेंसिया टैकोमा का जमीन से जुड़ा संगठन है। यह पिछले 11 साल से डिटेंशन में रहने वाले रहे अप्रवासियों के अधिकारों के लिए लड़ रहा है। इसकी स्थापना मार्च 2014 में एक बड़ी भूख हड़ताल के बाद हुई थी। नॉर्थ वेस्ट आइसीई प्रोसेसिंग सेंटर में अमानवीय परिस्थितियों के विरोध में 1,200 से अधिक लोगों ने ये हड़ताल की थी।  

मोरा विलाल्पांडो ने कहा कि डिटेंशन में रहने वाले लोगों के भी बुनियादी अधिकार होते हैं। टैकोमा फैसिलिटी में कैदी खराब खाना, गंदे कपड़े और अपर्याप्त मेडिकल देखभाल की शिकायत करते रहते हैं। गंदगी और मेडिकल आइसोलेशन ने स्वास्थ्य स्थितियों को और बिगाड़ दिया है।  फैसिलिटी को साफ रखने के लिए कैदियों को न्यूनतम मजदूरी तक नहीं दी जाती है।  

मोरा विलाल्पांडो ने कहा कि जीईओ लाभ कमाने के लिए कैदियों को उचित मजदूरी तक नहीं देता। सेंटर में संक्रामक बीमारियों में वृद्धि हो रही है। पिछले महीने वैरिसेला (चिकनपॉक्स) का प्रकोप हुआ था। अभी एक और कोविड प्रकोप चल रहा है। 

आइसीई के अधिकारी शिकायतें दर्ज करने के लिए अब डिजिटल टैबलेट का उपयोग करते है, लेकिन जो कैदी इस तकनीक से अपरिचित हैं या जो अंग्रेजी नहीं बोलते हैं, उनके लिए शिकायत दर्ज करना और भी मुश्किल हो गया है। मोरा ने कहा कि 2023 में इंस्पेक्टर जनरल की एक रिपोर्ट में माना था कि शिकायत प्रणाली काम नहीं कर रही है। यही कारण है कि लोग भूख हड़ताल पर जाते हैं। 

उन्होंने दावा किया कि विरोध करने वाले कैदियों पर अत्याचार किया जाता है। उन्हें यूनिट से अलग कर दिया जाता है, सॉलिटरी कन्फाइनमेंट में डाल दिया जाता है या देश से बाहर भेज दिया जाता है। रणधीर सिंह को भी हाल ही में देश से बाहर भेज दिया गया। 

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