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पॉवेल बुक्स... यानी दुनिया का सबसे बड़ा स्वतंत्र बुक स्टोर और किताबों का दुर्लभ संसार

इस स्टोर में 10 लाख से अधिक नई और पुरानी किताबों का संग्रह है। नई-पुरानी दोनों तरह की किताबें हैं।

 दुनिया का सबसे बड़ा स्वतंत्र बुक स्टोर। दुनिया का सबसे बड़ा स्वतंत्र बुक स्टोर। / Tapasya Chaubey

पोर्टलैंड, ओरेगन में स्थित 'पॉवेल बुक्स' दुनिया का सबसे बड़ा स्वतंत्र बुक स्टोर है। वैसे तो गिनीज के अनुसार विश्व रिकॉर्ड में सबसे बड़ी व्यक्तिगत किताबों की दुकान न्यूयॉर्क का बार्न्स एंड नोबल हैजो की 5th एवेन्यू पर स्थित है। पर यह क्षेत्रफल के आधार पर है। पॉवेल बुक्स को नंबर वन बुक शेल्फ के मामले में चुना गया है। 

इस स्टोर में दस लाख से अधिक नई और पुरानी किताबों का संग्रह है। इनके किताबों का संग्रह करने का तरीका भी बड़ा सुंदर है। इसकी तीन मंजली बिल्डिंग में नौ अलग-अलग, रंग से मार्क किए टाइटल एरिया और फिर हर शेल्फ में जो महत्वपूर्ण किताबें थीं उनके नीचे एक नोट कि किताब क्यो पढ़ें... के बारे में था। 

ज्ञान के संसार में ले जाती हैं ये सीढ़ियां... / Tapasya Chaubey

यहां नई और पुरानी किताबें एक साथ रखी हैं। मानों ज्ञान है कोई भेद- भाव नहीं। दुर्लभ पुस्तकों का कमरा सबसे ऊपरी मंजिल पर है। यहां कई रेयर बुक मिल जाएंगी जिनमें कुछ प्रकाशित नहीं हुईं, तो कई पर लेखक के ऑटोग्राफ और पहला संस्करण भी शामिल है। 

यहां जाना मेरी सूची में शामिल था पर यात्रा आपकी टाइमिंग के हिसाब से नहीं चलती। हम अब दुविधा में थे की सियटल में अमेजन का ऑफिस देखें या यहां से ढाई घंटे दूर पोर्टलैंड, पॉवेल बुक स्टोर। हमे सेम डे वापसी की उड़ान भी लेनी थी, पोर्टलैंड से। ऐसे में ट्रैफिक को देखते हुए तय हुआ की कि पॉवेल ही चलते हैं। 

पॉवेल के लिए पूरा दिन भी कम पड़ता पर हम तीन घंटे में घूमकर एयरपोर्ट पहुंच गए। वहां जाने पर मालूम हुआ की फ्लाइट 5 घंटे लेट है। मेरे साथी भन्ना गए कि काश, पहले खबर किए होते तो हम अमेजन का ऑफिस देख लिए होते। मैंने मुस्कुराते हुए कहा- इसीलिए कहती हूं, यात्रा-किताबें और संगीत अपने राह-राही ढूंढ लेते हैं।
 

अंदर से बाहर का एक दृष्य। / Tapasya Chaubey

खैर, अब कहानी पॉवेल की स्थापना की। पॉवेल बुक्स की स्थापना सबसे पहले शिकागो में हुई। माइकल पॉवेल जो शिकागो विश्वविद्यालल में स्नातक छात्र थे, उन्होंने 1970 में यह किताबों की दुकान खोली। माइकल के पिता, वाल्टर पॉवेल, ने रिटारमेंट के बाद एक गर्मी उनकी दुकान पर काम करते हुए बिताई। उन्हें यह अनुभव इतना भाया की पोर्टलैंड लौटने पर उन्होंने अपनी खुद की पुरानी किताबों की दुकान खोल ली। और उसका भी नाम पॉवेल ही रखा। उन्होंने धीरे-धीरे नई के साथ पुरानी और अद्भुत किताबें संग्रह कीं। 
 

समय के साथ पॉवेल बुक्स ने 1994 में एक वृहत ऑनलाइन स्टोर भी लॉन्च किया जिससे उनकी किताबें दुनिया भर के पाठकों तक पहुंचने लगीं। सालों से यहां साहित्यिक गोष्ठियां और लेखकों से बातचीत का भी कार्यक्रम भी आयोजित होता रहा है। 

किताबों की मोहक दुनिया
यह स्टोर अब इनकी तीसरी पीढ़ी संभाल रही है। देख कर ऐसा लगता है उतनी ही लगन और किताबों के प्रेम में डूबी हुई यह पीढ़ी। एमिली कहती हैं कि मेरे दादाजी ने मुझे सिखाया कि हमारा काम लेखक की आवाज को पाठक के कानों तक पहुंचाना है और अपने अहंकार को बीच में नहीं आने देना है।

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