पाकिस्तानी शहर की तस्वीर / Xinhua/Sajjad/IANS
कई वर्षों से आर्थिक संकट झेल रहा, पाकिस्तान अपनी जनता पर लगातार टैक्स बढ़ा रहा है और ऐसी नौकरशाही को बढ़ावा दे रहा है, जो कि आम जनता की सेवा करने असक्षम है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।
पाकिस्तानी बिजनेस न्यूजपेपर बिजनेस रिकॉर्डर में जारी हुई रिपोर्ट में कहा गया कि देश की राजकोषीय नीति उत्पादक वर्ग का शोषण करके ऐसी विशाल नौकरशाही की फंडिंग करने पर केंद्रित बनी हुई है, जो कि अनुत्पादक है।
रिपोर्ट में आगे कहा गया, "हम एक कल्याणकारी राज्य नहीं हैं; हमारे पास इसे बनाए रखने के लिए संस्थागत तंत्र, दस्तावेजीकरण और नैतिक अनुबंध की कमी है।"
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रिपोर्ट में बताया गया कि पाकिस्तान में केवल 34 लाख करदाता हैं, जो कि देश की कुल 8.56 करोड़ की वर्कफोर्स का 4 प्रतिशत हैं।
रिपोर्ट में खेद व्यक्त करते हुए कहा गया कि इस बंधुआ अल्पसंख्यक वर्ग को अरबों रुपए के घाटे को पूरा करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जबकि अनौपचारिक अभिजात वर्ग अछूता बना हुआ है। हमने उत्कृष्टता को कर योग्य अपराध और पारदर्शिता को दिवालियापन का मार्ग बना दिया है।
जब एक वेतनभोगी पेशेवर पर 35 प्रतिशत कर लगाया जाता है, लेकिन उसे निजी सुरक्षा, बिजली और शिक्षा के लिए अपनी जेब से भुगतान करना पड़ता है, तो सरकार प्रभावी रूप से उस सामाजिक अनुबंध के लिए विलासिता का प्रीमियम वसूल रही है जिसका वह पहले ही उल्लंघन कर चुकी है।
रिपोर्ट के अनुसार, “इसका परिणाम हमारी अर्थव्यवस्था के 8 लाख कुशल निर्माताओं पर देखा जा रहा है जो 2025 तक पाकिस्तान छोड़ देंगे, जिनके पास हमारी वर्तमान नीतियों के तहत कुचले जाने या निर्वासन में जाने के अलावा कोई विकल्प नहीं होगा।”
हालांकि, आईएमएफ और सरकारी तकनीकी विशेषज्ञों का तर्क है कि राजकोषीय घाटे ने हमारे पास कोई विकल्प नहीं छोड़ा है।
उनका कहना है कि ऋण चुकाने की जरूरतें लगभग 9 ट्रिलियन रुपए तक पहुंचने के साथ, सरकार को पंजीकृत क्षेत्र से हर संभव रुपया निकालना ही होगा।
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