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नीलांजना दासगुप्ता ने अपनी पहली किताब के लिए Axiom गोल्ड जीता

इस साल के पुरस्कारों में अन्य भारतीय-अमेरिकी लेखकों में बिधान एल. परमार शामिल थे, जिन्हें 'बिजनेस एथिक्स' में कांस्य पदक मिला और रुचिका टी. मल्होत्रा को 'नेटवर्किंग' में रजत पदक हासिल हुआ।

नीलांजना दासगुप्ता /कितबा का कवर / changethewallpaper.com

भारतीय-अमेरिकी लेखिका निलंजना दासगुप्ता को उनकी पहली किताब 'चैलेंज दि वॉलपेपर: ट्रांस्फॉर्मिंग कल्चरल पैटर्न्स टी बिल्ड मोर जस्ट कम्युनिटीज’ के लिए 2026 Axiom Business Book Awards में गोल्ड मेडल से सम्मानित किया गया।

दासगुप्ता की इस किताब को येल यूनिवर्सिटी प्रेस ने प्रकाशित किया है। किताब इस बात पर केंद्रित है कि असमानता सिर्फ व्यक्तिगत सोच या मान्यताओं से ही नहीं, बल्कि हमारे रोजमर्रा के माहौल- जैसे स्कूल, काम की जगहें, यूनिवर्सिटी और आस-पड़ोस- में रची-बसी संस्कृति से भी तय होती है।

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किताब के विवरण के अनुसार,  'चैलेंज दि वॉलपेपर' स्थानीय संस्कृति की छिपी हुई, लेकिन असरदार विशेषताओं- जैसे सामाजिक नियम, दिनचर्या, आपसी रिश्ते और भौतिक स्थान- को समझाने के लिए 'वॉलपेपर' का रूपक इस्तेमाल करती है। ये विशेषताएं ही तय करती हैं कि लोग कैसा व्यवहार करेंगे और उन्हें किस तरह के अवसर मिलेंगे।

किताब में यह तर्क दिया गया है कि असमानता पर होने वाली आम बातचीत में अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाने वाले ये कारक, समय के साथ जमा होकर असमान परिणाम पैदा कर सकते हैं। यह किताब इस बात की भी पड़ताल करती है कि विविधता, समानता और समावेशन (DEI) के कुछ प्रयासों के नतीजे सीमित क्यों रहे हैं, और यह भी कि सिर्फ 'अचेतन पूर्वाग्रह' के बारे में जागरूकता बढ़ाने से हमेशा व्यवहार या ढाँचे में कोई सार्थक बदलाव क्यों नहीं आता।

इसके बजाय, किताब यह सुझाव देती है कि सामूहिक और किसी खास जगह पर आधारित कार्रवाई के ज़रिए स्थानीय संस्कृति को धीरे-धीरे नया रूप दिया जा सकता है, जिससे न्याय और अवसरों के ज़्यादा टिकाऊ रूप तैयार हो सकें।

दासगुप्ता यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट में मनोविज्ञान की प्रोवोस्ट प्रोफेसर और इंस्टीट्यूट ऑफ डाइवर्सिटी साइंसेज की संस्थापक निदेशक हैं। उन्हें सामाजिक मनोविज्ञान के क्षेत्र में किए गए उनके काम- विशेष रूप से अचेतन पूर्वाग्रह, रूढ़िवादिता और विविधता विज्ञान पर किए गए शोध- के लिए जाना जाता है। इसके अलावा, उन्हें अपने शोध के नतीजों को वास्तविक दुनिया के संस्थागत और संगठनात्मक परिवेशों में लागू करने के लिए भी पहचाना जाता है।

उनकी रिसर्च को नेशनल साइंस फाउंडेशन और नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ से फंड मिला है, और इसे द न्यूयॉर्क टाइम्स, द अटलांटिक, NPR, Wired, Slate, PBS NewsHour, ABC News, और Scientific American Mind जैसे बड़े मीडिया आउटलेट्स में फीचर किया गया है।

दासगुप्ता को उनके अकादमिक और एप्लाइड रिसर्च के लिए कई सम्मान भी मिले हैं, जिनमें कापुर फ़ाउंडेशन से हिडन बायस रिसर्च प्राइज, सोसाइटी फॉर पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी से एप्लीकेशन ऑफ़ पर्सनैलिटी एंड सोशल साइकोलॉजी अवार्ड, और रिसर्च और क्रिएटिव एक्टिविटी में बेहतरीन उपलब्धियों के लिए चांसलर मेडल शामिल हैं।

उन्होंने स्मिथ कॉलेज से साइकोलॉजी और न्यूरोसाइंस में बैचलर डिग्री और येल यूनिवर्सिटी से सोशल साइकोलॉजी में मास्टर डिग्री और PhD की पढ़ाई पूरी की।

2026 के Axiom Business Book Awards का आयोजन Jenkins Group करता है, जो मिशिगन की एक पब्लिशिंग कंपनी है और 2007 से इन अवार्ड्स का आयोजन कर रही है।

इस साल के अवार्ड्स में जिन दूसरे भारतीय मूल के लेखकों को पहचान मिली, उनमें बिधान एल. परमार शामिल हैं, जिन्हें 'रेडिकल डाउट:  टर्निंग अनसरटेनिटी इनटू श्योरफायर सक्सेस' के लिए बिजनेस एथिक्स श्रेणी में कांस्य पदक मिला; और रुचिका टी. मल्होत्रा ​​शामिल हैं, जिन्हें 'अनकंप्लीट: रिजेक्टिंग कंपीटीशन टू अनलॉक सक्सेस' के लिए नेटवर्किंग कैटेगरी में रजत पदक मिला।

आयोजकों के अनुसार, 25 मार्च को घोषित इन अवार्ड्स के लिए 31 देशों से 600 से ज़्यादा एंट्री मिलीं। ये सालाना अवार्ड्स बिजनेस से जुड़ी अलग-अलग कैटेगरीज की किताबों को पहचान देते हैं, जिनमें लीडरशिप, एंटरप्रेन्योरशिप, इनोवेशन, फाइनेंस और वर्कप्लेस कल्चर शामिल हैं।

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