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बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रही क्रूरता के खिलाफ मिशिगन में सड़कों पर उतरे लोग

प्रदर्शनकारियों ने हिंदुओं पर हो रहे ज़ुल्म की एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बांग्लादेश के मीडिया संस्थान बहुसंख्यक आबादी के दबाव में हैं और वे अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के साथ बरती जा रही क्रूरता की खबरें छापने से बचते हैं।

मिशिगन में विरोध प्रदर्शन मिशिगन कालीबाड़ी समूह द्वारा आयोजित किया गया था। / Courtesy Photo

मिशिगन के हैमट्रैक सिटी सेंटर में 8 दिसंबर को मिशिगन कलीबाड़ी ग्रुप ने बांग्लादेश के हिंदू समुदाय के समर्थन में एक प्रदर्शन किया। ये प्रोटेस्ट इसलिए हुआ क्योंकि बांग्लादेश में एक बड़े हिंदू संत को गिरफ्तार कर लिया गया था। ये बांग्लादेश में हिंदुओं की सुरक्षा के लिए रैलियां निकाल रहे थे। 

इस प्रदर्शन का मकसद अमेरिकी राष्ट्रपति से बांग्लादेश में हिंदुओं के लिए इंसाफ और सुरक्षा की पैरवी करने का आग्रह करना था। प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी और बांग्लादेशी झंडे थामे हुए थे। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यक समुदाय के सामने आ रही मुश्किलों को उजागर किया।

नवंबर के आखिर में बांग्लादेश के हिंदू संत चिन्मय कृष्ण दास पर देशद्रोह का आरोप लगाते हुए गिरफ्तार कर लिया गया था। चटगांव में एक बड़ी रैली के दौरान उन पर बांग्लादेश के राष्ट्रीय झंडे का अपमान करने का आरोप लगाया गया था। इसके साथ ही उन्हें जमानत देने से इनकार कर दिया गया। 

प्रदर्शनकारियों ने हिंदुओं पर हो रहे ज़ुल्म की एक बड़ी साजिश का हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि दुनिया भर में अल्पसंख्यक समुदायों को मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, लेकिन बांग्लादेश में ये समस्याएं ज्यादा गंभीर हैं। क्योंकि इन समूहों की सुरक्षा के लिए कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं।प्रदर्शनकारियों ने कहा कि बांग्लादेश के मीडिया संस्थान बहुसंख्यक आबादी के दबाव में हैं और वे अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं के साथ बरती जा रही क्रूरता की खबरें छापने से बचते हैं।

 

इसी तरह के विरोध प्रदर्शन शिकागो और कनाडा में भी हुए। 9 दिसंबर को वाशिंगटन डीसी में व्हाइट हाउस के बाहर भारतीय-अमेरिकियों ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे हमलों के विरोध में प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन 'बांग्लादेश में हिंदुओं के नरसंहार के खिलाफ मार्च' अभियान का हिस्सा था, जो नरसंहार पीड़ितों के लिए अंतरराष्ट्रीय स्मरण दिवस के साथ मेल खाता है।

ये प्रदर्शन StopHinduGenocide.org, बांग्लादेशी प्रवासी समूहों और HinduACTion द्वारा आयोजित किया गया था। वहीं, 11 दिसंबर को कनाडाई हिंदुओं ने टोरंटो में बांग्लादेशी वाणिज्य दूतावास के बाहर कनाडाई हिंदू स्वयंसेवकों के नेतृत्व में विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने हिंसा, भेदभाव और हिंदू धर्म स्थलों के विनाश की खबरों की निंदा की। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व में इस स्थिति को 'नरसंहार' बताया। प्रदर्शन की जानकारी सोशल मीडिया पर साझा की गई। 

उधर, बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के के मामले में अमेरिका कूटनीतिक समाधान की बात कर रहा है। 10 दिसंबर को एक प्रेस ब्रीफिंग में स्टेट डिपार्टमेंट के प्रवक्ता मैथ्यू मिलर ने भारत में बांग्लादेशी राजनयिक मिशन पर हुए हमले और बढ़ते आक्रामक बयानबाजी को लेकर चिंताओं के बारे में एक सवाल के जवाब में अमेरिका के रुख को दोहराया। मिलर ने कहा, 'हम चाहते हैं कि सभी पक्ष आपसी मतभेदों को शांतिपूर्वक सुलझाएं।' उन्होंने कूटनीति और बातचीत के महत्व पर जोर दिया।

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