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एकदूसरे के दिल में बसते हैं अमेरिका और भारत, विदाई से पहले भावुक हुए गार्सेटी

गार्सेटी ने कहा कि हम लोग शिक्षा व संस्कृति के माध्यम से, खेल के माध्यम से और यात्रा के माध्यम से, न केवल दो देशों को जोड़ते हैं बल्कि उन्हें करीब भी लाते हैं।

एरिक गार्सेटी ने नई दिल्ली में USIEF के कार्यक्रम में राजनयिकों, स्कॉलर्स और अतिथियों को संबोधित किया। / courtesy : Pranavi Sharma

भारत में अमेरिकी राजदूत एरिक गार्सेटी ने एक कार्यक्रम में भावुक विदाई भाषण देते हुए भारत और अमेरिका के आपसी संबंध हमारी सबसे बड़ी ताकत हैं। दोनों देशों के लोग एकदूसरे के दिल में बसते हैं।

नई दिल्ली के फुलब्राइट हाउस में यूनाइटेड स्टेट्स-इंडिया एजुकेशनल फाउंडेशन (USIEF) के कार्यक्रम में राजनयिकों, स्कॉलर्स और अतिथियों को संबोधित करते हुए गार्सेटी ने 'आने वाले समय में लोगों के बीच संबंधों को विस्तार देने के महत्व को रेखांकित किया।

14 साल की उम्र में पहली बार नई दिल्ली आए गार्सेटी ने कहा कि मैं कई खट्टे-मीठे अनुभव लेकर आपके सामने हूं। मुझे इस असाधारण देश में अमेरिकी राजदूत के रूप में सेवा करने का विनम्र अवसर मिला, लेकिन मुझे लगता है कि पलक झपकते ही यह सफर अपने अंत के करीब है।

गार्सेटी ने लोगों के आपसी संबंधों की परिवर्तनकारी शक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि पूरे भारत की यात्रा के दौरान उन्हें सबसे अच्छा तब लगता था, जब लोग बताते थे कि जब वो कोलोराडो या कैलिफोर्निया में रहते थे या फिर जब आयोवा या मैरीलैंड गए थे, तब उन्हें ऐसे लोग मिले थे, जो अब तक उनके दोस्त हैं। किस तरह इस यात्रा ने उनकी जिंदगी बदल दी थी। 

राजदूत ने कहा कि उनके कार्यकाल के दौरान व्यापार रिकॉर्ड ऊंचाई तक पहुंचा, रक्षा सहयोग और शैक्षिक आदान-प्रदान में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। मुझे गर्व है कि मेरे राजदूत बनने के बाद भारत अमेरिकी उच्च शिक्षा क्षेत्र में सबसे ज्यादा छात्र भेजने वाला देश बन गया है। अमेरिकी विश्वविद्यालयों में सभी विदेशी छात्रों में अब 23 प्रतिशत भारतीय हैं जो हमारे विश्वविद्यालयों को समृद्ध कर रहे हैं।

गार्सेटी ने दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक आदान-प्रदान को रेखांकित करते हुए भारतीय फिल्म निर्माताओं और कलाकारों का उदाहरण दिया। उन्होंने सांस्कृतिक कलाकृतियों का अवैध व्यापार रोकने और लूटी गई प्राचीन वस्तुओं की वापसी को सरल बनाने के उद्देश्य से हुए ऐतिहासिक यूएस-इंडिया कल्चरल प्रॉपर्टी एग्रीमेंट का उल्लेख करते हुए सांस्कृतिक संरक्षण में सहयोगी प्रयासों की भी प्रशंसा की। 

उन्होंने बताया कि 2016 से अब तक अमेरिका ने भारत को 578 बेशकीमती कलाकृतियां लौटाई हैं जिनमें से आधी से ज्यादा पिछले साल प्रधानमंत्री मोदी की राजकीय यात्रा के दौरान लौटाई गईं।

वीजा प्रोसेसिंग के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि राजदूत बनने के बाद से हमने वीजा में 60 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि की है। पहली बार आगंतुक वीजा को छोड़कर अन्य सभी वीजा के लिए प्रतीक्षा समय को खत्म कर दिया है। लेकिन अभी भी बहुत काम बाकी है। 

गार्सेटी ने अमेरिका-भारत संबंधों को और मजबूत करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि हम लोग शिक्षा व संस्कृति के माध्यम से, खेल के माध्यम से और यात्रा के माध्यम से, न केवल दो देशों को जोड़ते हैं बल्कि उन्हें करीब भी लाते हैं।


 

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