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अमेरिका-भारत आर्थिक रिश्तों के लिए ट्रेड डील अहम: अतुल केशप

उन्होंने बताया कि भारतीय पक्ष ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताओं में भारत ने कई दौर की गंभीर और ईमानदार बातचीत के बाद एक मजबूत प्रस्ताव रखा है।

अतुल केशप / IANS

अमेरिका–भारत आर्थिक संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए लंबे समय से लंबित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (ट्रेड डील) को जल्द पूरा किया जाना बेहद जरूरी है। यह बात यूएस–इंडिया बिजनेस काउंसिल (USIBC) के अध्यक्ष अतुल केशप ने भारत दौरे के बाद कही।

अतुल केशप ने बताया कि वह USIBC के चेयर एड नाइट के साथ भारत गए थे, जहां उन्होंने भारतीय नेतृत्व और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से सीधे बातचीत की। इस दौरान भारत की अमेरिका को लेकर सोच, व्यापार वार्ताओं और निवेश प्रवाह पर विस्तार से चर्चा हुई।

केशप ने कहा, “हम भारतीय पक्ष की आवाज सुनना चाहते थे—अमेरिका को लेकर उनकी सोच, ट्रेड डील और कारोबार पर उनके नजरिये को समझना चाहते थे। यह यात्रा हमारे लिए बेहद प्रेरणादायक रही।”

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उन्होंने बताया कि भारतीय पक्ष ने संकेत दिया है कि अमेरिका के साथ व्यापार वार्ताओं में भारत ने कई दौर की गंभीर और ईमानदार बातचीत के बाद एक मजबूत प्रस्ताव रखा है।
“भारतीय दृष्टिकोण से हमने सुना कि उन्होंने अमेरिका को एक बेहतरीन प्रस्ताव दिया है और अब उम्मीद है कि अमेरिका आगे बढ़कर ट्रेड एग्रीमेंट को अंतिम रूप देगा।” 

हालांकि उन्होंने बातचीत के ब्योरे साझा करने से इनकार किया, लेकिन साफ किया कि अमेरिकी कारोबारी समुदाय एकमत है। उन्होंने कहा, “हम पूरी ताकत से ट्रेड डील चाहते हैं। यह जितनी जल्दी हो सके और जितनी महत्वाकांक्षी हो सके, उतनी बेहतर होगी। यही समझौता दोनों अर्थव्यवस्थाओं के और गहरे एकीकरण की नींव बनेगा।” 

टैरिफ और व्यापार अनिश्चितता
भारतीय निर्यात पर अमेरिकी टैरिफ के सवाल पर केशप ने कहा कि भारत ने प्रभाव को कम करने के लिए अपने निर्यात बाजारों में विविधता लाई है। इसके बावजूद 2025 में अमेरिका को भारत का निर्यात बढ़ा है।

उन्होंने कहा, “यह बातचीत का अहम हिस्सा है, जहां दोनों देश यह तय करने की कोशिश कर रहे हैं कि अंतिम टैरिफ स्तर क्या होगा।” केशप ने माना कि टैरिफ को लेकर अनिश्चितता के कारण ही कारोबारी जगत जल्द समझौता चाहता है। “एक ट्रेड डील दोनों तरफ भरोसे का मजबूत मनोवैज्ञानिक संकेत देगी, जो निवेश के फैसलों के लिए बेहद जरूरी है।”

निवेश, एआई और नई तकनीकें
उन्होंने भारत में डेटा सेंटर्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे क्षेत्रों में बड़े अमेरिकी निवेश की ओर भी इशारा किया। उन्होंने कहा, “दुनिया के प्रमुख लोकतंत्र होने के नाते अमेरिका और भारत को इन अत्याधुनिक तकनीकों के विकास में साथ मिलकर काम करना चाहिए।”

उनका कहना था कि टैरिफ में कमी से दोनों देशों के उत्पादकों और निर्यातकों को फायदा होगा। “दोस्त देशों के बीच कम टैरिफ सबसे अच्छा परिणाम होता है,” उन्होंने कहा, साथ ही यह भी जोड़ा कि भारत के नवाचारी प्रस्ताव अमेरिकी निर्यातकों के लिए नए बाजार खोल सकते हैं।

500 अरब डॉलर व्यापार लक्ष्य
केशप के मुताबिक, यह समझौता 500 अरब डॉलर के द्विपक्षीय व्यापार लक्ष्य को हासिल करने की रफ्तार तेज करेगा। “साझा समृद्धि ही हमारा मूल उद्देश्य है।”

गौरतलब है कि अमेरिका–भारत व्यापार वार्ताएं ऐसे समय में चल रही हैं, जब दोनों देशों के बीच रक्षा, सप्लाई चेन और तकनीक के क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग लगातार मजबूत हो रहा है। पिछले एक दशक में द्विपक्षीय व्यापार में लगातार बढ़ोतरी हुई है और अमेरिकी कंपनियां भारत को दीर्घकालिक निवेश गंतव्य के रूप में देख रही हैं।

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