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कमला हैरिस होंगी अमेरिका की अगली राष्ट्रपति? जानिए पूरा राजनीतिक गणित

ह कोई संयोग नहीं होगा और न ही इच्छाधारित सोच। यह जीत गठबंधन के गणित, आर्थिक यथार्थवाद और विदेश नीति में अनुशासन का परिणाम होगी — न कि दिखावटी राजनीति का।

कमला हैरिस / @simonateba

मैंने तीन दशक सिलिकॉन वैली की नवाचार संस्कृति, वॉल स्ट्रीट की पूंजी, हॉलीवुड की कथा-निर्माण शक्ति और वॉशिंगटन की नीति-निर्माण प्रक्रिया के चौराहे पर बिताए हैं। इसी अनुभव के आधार पर — और भारतीय-अमेरिकी समुदाय में जीवन भर की भागीदारी के चलते — मैं पूरे भरोसे के साथ कह सकता हूँ कि उपराष्ट्रपति कमला हैरिस अमेरिका की अगली राष्ट्रपति होंगी।

यह कोई संयोग नहीं होगा और न ही इच्छाधारित सोच। यह जीत गठबंधन के गणित, आर्थिक यथार्थवाद और विदेश नीति में अनुशासन का परिणाम होगी — न कि दिखावटी राजनीति का।

यह लेख बताता है कि अमेरिका में राष्ट्रपति कैसे चुने जाते हैं:
डेमोक्रेटिक प्राइमरी में निर्णायक भूमिका निभाने वाले मतदाताओं का शुरुआती भरोसा, आम लोगों की ज़िंदगी से जुड़ा व्यावहारिक आर्थिक एजेंडा, और ऐसा शासन मॉडल जो विदेश में सख़्ती से प्रतिस्पर्धा करे लेकिन देश के भीतर अराजकता न फैलाए।

असली ताकत: ज़मीन पर बना संगठनात्मक ढांचा
यह भी उस बुनियादी ढांचे की कहानी है जो भावनाओं को वोट में बदलता है - संगठक, दानदाता, स्मॉल-डॉलर नेटवर्क, मंदिर और चर्च समुदाय, प्रवासी पेशेवर, माइक्रो-इन्फ्लुएंसर, यूनियन हॉल, स्टार्टअप हब और मोहल्ला स्तर के नेता। यह ढांचा पहले से मौजूद है। हम इसके भीतर रह रहे हैं। जिसे वॉशिंगटन के पंडित “बुक टूर” कह रहे हैं, वह असल में एक लिसनिंग इंजन है — सुनने, परखने, सुधारने और संदेश को बड़े स्तर पर पहुँचाने की रणनीति। शहर-दर-शहर, हजारों की भीड़ वाले कार्यक्रमों में हैरिस पहले सुनती हैं, बाद में बोलती हैं। यही तालमेल तालियों को अपनापन बनाता है।

हर कार्यक्रम एक “बीटा टेस्ट” की तरह है — संदेशों का परीक्षण, भावनात्मक प्रतिक्रिया का आकलन और कार्यक्रम के बाद डिजिटल नेटवर्क का निर्माण। इसका नतीजा स्पष्ट है: युवा मतदाता, अश्वेत महिलाएँ, लातीनी और एशियाई अमेरिकी (जिसमें भारतीय-अमेरिकी शामिल हैं), और उपनगरीय परिवार — सभी इससे जुड़ रहे हैं। केबल टीवी इसे कम आँक सकता है, क्योंकि यह ग्रीन रूम के लिए नहीं बना। लेकिन खामोश गति इसकी ताकत है, कमजोरी नहीं।

चार ‘कैपिटल’ क्या संकेत देते हैं — 2028 की तस्वीर
मैं अमेरिकी चुनावों को चार परस्पर जुड़ी शक्तियों के ज़रिये देखता हूं-सिलिकॉन वैली — तकनीक और प्रतिभा हैरिस का गठबंधन तकनीक, सेमीकंडक्टर और एआई की वास्तविक ज़रूरतों को समझता है। उनका संदेश है — पूर्वानुमेय नीति, न कि सुर्ख़ियों से चलने वाला शासन।

वॉल स्ट्रीट- पूंजी और महंगाई
टैरिफ जब दिखावे का औज़ार बनते हैं, तो आम परिवारों पर टैक्स की तरह असर डालते हैं। हैरिस का आर्थिक प्रस्ताव स्थिरता और वहन-योग्यता पर केंद्रित है — परिवार-केंद्रित टैक्स राहत, दवा कीमतों पर ठोस कार्रवाई और वास्तविक आवास निर्माण।

हॉलीवुड- कहानी और संस्कृति
संस्कृति को उपदेश देकर नहीं जीता जाता, बल्कि लोगों को कहानी का हिस्सा बनाकर। हैरिस की “पहले सुनो” रणनीति स्थानीय नेताओं और माइक्रो-इन्फ्लुएंसर्स को जन्म देती है — यही संस्कृति को ढांचे में बदलना है।

