जैनेंद्र जैन / Courtesy: Penn State
भारतीय मूल के प्रसिद्ध भौतिक वैज्ञानिक जैनेंद्र जैन को भारत में स्थापित नए शोध संस्थान ‘लोढ़ा थ्योरिटिकल फिजिक्स इंस्टीट्यूट (LTPI)’ का संस्थापक निदेशक नियुक्त किया गया है। यह संस्थान लोढ़ा फाउंडेशन द्वारा स्थापित किया गया है। इसका मकसद फिजिक्स में गहरा शोध करना, दुनिया भर के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम करना और नए वैज्ञानिक तैयार करना है।
जैन अभी अमेरिका की पेन स्टेट यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं और वहां काम करते हुए ही इस नई जिम्मेदारी को भी संभालेंगे। उन्होंने कहा कि वे इस संस्थान को एक वर्ल्ड-क्लास रिसर्च सेंटर बनाना चाहते हैं, जहां अच्छे प्रोफेसर, बेहतरीन रिसर्चर और एक मजबूत विजिटिंग प्रोग्राम हो ताकि नए और बड़े आइडिया सामने आ सकें।
लोढ़ा फाउंडेशन के मेंटर आशीष कुमार सिंह ने कहा कि यह संस्थान भारत के साइंस सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम है। पेन स्टेट की डीन ट्रेसी लैंगकिल्डे ने कहा कि जैन के काम ने क्वांटम फिजिक्स की समझ को आगे बढ़ाया है और इससे नई टेक्नोलॉजी के रास्ते खुले हैं। वहीं, फिजिक्स विभाग के प्रमुख मॉरिसियो टेरोनेस ने उनकी ‘कॉम्पोजिट फर्मियन थ्योरी’ को बेहद अहम योगदान बताया।
जैनेंद्र जैन को फिजिक्स में उनके काम के लिए दुनियाभर में पहचान मिली है। उन्हें 2025 का वुल्फ प्राइज भी मिल चुका है। उनका काम ‘कॉम्पोजिट फर्मियन्स’ पर आधारित है, जो क्वांटम हॉल इफेक्ट को समझने में मदद करता है। उन्होंने सुपरकंडक्टर और मेजराना पार्टिकल्स पर भी काम किया है, जो भविष्य में क्वांटम कंप्यूटिंग में काम आ सकते हैं।
जैन 1998 से पेन स्टेट में हैं। इससे पहले वे स्टोनी ब्रुक यूनिवर्सिटी में थे और येल व यूनिवर्सिटी ऑफ मैरीलैंड में रिसर्च कर चुके हैं। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई भारत में की और पीएचडी अमेरिका से पूरी की। उनकी यह नियुक्ति भारत में साइंस रिसर्च को आगे बढ़ाने के लिए एक बड़ा कदम मानी जा रही है।
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