ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

मिलिए भारतवंशी रिनी संपथ से, वाशिंगटन डीसी मेयर चुनाव पर ठोकी ताल

रिनी संपथ का चुनावी अभियान पूरी तरह से "बैक टू बेसिक्स" (बुनियादी चीजों की ओर वापसी) के मंत्र पर टिका है, जिसका मुख्य उद्देश्य शहर की चरमराती व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना है।

रिनी संपत / Video grab courtesy: X/@RiniSampath

वाशिंगटन डीसी की राजनीति में एक नया चेहरा उभर कर सामने आया है। तमिलनाडु में जन्मीं और पेशे से सरकारी कॉन्ट्रेक्टर रिनी संपथ ने मेयर पद के लिए चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। उन्होंने अपनी मुहिम की शुरुआत शहर के मौजूदा राजनीतिक नेतृत्व पर तीखे प्रहार और बुनियादी सुविधाओं में सुधार के संकल्प के साथ की है।

मुख्य चुनावी मुद्दे
रिनी संपथ का चुनावी अभियान पूरी तरह से "बैक टू बेसिक्स" (बुनियादी चीजों की ओर वापसी) के मंत्र पर टिका है, जिसका मुख्य उद्देश्य शहर की चरमराती व्यवस्था को फिर से पटरी पर लाना है। अपने विजन डॉक्यूमेंट में उन्होंने साफ किया है कि उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता राजनीति नहीं, बल्कि जनता की रोजमर्रा की समस्याओं का समाधान है। इसमें सड़कों के खतरनाक गड्ढों को भरने से लेकर, पोटोमैक नदी में हो रहे दूषित पानी के रिसाव को रोकने जैसे बुनियादी ढांचे के काम शामिल हैं। इसके साथ ही, वह शहर में बेकाबू होती महंगाई पर लगाम लगाने और 911 जैसी आपातकालीन सेवाओं के वेटिंग टाइम में सुधार करने पर जोर दे रही हैं, ताकि वाशिंगटन डीसी के निवासियों को एक सुरक्षित और सुलभ जीवन मिल सके।

यह भी पढ़ें- बड़ी पहल: UCLA हेल्थ में खुलेगी नई कार्डियोलॉजी चेयर, भारतवंशी डॉक्टर ने दान किए $2 मिलियन

"बाहरी" बनाम "राजनीतिक अनुभवी"
रिनी ने खुद को एक 'आउटसाइडर' के रूप में पेश किया है। उन्होंने शहर के वर्तमान राजनीतिक दिग्गजों पर निशाना साधते हुए कहा, "हम सभी जानते हैं कि डीसी सरकार खराब हो चुकी है। आप उस व्यक्ति को पदोन्नति (मेयर का पद) क्यों देंगे जो अपने काम के बुनियादी कार्यों में ही विफल रहा है?" उन्होंने हाल ही में आए बर्फीले तूफानों के दौरान खराब कचरा प्रबंधन और टूटी हुई बुनियादी सुविधाओं का उदाहरण दिया।

तमिलनाडु की जड़ें और पारिवारिक पृष्ठभूमि
रिनी संपथ के व्यक्तित्व और सार्वजनिक सेवा के प्रति उनके जुनून में उनकी तमिलनाडु की जड़ों की गहरी छाप नजर आती है। तमिलनाडु के थेनी जिले में जन्मीं रिनी महज 7 साल की उम्र में अपने परिवार के साथ अमेरिका आ गई थीं, लेकिन आज भी उनकी पहचान का एक बड़ा हिस्सा उनके संस्कार और भाषा हैं। वह बड़े गर्व के साथ तमिल को अपनी मातृभाषा बताती हैं और अपने दादा-दादी को अपनी सबसे बड़ी प्रेरणा मानती हैं, जिन्होंने सीमित शिक्षा (क्रमशः सातवीं और पहली कक्षा) के बावजूद उन्हें जीवन में आगे बढ़ने के संस्कार दिए। इसके साथ ही वह अपने पिता के संघर्षों को भी याद करती हैं, जिन्होंने एक बेहतर भविष्य की तलाश में जोखिम उठाकर अमेरिका बसने का फैसला किया। रिनी का मानना है कि परिवार के इसी साहस और जड़ों से मिले जुड़ाव ने ही उन्हें वाशिंगटन डीसी जैसे शहर के लिए कुछ नया करने की प्रेरणा दी है।

शैक्षणिक और पेशेवर सफर
राजनीति रिनी के लिए नई नहीं है। वह यूनिवर्सिटी ऑफ Southern California (USC) की पहली भारतीय-अमेरिकी महिला छात्र संघ अध्यक्ष रह चुकी हैं। वह पिछले एक दशक से वाशिंगटन में रह रही हैं और एक संघीय ठेकेदार के रूप में सरकारी कार्यक्रमों और नागरिक सेवाओं को बेहतर बनाने का अनुभव रखती हैं।

डीसी मेयर चुनाव
वाशिंगटन डीसी में मेयर-काउंसिल प्रणाली है। चूंकि डीसी में डेमोक्रेटिक पार्टी का वोट बैंक बहुत मजबूत है, इसलिए डेमोक्रेटिक प्राइमरी (16 जून 2026) को ही अक्सर निर्णायक माना जाता है। रिनी का मुकाबला शहर के कई अनुभवी पार्षदों और राजनीतिक दिग्गजों से होगा।

न्यू इंडिया अब्रॉड की अन्य खबरों को पढ़ने के लिए क्लिक करें।

 

Comments

Related