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भारतीय भी बन रहे थे अमेरिका-मेक्सिको मानव तस्करी रैकेट के शिकार

आरोपी मेजिया-जुनीगा ने कबूल किया कि सिर्फ दो साल में 2,500 से 3,000 अवैध प्रवासियों को अमेरिका में घुसाया गया।

मेक्सिकों के एफ्रेन जुनीगा-गार्सिया नाम के एक शख्स को बीते दिनों डेल रियो की अदालत में पेश किया गया था / AI

अमेरिका और मेक्सिको की एक संयुक्त कार्रवाई में बड़ा खुलासा हुआ है। मेक्सिकों के रहने वाले एफ्रेन जुनीगा-गार्सिया नाम के एक शख्स को बीते दिनों डेल रियो की अदालत में पेश किया गया जिस पर आरोप है कि उसने भारत समेत कई देशों के नागरिकों को अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल कराया।

मिली जानकारी के अनुसार संयुक्त कार्रवाई में गार्सिया को मेक्सिको से प्रत्यर्पित कर टेक्सास लाया गया। वह एक विशाल अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी संगठन का सक्रिय सदस्य था। गार्सिया ने भारत समेत अफगानिस्तान, यमन, मिस्र, पाकिस्तान, कोलंबिया, ग्वाटेमाला, होंडुरास और इक्वाडोर जैसे देशों के हजारों नागरिकों को अवैध रूप से अमेरिका में दाखिल कराया था।

अदालती दस्तावेजों के अनुसार नवंबर 2020 से सिंतबर 2023 तक यह संगठन मेक्सिको से संचालित होता रहा था। इस बीच इस संगठन ने करोड़ों डॉलर का अवैध मुनाफा कमाया। संगठन के पास मेक्सिको के मोंटेरे और पिएद्रास नेग्रास में गुप्त ठिकाने थे

ब्राजील स्थित एक पाकिस्तानी तस्कर संगठन के लिए सबसे पहले लोगों से एग्रीमेंट करता और पैसे लेता। इसके बाद वह तस्कर टेक्सास के सैन एंटोनियो में रहने वाले एक अन्य तस्कर और होंडुरास के नागरिक एनिल एडिल मेजिया-जुनीगा के साथ मिलकर दक्षिण अमेरिका से अमेरिका तक की यात्रा की व्यवस्था करता।

मेजिया-जुनीगा इस पूरे नेटवर्क का संचालन करता था। वह सशस्त्र कोयोट्स (गाइड), लोड ड्राइवर और स्टैश हाउस ऑपरेटरों को भुगतान करता था। मेजिया-जुनीगा ने कबूल किया कि सिर्फ दो साल में 2,500 से 3,000 अवैध प्रवासियों को अमेरिका में घुसाया गया।

संगठन ने प्रति व्यक्ति 6,500 से 12,000 डॉलर वसूले जिससे कुल मिलाकर 16 से 30 मिलियन डॉलर यानी करीब 133 से 250 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ। इस रैकेट में भारत के नागरिक भी शामिल थे जिन्हें अवैध तरीके से अमेरिका पहुंचाया गया।

आपको बता दें कि हाल के वर्षों में भारतीय नागरिकों का दक्षिण अमेरिका के रास्ते अमेरिका जाना एक गंभीर समस्या बन चुका है। कई भारतीय परिवार बेहतर भविष्य और रोजगार के लालच में ऐसे नेटवर्क्स के शिकार हो जाते हैं। भारत सरकार और अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों के लिए यह बड़ा मानव तस्करी संकट है।

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