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जय भट्टाचार्य का नया ओपन एक्सेस साइंस जर्नल लॉन्च होते ही विवादों में, वजह जानिए

इस जर्नल के संपादकीय बोर्ड में FDA के संभावित प्रमुख और जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के सर्जन मार्टिन मकारी भी हैं।

 जय भट्टाचार्य को राष्ट्रपति ट्रंप ने नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ का निदेशक नामित किया है।  जय भट्टाचार्य को राष्ट्रपति ट्रंप ने नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ का निदेशक नामित किया है।  / X @DrJBhattacharya

ओपन एक्सेस जर्नल ऑफ द एकेडमी ऑफ पब्लिक हेल्थ अपने लॉन्च के साथ ही विवादों में घिर गया है। इस जर्नल के सह-संस्थापक जय भट्टाचार्य हैं, जिन्हें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेशनल इंस्टीट्यूट्स ऑफ हेल्थ (NIH) के निदेशक पद के लिए नामित किया है। 

इस जर्नल के संपादकीय बोर्ड में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) के संभावित प्रमुख और जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी के सर्जन मार्टिन मकारी भी हैं जिन्होंने कोरोना वैक्सीन को अनिवार्य बनाने का विरोध किया था।  

जर्नल का दावा है कि वह साइंटिफिक पब्लिकेशन में इनोवेटिव विजन पेश करता है। इसे दक्षिणपंथी गैर-लाभकारी संस्था रियलक्लियर फाउंडेशन का सपोर्ट भी हासिल है। पत्रिका बौद्धिक जवाबदेही, दृष्टिकोण में विविधता और ओपन पियर रिव्यू को बढ़ावा देने का भी दावा करती है।  

पारंपरिक साइंस जर्नल्स के उलट इसमें लेखों की जांच-पड़ताल नहीं की जाती है। आमंत्रित सदस्यों द्वारा भेजे गए सभी शोध पत्रों और उनके साथ पियर रिव्यू प्रकाशित कर दिए जाते हैं। पत्रिका के एक एडिटर इन चीफ मार्टिन कुलडॉर्फ कहते हैं कि इस मॉडल से परंपरागत पियर रिव्यू में होने वाली देरी की संभावना खत्म हो जाती है। साथ ही अनुसंधानों का तुरंत प्रसार भी संभव होता है।  

कुलडॉर्फ ने पहले अंक में लिखा कि जर्नल का यह मॉडल वैज्ञानिकों को समयबद्ध तरीके से और कुशलतापूर्वक अपने शोध कार्यों को प्रकाशित करने का अवसर प्रदान करता है जिससे समय और संसाधनों दोनों की बचत होती है।

हालांकि इस नए मॉडल को लेकर कई शोधकर्ता चिंताएं भी जता रहे हैं। जॉन हॉपकिन्स सेंटर फॉर हेल्थ सिक्योरिटी की गीगी ग्रोनवाल ने वायर्ड मैगजीन से कहा कि यह एक वैज्ञानिक पत्रिका नहीं, क्लब न्यूज़लेटर अधिक लगता है।  

यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल के रिसर्च कल्चर एक्सपर्ट मार्कस मुनाफो कहते हैं कि अकादमिक जगत पहले से ही ऐसे जर्नल्स और शोध पत्रों में अस्थिर बढ़ोतरी से जूझ रहा है जो मानवीय ज्ञान में कोई विशेष योगदान नहीं देते बल्कि समीक्षक समुदाय पर अतिरिक्त बोझ ही डालते हैं। 

इस जर्नल की शुरुआत ऐसे समय हुई है, जब जय भट्टाचार्य और मार्टिन कुलडॉर्फ द्वारा कोरोना लॉकडाउन को लेकर पहले की गई आलोचनाओं की भी समीक्षा हो रही है। उनके इन विचारों से जर्नल की विश्वसनीयता और पब्लिक हेल्थ रिसर्च पर उसके संभावित प्रभावों को लेकर बहस छिड़ गई है।  

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