रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर / REUTERS/Nathan Howard/File Photo
अमेरिका के स्वास्थ्य और मानव सेवा (HHS) सचिव रॉबर्ट एफ. कैनेडी जूनियर ने घोषणा की कि खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) दर्जनों प्रोसेस्ड रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट्स के 'सुरक्षा दर्जे' को रद्द करने की याचिका पर विचार करेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि खाद्य कंपनियां यह साबित नहीं कर पातीं कि ये सामग्रियां स्वास्थ्य समस्याओं और मोटापे का कारण नहीं बन रही हैं, तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
सीबीएस के '60 मिनट्स' कार्यक्रम में बोलते हुए कैनेडी ने कहा कि विभाग पूर्व एफडीए कमिश्नर डेविड केसलर की उस याचिका पर काम करेगा, जिसमें कॉर्न सिरप और दर्जनों अन्य मिठास और स्टार्च को 'सुरक्षित' श्रेणी से हटाने की मांग की गई है।
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GRAS श्रेणी और 'लूपहोल' पर सवाल
कैनेडी और केसलर के अनुसार, 1958 में कांग्रेस द्वारा बनाया गया 'GRAS' नियम एक कानूनी खामी (Loophole) बन गया है। यह खाद्य कंपनियों को बिना किसी सरकारी निगरानी के स्वयं अपनी सामग्रियों की सुरक्षा सत्यापित करने की अनुमति देता है। कैनेडी ने कहा, "अगर कोई उत्पाद अल्ट्रा-प्रोसेस्ड है, तो किसी भी अमेरिकी के लिए यह जानना संभव नहीं है कि वह सुरक्षित है या नहीं। मैं इस खामी को बंद करना चाहता हूँ।"
डॉ. डेविड केसलर, जो 1990 से 1997 तक एफडीए प्रमुख रहे थे, ने इस अभियान की तुलना तंबाकू उद्योग के खिलाफ अपनी पुरानी लड़ाई से की। उन्होंने कहा, "जिस तरह हमने देश का तंबाकू के प्रति नजरिया बदला, उसी तरह हमें अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के प्रति भी सोच बदलनी होगी।"
खाद्य उद्योग की प्रतिक्रिया
दूसरी ओर, खाद्य कंपनियों के प्रतिनिधि संगठन 'कंज्यूमर ब्रांड्स एसोसिएशन' ने एक बयान में कहा कि कंपनियां पहले से ही एफडीए के विज्ञान और जोखिम-आधारित मूल्यांकन का पालन करती हैं। उन्होंने तर्क दिया कि GRAS प्रक्रिया नवाचार के लिए महत्वपूर्ण है, हालांकि उन्होंने पारदर्शिता बढ़ाने के लिए सरकार के साथ काम करने की इच्छा भी जताई।
सरकार का रुख
कैनेडी ने फिलहाल सीधे तौर पर नए सरकारी नियमों को लागू करने की बात नहीं कही है। उनका मुख्य ध्यान जनता को जागरूक करने पर है। उन्होंने कहा, "मेरा काम यह सुनिश्चित करना है कि हर किसी को पता हो कि वे क्या खा रहे हैं। हमें एक जागरूक जनता की जरूरत है।"
उल्लेखनीय है कि ट्रम्प प्रशासन ने पिछले महीने ही नए आहार संबंधी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनमें अमेरिकियों को अधिक प्रोटीन और कम चीनी खाने के साथ-साथ अत्यधिक प्रोसेस्ड भोजन से बचने की सलाह दी गई है।
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