अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एजेंसी के प्रशासक टेरेंस कोल। / IANS
नशीले पदार्थों के खिलाफ चल रही मुहिम में भारत के साथ बड़े सहयोग के तहत अमेरिका ने भारत से जुड़े ऑनलाइन ड्रग तस्करों के एक नेटवर्क पर बड़ी कार्रवाई की है। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, यह नेटवर्क अमेरिका में ड्रग ओवरडोज से हुई छह मौतों के लिए जिम्मेदार बताया जा रहा है।
अमेरिकी ड्रग एनफोर्समेंट एजेंसी (DEA) ने बताया कि उसने 'ऑपरेशन मेल्टडाउन' के तहत अमेरिका में चार लोगों को गिरफ्तार किया है और भारत स्थित एक ट्रांसनेशनल क्रिमिनल ऑर्गेनाइजेशन (TCO) से जुड़ी 200 वेबसाइट्स को जब्त किया है।
DEA ने कहा कि वह अपनी वैश्विक पहुंच का उपयोग करते हुए भारत सरकार की कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ मिलकर ऐसे खतरनाक आपराधिक संगठनों की पहचान, जांच और उन्हें खत्म करने के लिए सक्रिय रूप से सहयोग कर रहा है, जो अवैध ड्रग तस्करी में लिप्त हैं।
इस कार्रवाई की घोषणा करते हुए, डीईए प्रशासक टेरेंस कोल ने कहा कि यह मामला दिखाता है कि कैसे विदेशी तस्कर हमारे हेल्थकेयर सिस्टम का दुरुपयोग करते हैं, इंटरनेट के पीछे छिपते हैं और अमेरिका के भीतर मौजूद लोगों के जरिए वैध व्यापार की आड़ में खतरनाक ड्रग्स की सप्लाई करते हैं।
DEA और न्यूयॉर्क के ईस्टर्न डिस्ट्रिक्ट स्थित अमेरिकी अभियोजक कार्यालय के अनुसार, जिन वेबसाइट्स को जब्त किया गया, वे देखने में वैध ऑनलाइन फार्मेसी जैसी लगती थीं, लेकिन इनके जरिए अवैध रूप से दवाएं बेची जा रही थीं।
DEA ने बताया कि उसने इन ऑनलाइन फार्मेसियों के हजारों ग्राहकों की पहचान की है और जांच के समर्थन में जनता से जानकारी जुटाने के लिए 20,000 से ज्यादा पत्र भेजे गए हैं। संबंधित टीसीओ की पहचान उजागर नहीं की गई है, लेकिन एजेंसी के अनुसार वह 2022 से कोलोराडो स्थित DEA फील्ड ऑफिस की जांच के दायरे में थी।
इसके बाद 27 जनवरी से अमेरिका भर में डीईए फील्ड ऑफिसों ने कई छापे मारे, जिनमें चार लोगों को गिरफ्तार किया गया। एजेंसी ने यह भी बताया कि उसने कुछ ऐसी 'फार्मेसियों' के खिलाफ पांच इमीडिएट सस्पेंशन ऑर्डर (ISO) और एक ऑर्डर टू शो कॉज (OTSC) जारी किया है, जिनके पास किसी न किसी रूप में डीईए का पंजीकरण हो सकता था।
DEA के मुताबिक, जिन ऑनलाइन फार्मेसियों को बंद किया गया, उनके पास अमेरिकी वेब एड्रेस और पेशेवर डिजाइन थे ताकि वे खुद को वैध दिखा सकें। लेकिन इनके जरिए जो नकली दवाएं बेची जा रही थीं, वे अक्सर फेंटेनिल या मेथामफेटामिन से बनी होती थीं, जिनका सेवन गंभीर स्वास्थ्य जोखिम, हानिकारक साइड इफेक्ट्स और यहां तक कि मौत का कारण बन सकता है।
जांच में सामने आया कि इन ऑनलाइन फार्मेसियों और उनके सहयोगियों ने बिना वैध प्रिस्क्रिप्शन के दवाओं की अवैध सप्लाई और शिपमेंट की, जो कंट्रोल्ड सब्सटेंसेज एक्ट का उल्लंघन है। DEA के अनुसार, इस तरह तस्कर उस बंद वितरण प्रणाली में सेंध लगा रहे थे, जिसका मकसद डॉक्टर की पर्ची के जरिए मरीजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना होता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने अवैध ड्रग्स, खासकर फेंटेनिल, के खिलाफ जंग को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल किया है। अमेरिकी सरकार के मुताबिक, अगस्त में खत्म हुए 12 महीनों में 73,000 लोगों की मौत ड्रग ओवरडोज से हुई।
ट्रंप ने फेंटेनिल बनाने में इस्तेमाल होने वाले रसायनों के प्रमुख स्रोत चीन को टैरिफ और अन्य दंडात्मक कदमों की चेतावनी दी है। उन्होंने ड्रग तस्करी में कथित भूमिका को वेनेजुएला के पूर्व राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हटाने का भी एक बड़ा कारण बताया।
अमेरिका ने ड्रग्स ले जाने वाली कथित नौकाओं पर हमले किए हैं और कोलंबिया, मैक्सिको समेत अन्य देशों के खिलाफ भी कार्रवाई की चेतावनी दी है। हालांकि, भारत को निशाना नहीं बनाया गया है, क्योंकि नशीले पदार्थों के खिलाफ लड़ाई में भारत सरकार का सहयोग और वैश्विक परिदृश्य में भारत का ड्रग तस्करी का सीमित स्रोत होना, दोनों ही अहम कारक माने गए हैं।
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