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H-1B विवाद अमेरिका पर ही उल्टा भारी पड़ा: एमी बेरा

बेरा ने बताया कि सितंबर 2025 में जब वह भारत दौरे पर थे तभी 1 लाख डॉलर H-1B फीस का ऐलान हुआ था। इससे अचानक यह संदेश गया कि अमेरिका की भारत को लेकर नीति बदल रही है। उन्होंने कहा कि इस माहौल का असर यह हुआ कि अमेरिका में पढ़े कई युवा भारतीय वापस भारत जाकर कंपनियां शुरू कर रहे हैं।

एमी बेरा / Wikimedia commons

अमेरिकी सांसद एमी बेरा ने चेतावनी दी है कि H-1B वीजा को लेकर चल रहा विवाद अब अमेरिकी अर्थव्यवस्था के खिलाफ जा रहा है। उनका कहना है कि इससे भारतीय उद्यमी अमेरिका की बजाय भारत में ही अपने आइडिया शुरू कर रहे हैं। उन्होंने यह बात कार्नेगी एंडोमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के ग्रांड तमाशा पॉडकास्ट में मिलान वैष्णव से बातचीत के दौरान कही।

बेरा ने बताया कि सितंबर 2025 में जब वह भारत दौरे पर थे तभी 1 लाख डॉलर H-1B फीस का ऐलान हुआ था। इससे अचानक यह संदेश गया कि अमेरिका की भारत को लेकर नीति बदल रही है। उन्होंने कहा कि इस माहौल का असर यह हुआ कि अमेरिका में पढ़े कई युवा भारतीय वापस भारत जाकर कंपनियां शुरू कर रहे हैं। 

बेरा के मुताबिक भारत के कई हिस्से अब टेक्नोलॉजी के मामले में काफी आगे हैं। वहां कम लागत, अच्छी स्किल्ड वर्कफोर्स और कम नियमों के साथ आइडिया को आसानी से टेस्ट किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि अगर भारत में आइडिया सफल हो जाता है तो वहीं करना सस्ता पड़ता है और बाद में उसे कहीं और ले जाया जा सकता है। बेरा ने अपने दौरे के दौरान यह भी देखा कि भारत का घरेलू बाजार तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने रिलायंस इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियों का उदाहरण दिया जो अब ज्यादा घरेलू ग्राहकों पर निर्भर हैं।

उन्होंने कहा कि यह बदलाव दोनों देशों के लिए बुरा नहीं है क्योंकि मजबूत भारत से अमेरिकी कंपनियों को भी नए बाजार मिलेंगे। बेरा ने कहा कि मौजूदा अमेरिकी प्रशासन के दौरान भारत-अमेरिका रिश्तों में कुछ शुरुआती तनाव भी देखने को मिले हैं। उन्होंने ट्रंप के कुछ बयानों का जिक्र किया जैसे भारत-पाकिस्तान मुद्दे पर मध्यस्थता की बात, ओवल ऑफिस में पाकिस्तानी जनरलों की मौजूदगी और 50 प्रतिशत टैरिफ जैसे फैसले। उन्होंने कहा कि इन बयानों से रिश्तों पर नकारात्मक असर पड़ा है।

पहले कार्यकाल के मुकाबले उन्होंने कहा कि इस बार ट्रंप के सलाहकार जैसे स्टीफन मिलर और पीटर नवारो भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर दीर्घकालिक सोच नहीं रखते। हालांकि बेरा ने यह भी कहा कि अमेरिकी कांग्रेस में भारत-अमेरिका रिश्तों को लेकर समर्थन मजबूत और दोनों पार्टियों में मौजूद है। नवंबर 2025 में उन्होंने रिपब्लिकन सांसद जो विलसन के साथ मिलकर एक प्रस्ताव भी पेश किया था, जिसमें दोनों देशों की साझेदारी को अहम बताया गया था।

इमिग्रेशन पर बात करते हुए बेरा ने कहा कि अब भारतीय छात्र अमेरिका आने को लेकर हिचकिचा रहे हैं। इसकी वजह ये है कि अमेरिका की नीतियां स्पष्ट नहीं हैं। ट्रंप की इमिग्रेशन नीति ने कन्फ्यूजन पैदा कर दी है। 

उन्होंने भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ बढ़ रही ऑनलाइन नफरत का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि समोसा कॉकस की फोटो के बाद हुए रिएक्शन, सिख समुदाय पर हमले और विवेक रामास्वामी व उषा वैंस जैसे लोगों पर हमले चिंता की बात हैं। उन्होंने कहा कि अभी ये घटनाएं अलग-अलग हैं, लेकिन इन्हें गंभीरता से लेना जरूरी है।

मिडिल ईस्ट पर बात करते हुए बेरा ने ईरान के साथ चल रहे संघर्ष को राष्ट्रपति का चुना हुआ युद्ध बताया। उन्होंने कहा कि प्रशासन ने कांग्रेस या जनता को किसी तत्काल खतरे की स्पष्ट जानकारी नहीं दी जबकि वॉर पॉवर एक्ट ऐसा करने की मांग करता है। पाकिस्तान पर उन्होंने कहा कि अमेरिका का वहां फिर झुकाव दिखाना समझ से बाहर है। उन्होंने भारत के साथ अमेरिका के रिश्तों को रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी बताया जिसमें रक्षा सहयोग, नौसैनिक अभ्यास और क्वाड जैसे प्रयास शामिल हैं।

अंत में बेरा ने कहा कि वह ट्रंप द्वारा उठाए गए सीमा सुरक्षा और आर्थिक दबाव जैसे मुद्दों से पूरी तरह असहमत नहीं हैं लेकिन उनके तरीके और समाधान से उन्हें आपत्ति है। उन्होंने उम्मीद जताई कि रिपब्लिकन सांसद भी अपनी भूमिका निभाएंगे और जिन मुद्दों पर सहमति बन सकती है, वहां मिलकर कानून बनाएंगे।

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