लुइसियाना के नक्शे पर फैसले को लेकर भारतीय अमेरिकी नेता विभाजित

लुइसियाना बनाम कैलाइस मामले में 6-3 के फैसले ने मतदान अधिकार अधिनियम के दायरे को सीमित कर दिया।

वॉशिंगटन में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट की इमारत। / REUTERS/Kevin Mohatt

बीती 29 अप्रैल को लुइसियाना के संसदीय मानचित्र को लेकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर भारतीय अमेरिकी नेताओं की प्रतिक्रिया अलग-अलग रही। कुछ नेताओं ने इस फैसले की आलोचना करते हुए इसे मतदान अधिकारों को कमजोर करने वाला बताया जबकि अन्य ने इसे एक महत्वपूर्ण कानूनी विकास बताते हुए इसका समर्थन किया।

पूर्व उपराष्ट्रपति कमला हैरिस ने कहा कि यह फैसला मतदान अधिकार अधिनियम को खोखला कर देता है और हमारी चुनाव प्रणालियों में समानता और निष्पक्षता के मूलभूत वादे को पीछे धकेल देता है।

 



उन्होंने कहा कि मतदान अधिकार अधिनियम की धारा 2, अश्वेत और भूरे रंग के मतदाताओं को जानबूझकर उनकी राजनीतिक शक्ति को कम करने के लिए बनाए गए मानचित्रों से बचाने के लिए बचे अंतिम संघीय सुरक्षा उपायों में से एक थी। वह सुरक्षा छीन ली गई है। उन्होंने इस फैसले को घोर अन्याय बताते हुए एक लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक एजेंडे का हिस्सा बताया।

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न्यूयॉर्क शहर के मेयर जोहरान ममदानी ने कहा कि यह मतदान अधिकार अधिनियम के वादे पर सीधा हमला है। इससे "जातीय आधार पर लाखों अमेरिकियों को मताधिकार से वंचित करने और हमारे लोकतंत्र की नींव को कमजोर करने का खतरा है। 

 



ममदानी ने कहा कि लोकतंत्र अपने आप कायम नहीं रह सकता। हमें मिलकर इसका निर्माण, संरक्षण और बचाव करना होगा। न्यूयॉर्क शहर सभी लोगों की, लोगों द्वारा और लोगों के लिए सरकार का नेतृत्व करना जारी रखेगा।

प्रतिनिधि रो खन्ना ने कहा कि यह निर्णय अश्वेत अमेरिकियों की मतदान शक्ति को प्रभावी रूप से कमजोर कर देगा। ट्रम्प, वैंस, रिपब्लिकन न्यायाधीश और कांग्रेस में रिपब्लिकन बहुजातीय लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं क्योंकि वे इससे डरते हैं। वे सफल नहीं होंगे।



न्यूयॉर्क नगर परिषद के सदस्य शेखर कृष्णन ने भी इस निर्णय की आलोचना की। उन्होंने कहा कि न्यूयॉर्क नगर परिषद में चुने गए पहले भारतीय अमेरिकी के रूप में, मैं जानता हूं कि प्रतिनिधित्व कितना महत्वपूर्ण है। यह फैसला मतदान अधिकार अधिनियम और हमारे समुदायों के लिए मतदान के समान अधिकार को कमजोर करता है।



इसके विपरीत, सहायक अटॉर्नी जनरल हरमीत ढिल्लों ने इस फैसले का स्वागत किया। ढिल्लों ने कहा कि जिस फैसले का हम लंबे समय से इंतजार कर रहे थे, उसे देखकर मुझे बेहद खुशी हुई। यह मतदान अधिकार अधिनियम के न्यायशास्त्र में दशकों में हुए सबसे महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक है। उन्होंने अमेरिका की ओर से दायर किए गए एमिकस ब्रीफ में अपनी सह-लेखिका की भूमिका का भी उल्लेख किया।



लुइसियाना बनाम कैलाइस मामले में 29 अप्रैल को 6-3 के बहुमत से दिए गए फैसले में कहा गया कि लुइसियाना द्वारा दूसरे बहुसंख्यक अश्वेत कांग्रेसी जिले का निर्माण एक असंवैधानिक नस्लीय निर्वाचन क्षेत्र का पुनर्गठन था और 1965 के मतदान अधिकार अधिनियम का अनुपालन नस्ल-आधारित निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन को उचित नहीं ठहराता।

यह फैसला आगामी चुनावों से पहले निर्वाचन क्षेत्र पुनर्गठन की लड़ाई को नया रूप देने की उम्मीद है, खासकर दक्षिणी राज्यों में, जिसका असर अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व और कांग्रेसी सीटों पर नियंत्रण पर पड़ेगा।

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