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'मिलियन डॉलर टीचर प्राइज' की दौड़ में भारत के तीन शिक्षक भी शामिल

यह पुरस्कार उन शिक्षकों को सम्मान देने के लिए बनाया गया है जिनकी मेहनत, सोच और करुणा दुनिया के सामने लाने लायक है।

सुधांशु शेखर पांडा, मेहराज खुर्शीद मलिक, रूबल नागी / Global Teacher Prize

यूके की वर्की फाउंडेशन द्वारा आयोजित ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 की टॉप-50 सूची में भारत के तीन शिक्षकों ने जगह बनाई है। इस पुरस्कार के तहत विजेता को 10 लाख अमेरिकी डॉलर यानी करीब 8 करोड़ रुपये दिए जाते हैं।

यह प्रतियोगिता वर्की फाउंडेशन, यूनेस्को और जेम्स एजुकेशन के सहयोग से आयोजित की जाती है। टॉप-50 में चुने गए भारतीय शिक्षकों में सुधांशु शेखर पांडा, मेहराज खुर्शीद मलिक और रौबल नागी हैं। इन तीनों का काम शिक्षा के अलग-अलग क्षेत्रों में बड़ा बदलाव ला रहा है।

वर्की फाउंडेशन के संस्थापक सनी वर्की ने कहा कि यह पुरस्कार उन शिक्षकों को सम्मान देने के लिए बनाया गया है जिनकी मेहनत, सोच और करुणा दुनिया के सामने लाने लायक है।

यूनेस्को की शिक्षा निदेशक स्टेफानिया जियानिनी ने कहा कि आज की दुनिया शिक्षक संकट, तकनीकी बदलाव और जलवायु जैसी चुनौतियों से जूझ रही है। उन्होंने साफ कहा कि अगर हमें एक न्यायपूर्ण और टिकाऊ भविष्य बनाना है, तो शिक्षकों में निवेश करना सबसे जरूरी है।

सुधांशु शेखर पांडा

सुधांशु शेखर पांडा उत्तर प्रदेश के मेरठ के स्कूल शिक्षक हैं। उन्होंने पिछले 30 वर्षों में हजारों छात्रों का जीवन बदला है। इसके साथ ही वह 6,000 से ज्यादा शिक्षकों को प्रशिक्षण दे चुके हैं। अगर उन्हें यह पुरस्कार मिलता है तो वे भारत में शिक्षा उत्कृष्टता केंद्र खोलना चाहते हैं। उनका लक्ष्य शिक्षक प्रशिक्षण को और बढ़ाना, समुदाय आधारित शिक्षा कार्यक्रम फैलाना और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बनाना है।

मेहराज खुर्शीद मलिक

मेहराज जम्मू-कश्मीर के शिक्षक हैं। उन्होंने माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़कर घाटी में शिक्षा को संघर्ष और कट्टरता के खिलाफ एक हथियार बनाया। वह 1,000 से ज्यादा वालंटीयर के नेटवर्क का नेतृत्व करते हैं। यह नेटवर्क शांति, सम्मान और नागरिक जिम्मेदारी को बढ़ावा देता है। पुरस्कार मिलने पर वे परिवर्तनकारी शिक्षा केंद्र शुरू कर इस काम को और बड़े स्तर पर ले जाना चाहते हैं।

रौबल नागी

रौबल नागी एक कलाकार और शिक्षिका हैं। वह कला आधारित शिक्षा के जरिए झुग्गी और ग्रामीण इलाकों के बच्चों को सशक्त बना रही हैं। उनका मिसाल इंडिया’ कार्यक्रम अब तक 10 लाख से ज्यादा बच्चों तक पहुंच चुका है। अगर उन्हें यह पुरस्कार मिलता है तो वे नए शिक्षा केंद्र खोलने और युवाओं के लिए कौशल प्रशिक्षण बढ़ाने की योजना रखती हैं।

भारत के लिए यह उपलब्धि शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे सकारात्मक बदलावों को दिखाती है। अब नजरें इस बात पर हैं कि क्या इनमें से कोई शिक्षक ग्लोबल टीचर प्राइज 2026 का विजेता बनता है।

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