ओलंपियन दविंदर सिंह गरचा / image provided
1980 के मॉस्को ओलंपिक खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाली भारतीय हॉकी टीम के सदस्य और दिग्गज हॉकी खिलाड़ी ओलंपियन दविंदर सिंह गरचा का निधन हो गया है। 73 वर्षीय दविंदर सिंह गरचा ने जालंधर स्थित अपने आवास पर अंतिम सांस ली। पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वे नाश्ता करते समय डाइनिंग टेबल पर बैठे थे, तभी उन्हें अचानक दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। परिवार के अनुसार, दविंदर सिंह गरचा का अंतिम संस्कार 14 जनवरी को किया जाएगा।
दविंदर सिंह गरचा पंजाब पुलिस में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल (DIG) के पद से सेवानिवृत्त हुए थे। उनके परिवार में पत्नी और एक पुत्र हैं। बताया गया है कि इसी माह की शुरुआत में उन्होंने दिल से जुड़ी एक चिकित्सकीय प्रक्रिया भी कराई थी।
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पुलिस सेवा और हॉकी—दोनों में विशिष्ट योगदान
दविंदर सिंह गरचा ने पुलिस सेवा में रहते हुए खन्ना और मोगा में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) के रूप में भी अपनी सेवाएं दीं। सेवानिवृत्ति के बाद भी वे हॉकी से जुड़े रहे और खेल के प्रचार-प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाते रहे। अपने बचपन के मित्र और 1975 विश्व कप विजेता भारतीय हॉकी टीम के खिलाड़ी मोहिंदर सिंह ‘मुंशी’ की स्मृति में वे हर वर्ष एक आमंत्रण हॉकी टूर्नामेंट का आयोजन करते थे। इस टूर्नामेंट का अंतिम संस्करण नवंबर 2025 में खेला गया था।
पेनल्टी कॉर्नर के महारथी
दविंदर सिंह गरचा अपनी घातक पेनल्टी कॉर्नर हिट्स के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे। 1980 मॉस्को ओलंपिक में उन्होंने आठ गोल दागकर टूर्नामेंट के तीसरे सबसे अधिक गोल करने वाले खिलाड़ी का गौरव हासिल किया था। उन्होंने भारत के लिए विभिन्न तीन अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंटों में कुल 30 अंतरराष्ट्रीय मैच खेले और 19 गोल किए। इस दौरान वे पूर्व भारतीय गोलकीपर और वर्तमान में ऑल इंडिया सुरजीत हॉकी टूर्नामेंट कमेटी के CEO इकबाल सिंह संधू के साथ भी खेले।
ओलंपियन दविंदर सिंह गरचा अपने मित्रों के साथ। / image provided
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