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अमेरिकी अदालत ने भारतीय नागरिक की हिरासत पर सरकार से मांगा जवाब

यह आदेश 24 दिसंबर को यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, सदर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफ़ोर्निया के जज एंड्रयू जी. शोपलर ने जारी किया।

अमेरिकी ध्वज / IANS

कैलिफ़ोर्निया की एक संघीय अदालत ने अमेरिकी इमिग्रेशन अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वे एक भारतीय नागरिक को हिरासत में रखने के कानूनी आधार को स्पष्ट करें। अदालत ने माना है कि हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका में पर्याप्त दम है और इसे शुरुआती चरण में खारिज नहीं किया जा सकता।

यह आदेश 24 दिसंबर को यूएस डिस्ट्रिक्ट कोर्ट, सदर्न डिस्ट्रिक्ट ऑफ कैलिफ़ोर्निया के जज एंड्रयू जी. शोपलर ने जारी किया। अदालत ने सरकार को हैबियस कॉर्पस याचिका पर जवाब दाखिल करने को कहा है, जो भारतीय नागरिक नवीन नवीन (Naveen Naveen) ने अपनी जारी इमिग्रेशन हिरासत को चुनौती देते हुए दाखिल की है।

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याचिका में “संभावित दम”, शुरुआती खारिजी से इनकार
अपने आदेश में जज शोपलर ने कहा कि याचिका में पर्याप्त संभावित कानूनी आधार है और इसे प्रारंभिक स्तर पर खारिज नहीं किया जाना चाहिए। संघीय नियमों के अनुसार, कोई भी हैबियस याचिका तब तक आगे बढ़ सकती है, जब तक वह एक वैध कानूनी दावा पेश करती हो और यह साफ़ तौर पर न दिखे कि याचिकाकर्ता किसी राहत का हकदार नहीं है।

भारत से अमेरिका तक का मामला
अदालती रिकॉर्ड के मुताबिक, नवीन नवीन 18 अप्रैल 2023 को मेक्सिको के रास्ते बिना निरीक्षण अमेरिका में दाखिल हुए थे। सीमा पार करने के तुरंत बाद उन्हें कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने हिरासत में लिया, लेकिन बाद में ऑर्डर ऑफ रिलीज़ ऑन रिकॉग्निज़ेंस के तहत रिहा कर दिया गया। उसी दिन उन्हें इमिग्रेशन कोर्ट में पेश होने के लिए नोटिस टू अपीयर जारी किया गया, जिसमें उन पर बिना प्रवेश या पैरोल के अमेरिका में मौजूद रहने का आरोप लगाया गया।

ICE चेक-इन के दौरान गिरफ्तारी
याचिका के अनुसार, 3 नवंबर 2025 को नवीन को एक पूर्व-निर्धारित ICE चेक-इन के दौरान गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद इमिग्रेशन एंड कस्टम्स एनफोर्समेंट (ICE) ने निष्कर्ष निकाला कि वह इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट की धारा 1225(b)(2)(A) के तहत अनिवार्य हिरासत के पात्र हैं और उन्हें ज़मानत पर रिहा नहीं किया जा सकता।

कानून की व्याख्या पर विवाद
नवीन ने सरकार की इस व्याख्या को चुनौती दी है। उनका तर्क है कि उनकी हिरासत धारा 1226(a) के तहत होनी चाहिए, जो इमिग्रेशन कार्यवाही लंबित रहने के दौरान ज़मानत या सशर्त रिहाई की अनुमति देती है।

अन्य अदालतों के फैसलों का हवाला
जज शोपलर ने हालिया अपीलीय मार्गदर्शन का हवाला देते हुए कहा कि जब किसी याचिका में कोई भी संभावित दम हो, तो उसे संक्षेप में खारिज करना उचित नहीं है। अदालत ने देशभर की कई संघीय अदालतों—न्यूयॉर्क, कैलिफ़ोर्निया, नेवाडा और वॉशिंगटन—के फैसलों का भी ज़िक्र किया। आदेश में कहा गया कि ऐसे अधिकांश मामलों में या तो याचिकाकर्ताओं के पक्ष में फैसला दिया गया है या फिर सरकार की कानूनी व्याख्या पर सवाल उठाए गए हैं। कई मामलों में अदालतों ने माना है कि समान परिस्थितियों में धारा 1226(a) लागू होती है, न कि 1225(b)(2)।

इस आदेश के साथ ही अब अमेरिकी सरकार को अदालत में यह स्पष्ट करना होगा कि नवीन नवीन की हिरासत किस कानूनी आधार पर जारी रखी जा रही है।

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