वॉशिंगटन-संस्थान और वैधता
घरेलू वैधता के बिना वैश्विक प्रभाव खोखला होता है। हैरिस की प्रवृत्ति है — कानून के दायरे में सत्ता का उपयोग, स्वतंत्र न्याय व्यवस्था और जवाबदेही।

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भारतीय-अमेरिकी समुदाय: रातों-रात नहीं बना प्रभाव
भारतीय-अमेरिकी समुदाय का राजनीतिक प्रभाव किसी एक चुनाव या घटना का परिणाम नहीं है, बल्कि दशकों की संगठित मेहनत का नतीजा है। बिखरे पेशेवरों से शुरू होकर यह समुदाय आज एक सशक्त नागरिक शक्ति के रूप में उभरा है। मई 2023 में भारतीय-अमेरिकी नेटवर्क ने बाइडेन-हैरिस अभियान की शुरुआती फंडिंग और समर्थन में अहम भूमिका निभाई, जबकि मई 2024 में टेक उद्योग के दिग्गज विनोद खोसला ने सिलिकॉन वैली में राष्ट्रपति जो बाइडेन के लिए बड़े स्तर का फंडरेज़र आयोजित किया। इसकी जड़ें और गहरी हैं—साल 2000 में ही खाड़ी क्षेत्र में अल गोर के लिए करीब 6 लाख डॉलर जुटाए गए थे। तकनीक, वित्त, चिकित्सा और शिक्षा जैसे प्रभावशाली क्षेत्रों में मजबूत मौजूदगी के चलते भारतीय-अमेरिकी समुदाय आज अमेरिकी राजनीति में अपेक्षाकृत अधिक संगठित और प्रभावशाली भूमिका निभा रहा है।

निजी संदर्भ: बर्कले, मंदिर और गठबंधन की जड़ें
मेरे माता-पिता श्यामला गोपालन और डोनाल्ड हैरिस को जानते थे। लिवरमोर का शिव-विष्णु मंदिर — जिसे हमारे परिवारों ने मिलकर बनाया — सांस्कृतिक और नागरिक जीवन का केंद्र रहा है। मुदाय की स्मृति में है कि कमला हैरिस मंदिर आयोजनों में शामिल होती थीं। गठबंधन ऐसे ही स्थानों में जन्म लेते हैं — जहाँ बुज़ुर्ग बात करते हैं, बच्चे सुनते हैं और जिम्मेदारी की भावना पनपती है।

शुरुआती राज्यों का गणित
डेमोक्रेटिक प्राइमरी उन मतदाताओं से तय होती है जो सच में वोट डालते हैं। दक्षिण कैरोलिना में अश्वेत महिलाओं का भरोसा, नेवादा और फिर कैलिफ़ोर्निया — यह क्रम हैरिस को शुरुआती बढ़त देता है। यह कोई जादू नहीं, कैलेंडर का गणित है।

आम चुनाव: “मैंने पहले ही कहा था” — एक योजना के साथ
आम चुनाव में 2028 की राजनीति का सबसे असरदार जुमला “मैंने पहले ही कहा था” बन सकता है। टैरिफ के जरिए अर्थव्यवस्था चलाने से महंगाई बढ़ेगी—यह बात लोगों ने अपनी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में महसूस की, और सत्तावादी प्रवृत्तियाँ अधिकारों को कुचलेंगी—यह सच भी सामने आया। लेकिन कमला हैरिस की राजनीति केवल आलोचना तक सीमित नहीं है; वह इसके साथ ठोस समाधान भी रखती हैं—नीतियों में स्थिरता ताकि जनता और उद्योग दोनों भविष्य की योजना बना सकें, महंगाई से राहत ताकि घर-परिवार का बजट संभल सके, और संस्थागत संयम ताकि लोकतंत्र मजबूत रहे और सत्ता जवाबदेह बनी रहे।

दक्षिण एशियाई महिलाओं की भूमिका
हज़ारों महिलाओं के ऑनलाइन-ऑफलाइन सम्मेलन, स्वयंसेवक नेटवर्क, राइड और चाइल्ड-केयर सिस्टम — यह प्रतीक नहीं, लॉजिस्टिक्स है। यही चुनाव जीतता है।

परिपक्व विदेश नीति
चीन से सख़्त प्रतिस्पर्धा, अहम तकनीकों की सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला का विविधीकरण और संकट-संवाद खुले रखना — बिना नाटकीयता, बिना अराजकता। यही हैरिस की विदेश नीति की पहचान है, क्योंकि यह मांग ऊपर से नहीं, नीचे से आ रही है। मीडिया इसे नज़रअंदाज़ कर सकता है, लेकिन संगठन एयरटाइम से ज़्यादा ताकतवर होता है।

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