ADVERTISEMENT

ADVERTISEMENT

ब्रिस्टल विश्वविद्यालय ने कृष्णेंदु मजूमदार को प्रदान की डॉक्टरेट की मानद उपाधि

मजूमदार को 16 जुलाई को यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के समर ग्रेजुएशन समारोह के दौरान मानद डिग्री मिली।

 कृष्णेंदु मजूमदार अपने जुड़वां बेटों, ईशान और आयुष के साथ अपने मानद 'डॉक्टर ऑफ लेटर्स' (DLitt) समारोह में। कृष्णेंदु मजूमदार अपने जुड़वां बेटों, ईशान और आयुष के साथ अपने मानद 'डॉक्टर ऑफ लेटर्स' (DLitt) समारोह में। / University of Bristol

भारतीय मूल के BAFTA विजेता फिल्मकार कृष्णेंदु मजूमदार को ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी ने मानद 'डॉक्टर ऑफ लेटर्स' (DLitt) की उपाधि से सम्मानित किया है। फिल्म और टेलीविजन के क्षेत्र में उनके बेहतरीन योगदान और क्रिएटिव इंडस्ट्री में विविधता और समावेश को बढ़ावा देने में उनकी लीडरशिप के लिए यह सम्मान दिया गया।

ब्रिस्टल के ड्रामा और इंग्लिश प्रोग्राम से ग्रेजुएट हुए मजूमदार को यह सम्मान 16 जुलाई को यूनिवर्सिटी के समर ग्रेजुएशन समारोह में मिला। इसके साथ ही वे उन खास क्रिएटिव प्रोफेशनल्स की लिस्ट में शामिल हो गए जिन्हें हाल के वर्षों में इस संस्थान ने सम्मानित किया है।

यह भी पढ़ें: अमेरिका@250: INS सुदर्शनी ने किया भारत की समुद्री विरासत का प्रदर्शन

मजूमदार का करियर तीन दशकों से भी लंबा रहा है। उन्होंने डोमिनिक सैवेज द्वारा निर्देशित और केट विंसलेट अभिनीत चैनल 4 के मशहूर ड्रामा 'आई एम रूथ' (I Am Ruth) को प्रोड्यूस करने के लिए BAFTA और कॉमेडी सीरीज़ 'हॉफ द रिकॉर्ड' (Hoff the Record) के लिए इंटरनेशनल एमी अवॉर्ड जीता। उनके कामों में BAFTA-नॉमिनेटेड ट्रैवल सीरीज़ 'एन इडियट अब्रॉड' (An Idiot Abroad) को को-क्रिएट और डायरेक्ट करना भी शामिल है।

2020 से 2023 तक, मजूमदार BAFTA के चेयर रहे। वे इस पद पर बैठने वाले 35 वर्षों में सबसे कम उम्र के व्यक्ति और पहले 'पर्सन ऑफ कलर' (अश्वेत या गैर-श्वेत व्यक्ति) बने। संगठन के साथ अपने 17 वर्षों के जुड़ाव के दौरान, उन्होंने लर्निंग और न्यू टैलेंट कमेटी और टेलीविज़न कमेटी की अध्यक्षता भी की। उन्होंने उभरती प्रतिभाओं का समर्थन करने और इंडस्ट्री में विविधता को बेहतर बनाने के लिए कई पहल कीं।

मानद डिग्री स्वीकार करते हुए, मजूमदार ने इस सम्मान को न केवल अपनी उपलब्धियों के लिए, बल्कि अपने परिवार और समुदाय के लिए भी एक सम्मान बताया। अपनी विरासत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उनके पिता 1960 के दशक में भारत से ब्रिटेन नाव से आए थे और बाद में डॉक्टर के तौर पर अपना करियर बनाया। उन्होंने कहा कि वे बंगाली प्रवासी समुदाय के बहुत आभारी हैं, जिनके त्याग ने आने वाली पीढ़ियों के लिए अवसर पैदा किए।

मजूमदार ने 1994 से 1997 के बीच ब्रिस्टल में बिताए अपने उन वर्षों को भी याद किया, जब उन्होंने पढ़ाई के साथ-साथ एक्टिंग, स्टूडेंट प्रोडक्शंस को डायरेक्ट करने और पार्ट-टाइम काम के बीच संतुलन बनाए रखा।

मजूमदार ने कहा कि हम सभी कहानीकार हैं, चाहे हम कोई भी करियर चुनें। चाहे इंजीनियरिंग हो या राजनीति, लेकिन खासकर पत्रकारिता, फिल्म, टेलीविजन या थिएटर। बात खुद के प्रति सच्चे होने, कुछ कहने के लिए होने और उसे सबसे असरदार तरीके से कैसे व्यक्त किया जाए, इस बारे में सोचने की है।

ग्रेजुएशन के बाद मजूमदार ने कार्डिफ यूनिवर्सिटी से ब्रॉडकास्ट जर्नलिज्म में पोस्ट-ग्रेजुएट डिप्लोमा किया और फिर ITN न्यूज़ ट्रेनी और BBC प्रोडक्शन ट्रेनी, दोनों प्रोग्राम पूरे करने वाले पहले व्यक्ति बने।

ब्रिस्टल यूनिवर्सिटी ने कहा कि यह सम्मान मजूमदार की क्रिएटिव काबिलियत, प्रेरणादायक लीडरशिप और फिल्म व टेलीविजन इंडस्ट्री में पहुंच और मौकों को बढ़ाने के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को मान्यता देता है।

अन्य खबरें पढ़ने के लिए क्लिक करें न्यू इंडिया अब्रॉड
 

Comments

Leave A Comment

Required fields are marked (*).

Related

Talk to us?