हनोई में बौद्ध केंद्र का उद्घाटन। / X/@AmbHanoi
भारत और वियतनाम के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। वियतनाम की राजधानी हनोई में एक नए बौद्ध केंद्र का उद्घाटन किया गया।
हनोई स्थित भारतीय दूतावास ने शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी एक बयान में कहा कि बौद्ध धर्म भारत और वियतनाम के लोगों को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक और आध्यात्मिक बंधन है। बौद्ध धर्म ने दोनों देशों की मित्रता को मजबूत करने में हमेशा अहम भूमिका निभाई है और आगे भी निभाता रहेगा। वज्रयान ड्रिगुंग काग्यु समतेन लिंग धर्म केंद्र 4 जून को हनोई में खोला गया।
दूतावास ने बताया कि उद्घाटन समारोह में जियान पगोडा के महंत एवं वियतनाम बौद्ध संघ की केंद्रीय कार्यकारी परिषद के सदस्य परम पूज्य थिच मिन्ह न्घीएम, परम श्रद्धेय खेनत्रुल खुंगा कोंचोक तेनजिन रिनपोछे, अन्य पूज्य खेनपो, संघ के सदस्य तथा श्रद्धालु उपस्थित रहे।
भारतीय दूतावास के अनुसार, यह धर्म केंद्र आध्यात्मिकता और संस्कृति का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा और दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी जुड़ाव को और मजबूत करेगा। वियतनाम में भारत के राजदूत शेरिंग डब्ल्यू शेरपा ने इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित किया। भारतीय दूतावास ने वियतनाम बौद्ध संघ को उसके लगातार सहयोग और साझेदारी के लिए धन्यवाद भी दिया।
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पिछले महीने राजदूत शेरपा ने हनोई के येन फू पगोडा में आयोजित वेसाक दिवस समारोह में भी भाग लिया था। उस दौरान उन्होंने कहा था कि बौद्ध धर्म से जुड़ा आध्यात्मिक और दार्शनिक रिश्ता आज भी भारत और वियतनाम के संबंधों को प्रभावित और मजबूत कर रहा है।
6 मई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि भारत और वियतनाम के संबंधों को बढ़ाकर 'बेहतर व्यापक रणनीतिक साझेदारी' के स्तर पर पहुंचा दिया गया है।
नई दिल्ली के हैदराबाद हाउस में वियतनाम के राष्ट्रपति टो लाम के साथ बातचीत के बाद संयुक्त प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने वियतनाम को भारत की 'एक्ट ईस्ट' नीति और 'विजन महासागर' का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बताया था।
वियतनामी राष्ट्रपति का स्वागत करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, "राष्ट्रपति टो लाम ने अपनी भारत यात्रा की शुरुआत बोधगया से की। यह हमारे दोनों देशों की साझा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को दर्शाता है। उनकी इस यात्रा और हमारी सार्थक बातचीत के जरिए हम आपसी सद्भावना को ठोस परिणामों में बदल रहे हैं।"
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी बताया कि जब वर्ष 2025 में बौद्ध अवशेषों को वियतनाम में प्रदर्शित किया गया था, तब 1.5 करोड़ से अधिक लोगों ने उनके दर्शन किए थे। उन्होंने कहा कि भारत-वियतनाम साझेदारी में विरासत और विकास दोनों का समान महत्व है।
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