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निकी हेली: चीन का सामना करने के लिए अमेरिका को भारत की मित्रता जरूरी

हेली ने तर्क दिया कि द्विपक्षीय संबंधों में एक चौथाई सदी की गति को तोड़ना एक 'रणनीतिक आपदा' होगी।

निकी हेली / X image

संयुक्त राष्ट्र में अमेरिका की पूर्व राजदूत निकी हेली ने बुधवार को चेतावनी दी कि चीन के साथ बढ़ती प्रतिद्वंद्विता के दौर में ट्रम्प प्रशासन भारत को दरकिनार नहीं कर सकता। सह-लेखक बिल ड्रेक्सेल के साथ न्यूजवीक में लिखते हुए निकी ने कहा: चीन का सामना करने के लिए, अमेरिका के पास भारत के रूप में एक मित्र होना चाहिए।

हेली ने तर्क दिया कि द्विपक्षीय संबंधों में एक चौथाई सदी की गति को तोड़ना एक 'रणनीतिक आपदा' होगी। उन्होंने राष्ट्रपति ट्रम्प से संबंधों में 'गिरावट' को रोकने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सीधे बातचीत करने का आग्रह किया और इस बात पर जोर दिया कि यह बातचीत जितनी जल्दी हो, उतना ही बेहतर होगा।

उन्होंने लिखा- जहां तक अमेरिका का सवाल है, सबसे जरूरी प्राथमिकता इस गिरावट को रोकना होनी चाहिए, जिसके लिए राष्ट्रपति ट्रम्प और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच सीधी बातचीत जरूरी होगी। जितनी जल्दी हो, उतना ही बेहतर होगा। प्रशासन को भारत के साथ मतभेदों को दूर करने और संबंधों को उच्च-स्तरीय ध्यान और संसाधन देने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उतना ही जितना अमेरिका चीन या इजराइल को देता है।

निकी के कॉलम में भारत के आर्थिक और सामरिक महत्व को रेखांकित किया गया है और बड़े पैमाने पर वस्तुओं के निर्माण और चीनी आपूर्ति श्रृंखलाओं के लिए एक महत्वपूर्ण विकल्प प्रदान करने की उसकी क्षमता का उल्लेख किया गया है। हेली ने भारत को एक 'मूल्यवान स्वतंत्र और लोकतांत्रिक साझेदार' भी बताया है, जिसकी रक्षा और मध्य पूर्व में बढ़ती भूमिका क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ाती है।

भविष्य की बात करते हुए उन्होंने लिखा है कि 'भारत की शक्ति बढ़ने के साथ-साथ चीन की महत्वाकांक्षाएं भी कम होंगी' और निकी ने नई दिल्ली के उदय को वैश्विक शक्ति संतुलन में एक निर्णायक कारक के रूप में प्रस्तुत किया है।

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