chess (प्रतीकात्मक तस्वीर) / pexels
कैलिफ़ोर्निया के साराटोगा हाई स्कूल की 11वीं कक्षा की छात्रा नेहा शरण ने यह साबित कर दिया है कि बदलाव लाने के लिए उम्र नहीं, दृष्टि और साहस चाहिए। शतरंज और न्यूरोसाइंस के प्रति गहरी रुचि रखने वाली नेहा Girls4Chess की संस्थापक हैं। यह एक ऐसा मंच है जो शतरंज की दुनिया में लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ने का अवसर देने के लिए काम कर रहा है।
नेहा की यह यात्रा उस दिन शुरू हुई, जब वह बे एरिया के अपने पहले शतरंज टूर्नामेंट में पहुंचीं। कमरे में मौजूद 60 खिलाड़ियों में वह अकेली लड़की थीं। यह अनुभव उनके लिए असहज और अकेलापन भरा था, लेकिन इसी पल ने एक बड़े आंदोलन की नींव रख दी। नेहा ने तय किया कि कोई भी लड़की दोबारा ऐसा अकेलापन महसूस न करे और यहीं से Girls4Chess का जन्म हुआ।
बिना किसी फंडिंग, संसाधन या आयोजन अनुभव के नेहा ने पहला ऑल-गर्ल्स शतरंज टूर्नामेंट आयोजित करने की ठानी। न शतरंज की बिसात थी, न घड़ियां—सिर्फ एक विश्वास था कि बदलाव की शुरुआत करनी होगी। उन्होंने वेन्यू बुक किया, फ्लायर्स बनाए, माता-पिता से संपर्क किया और स्वयंसेवकों को जोड़ा। शुरुआती आशंकाओं के बावजूद, यह प्रयास सफल रहा।
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अब तक Girls4Chess के ज़रिए 6 मुफ्त शतरंज टूर्नामेंट आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 150 से अधिक युवा खिलाड़ी, खासकर लड़कियां, हिस्सा ले चुकी हैं। इनमें से कई लड़कियों के लिए यह पहला प्रतिस्पर्धी शतरंज अनुभव था। इन आयोजनों ने न सिर्फ खेल का मंच दिया, बल्कि आत्मविश्वास, नेतृत्व और आपसी जुड़ाव की भावना भी पैदा की।
नेहा शरण को उनके इस प्रयास के लिए 2025–2026 यूएस चेस विमेंस ग्रांट से सम्मानित किया गया है। इस ग्रांट का उपयोग वह पूरी तरह निशुल्क ऑल-गर्ल्स टूर्नामेंट आयोजित करने में कर रही हैं, ताकि आर्थिक स्थिति किसी भी बच्चे के लिए बाधा न बने।
शतरंज के साथ-साथ नेहा की रुचि न्यूरोसाइंस में भी है। वह यूनिवर्सिटी ऑफ इलिनॉय अर्बाना–शैंपेन (UIUC) के एक प्रोफेसर के साथ मिलकर यह शोध कर रही हैं कि शतरंज खेलते समय मस्तिष्क कैसे काम करता है। उनका शोध पैटर्न रिकग्निशन, संज्ञानात्मक विकास और यह समझने पर केंद्रित है कि लड़कियां लंबे समय तक शतरंज से क्यों जुड़ी रहती हैं। यह शोध Girls4Chess के कार्यक्रमों को और प्रभावी बनाने में मदद कर रहा है।
नेहा मानती हैं कि नेतृत्व रेटिंग या खिताब से तय नहीं होता। वह न तो नेशनल मास्टर हैं और न ही टॉप-रैंक्ड खिलाड़ी, लेकिन उन्होंने एक समस्या देखी और उसके समाधान के लिए किसी और का इंतज़ार नहीं किया। यही सोच Girls4Chess को एक साधारण विचार से सामुदायिक आंदोलन में बदलने की वजह बनी।
आज Girls4Chess सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि एक संदेश है कि लड़कियां भी शतरंज की बिसात पर बराबरी से अपनी चाल चल सकती हैं। मीडिया कवरेज, कम्युनिटी पार्टनरशिप और राष्ट्रीय स्तर की पहचान के साथ यह पहल लगातार आगे बढ़ रही है।
नेहा शरण का संदेश साफ है “आपका विचार मायने रखता है। बदलाव लाने के लिए उम्र, पैसा या अनुभव नहीं, बस शुरुआत करने की हिम्मत चाहिए।”
Girls4Chess उसी हिम्मत का प्रमाण है- एक लड़की से शुरू हुआ यह सफर अब सैकड़ों लड़कियों के आत्मविश्वास और भविष्य को आकार दे रहा है।
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