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दिव्यांगता ने मुझे दिशा दी और खेल ने जिंदगी का मकसदः दीपा मलिक

 दीपा मलिक पैरालंपिक गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं।  दीपा मलिक पैरालंपिक गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। / न्यू इंडिया अब्रॉड

दीपा मलिक पैरालंपिक गेम्स में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला हैं। हाल ही में वह हार्वर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस में एक वक्ता के रूप में शामिल हुईं। इस मौके पर न्यू इंडिया अब्रॉड से उन्होंने अपने  जीवन के आदर्श वाक्य और भारत में पैरा स्पोर्ट्स के भविष्य पर बातचीत की।

हार्वर्ड इंडिया कॉन्फ्रेंस में एक वक्ता के रूप में आमंत्रित किया जाना कैसा लगता है?

व्यक्तिगत रूप से यह मेरे लिए एक बड़ा सम्मान है। मेरा मंत्र है, कभी हार न मानना। मैं सीखने, चीजों को अपने अनुकूल बनाने, समस्याओं का समाधान खोजने, कभी हार न मानने और अपनी पॉजिटिविटी को बनाए रखने पर फोकस करती हूं। मुझे लगता है कि ये बुनियादी चीजें हैं जो आज के हर युवा के लिए जरूरी हैं। हमारा कल का भविष्य आज की पीढ़ी के हाथों में है। उन्हें समाज को वापस देने की भावना को पूरी चेतना के साथ आत्मसात करना होगा।

आप भारत के कई एथलीटों के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं। इसके बारे में थोड़ा और हमें बताइए। इसने भारत के पैरा स्पोर्ट्स इंफ्रास्ट्रक्चर को कैसे प्रभावित किया है? 

पैरालंपिक खेल विकलांगता से परे क्षमताओं के एक बहुत ही जोरदार बयान के रूप में मेरा एक माध्यम रहा है क्योंकि जब मैं 30 साल की थी, तब ट्यूमर के कारण मुझे लकवा मार गया था। ऐसा मेरे साथ दूसरी बार हुआ था। पहली बार पांच साल की उम्र में मुझे पैरालिसिस हुआ था। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। विकलांगता को लेकर जज्बातों के आगे झुकना मुझे मंजूर नहीं था। खेल ने मुझे जिंदगी का उद्देश्य दिया। विकलांगता ने मेरे जीवन को दिशा दी। इस तरह पैरा स्पोर्ट्स में मेरी एंट्री हुई।

मैं भाग्यशाली हूं कि मैंने न सिर्फ अपने देश के लिए कई पदक जीते बल्कि पैरालंपिक गेम्स की कुछ नीतियों को बदलने और इस खेल को मुख्यधारा में लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेरी भावनाओं को समझा और जैसा कि आप देख सकते हैं, अब हमारे पास दुनिया में सबसे अधिक नकद पुरस्कार हैं और भारत की खेल नीतियां काफी अच्छी हैं। हमारे पास ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो पैरा स्पोर्ट्स में पदक जीतने वाले हर एथलीट से खुद मिलते हैं, बधाई देते हैं और उनका हौसला बढ़ाते हैं।

भारत पहली बार अगले महीने नई दिल्ली में विश्व निशानेबाजी पैरा विश्व कप की मेजबानी करेगा। इसकी तैयारी कैसी चल रही है?

हम इसे लेकर बहुत उत्साहित हैं। यह बड़ा अंतरराष्ट्रीय टूर्नामेंट है। यह पैरा शूटिंग में कोटा हासिल करने की अंतिम प्रतियोगिता है। करीब 50 देशों के खिलाड़ी भारत आकर इसमें शामिल होंगे। हम एशियाई पैरालंपिक समिति के अध्यक्ष की मेजबानी करने के लिए भी उत्सुक हैं। यह आयोजन भारत में अपने एथलीटों को चिकित्सा वर्गीकरण प्रदान करने का एक शानदार अवसर भी साबित होगा क्योंकि यह एक एथलीट के रूप में खेल शुरू करने का पहला कदम होता है।

इस टूर्नामेंट के दौरान बहुत से नए एथलीट भी आएंगे। ऐसे एथलीट, जिन्हें पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता देखने का मौका मिलेगा। इसके जरिए हम एक और वैश्विक आयोजन करेंगे और यह इस तरह के आयोजनों की शानदार शुरुआत होगी। हम 2025 में पैरा एथलेटिक्स विश्व चैंपियनशिप की मेजबानी पर भी चर्चा कर रहे हैं। देखा जाए तो भारत में पैरा स्पोर्ट्स के उत्थान की दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे। 

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