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जानी-मानी इंटरप्रेटर मीनू बत्रा ने ICC की हिरासत को बताया अवैध

बत्रा ने अपने शपथ-पत्र में दावा किया है कि जिन लोगों ने उन्हें गिरफ्तार किया उनके पास न तो कोई पहचान बैज दिख रहा था और न ही वे वर्दी में थे।

मीनू बत्रा / Indus Lingo

भारतीय मूल की 53 वर्षीय चार बच्चों की सिंगल मदर मीनू बत्रा को 17 मार्च को साउथ टेक्सास से ICC हिरासत में लिया गया था। 20 साल से अधिक समय से कोर्ट इंटरप्रेटर रहीं बत्रा टेक्सास में हिंदी, पंजाबी या उर्दू के लिए लाइसेंस प्राप्त एकमात्र इंटरप्रेटर हैं। 

बत्रा को हार्लिंजेन एयरपोर्ट से उस समय हिरासत में लिया गया जब वह मिल्वॉकी, विस्कॉन्सिन एक केस के लिए जा रही थीं। टेक्सास ऑब्जर्वर ने यह रिपोर्ट किया है। बत्रा ने अपने शपथ-पत्र में दावा किया है कि जिन लोगों ने उन्हें गिरफ्तार किया उनके पास न तो कोई पहचान बैज दिख रहा था और न ही वे वर्दी में थे। उन्होंने अपनी रिहाई की मांग करते हुए कहा कि यह हिरासत अवैध है।

उन्होंने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने उन्हें बताया कि वह अवैध रूप से देश में रह रही हैं और उनके खिलाफ निर्वासन आदेश जारी है जबकि उन्होंने उन्हें यह भी बताया कि उनका वर्क ऑथराइजेशन अगले चार साल तक वैध है। बत्रा ने एजेंटों को यह भी बताया कि उनके खिलाफ निर्वासन आदेश को कई दशक पहले न्यू जर्सी के एक इमिग्रेशन जज द्वारा दिए गए ‘विथहोल्डिंग ऑफ रिमूवल’ आदेश से रोका गया था।

आपको बताएं कि ‘विथहोल्डिंग ऑफ रिमूवल’ निर्वासन से राहत का एक कानूनी प्रावधान है जिसमें किसी व्यक्ति को उस देश में वापस भेजने से रोका जाता है जहां उसकी जान या स्वतंत्रता को खतरा हो सकता है।

बत्रा ने टेक्सास ऑब्जर्वर से कहा कि खबरें देखकर और पढ़कर मुझे पता है कि अगर आप कुछ कहते हैं तो वे आप पर गिरफ्तारी से बचने जैसे आरोप लगा देते हैं। उन्होंने आगे कहा कि इसलिए यह सब ध्यान में रखते हुए और सबके सामने शर्मिंदगी से बचने के लिए मैंने सहयोग करना ही बेहतर समझा।

बत्रा की ‘विथहोल्डिंग ऑफ रिमूवल’ स्थिति यह सुनिश्चित करती है कि उन्हें भारत वापस नहीं भेजा जा सकता, लेकिन उन्हें किसी तीसरे देश में भेजा जा सकता है जो उन्हें स्वीकार करे।

ट्रंप प्रशासन के ऐसे 27 देशों के साथ समझौते हैं जिन्हें निर्वासित लोगों को स्वीकार करने के लिए प्रति व्यक्ति 10 लाख डॉलर तक भुगतान किया जाता है। बत्रा को फिलहाल रेमंडविल के पास एल वैले डिटेंशन सेंटर में रखा गया है जहां उन्हें दिसंबर में हुई सर्जरी के बाद जरूरी नियमित चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। 

डीएचएस को बत्रा की याचिका पर 21 अप्रैल तक जवाब देना है।

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