हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन ने कई धार्मिक संगठनों के साथ मिलकर अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से जन्मसिद्ध नागरिकता को बरकरार रखने की अपील की है। संगठन ने चेतावनी दी कि इस संवैधानिक अधिकार को सीमित करने की कोई भी कोशिश प्रवासी परिवारों को अस्थिर कर सकती है और देश में धार्मिक विविधता को खतरे में डाल सकती है।
हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन यानी HAF ने 26 फरवरी को 57 धार्मिक संगठनों के साथ मिलकर ट्रंप बनाम बारबरा मामले में अमिकस ब्रीफ दाखिल किया था। यह मामला फिलहाल अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है। यह जानकारी 6 मार्च को जारी एक मीडिया विज्ञप्ति में दी गई है। यह पहल उस समय हुई जब जनवरी 2025 में ट्रंप प्रशासन द्वारा जारी एक कार्यकारी आदेश के बाद प्रवासी परिवारों में चिंता बढ़ गई। इस आदेश में जन्मसिद्ध नागरिकता को सीमित करने की कोशिश की गई थी।
फाउंडेशन ने कहा कि संविधान अमेरिका में जन्मे बच्चों को स्पष्ट सुरक्षा प्रदान करता है। संगठन ने कहा कि जनवरी 2025 से प्रवासी माता-पिता चिंतित हैं। संविधान स्पष्ट है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्मे बच्चे जन्म से नागरिक होते हैं।
संगठन ने कहा कि यह मुद्दा केवल संवैधानिक नहीं है, बल्कि नैतिक और धार्मिक मूल्यों से भी जुड़ा है जो दूसरों का स्वागत करने पर जोर देते हैं। संगठन ने अपने तर्क के समर्थन में हिंदू शास्त्रों की शिक्षाओं का भी उल्लेख किया। उपनिषद में कहा गया है कि छोटे सोच वाले लोग कहते हैं कि यह व्यक्ति अपना है और वह पराया है। उदार विचार वाले लोग पूरी दुनिया को एक परिवार मानते हैं। उपनिषद में भी कहा गया है कि अतिथि को देवता के समान मानो।
फाउंडेशन ने कहा कि हिंदू अन्य कई धार्मिक समुदायों के साथ मिलकर यह मानते हैं कि प्रवासियों और उनके परिवारों का स्वागत किया जाना चाहिए और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। संगठन ने कहा कि हिंदू अन्य कई धार्मिक समुदायों के साथ खड़े हैं, जो मानते हैं कि इस देश में आने वाले प्रवासियों और उनके परिवारों के प्रति जिम्मेदारी निभानी चाहिए और उनके बच्चों को नागरिकता की सुरक्षा मिलनी चाहिए।
संगठन ने यह भी कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता अमेरिका में धार्मिक विविधता को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हिंदू अमेरिका के सबसे नए प्रवासी समुदायों में से एक हैं। हिंदू अमेरिकियों में से तीन-चौथाई से अधिक का जन्म अमेरिका के बाहर हुआ है। फाउंडेशन ने कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता इस देश में धार्मिक विविधता सुनिश्चित करने के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
संगठन ने कहा कि अगर बच्चों को नागरिकता की गारंटी नहीं होगी, तो प्रवासी परिवारों के लिए अमेरिका में अपना जीवन बसाना और कठिन हो सकता है। हिंदू अमेरिकन फाउंडेशन की वरिष्ठ कानूनी निदेशक निधि शाह ने कहा कि इस मुद्दे का प्रवासी समुदायों पर सीधा असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि मैंने अपने समुदाय में कई परिवारों को एक नए देश में जीवन बसाने का कठिन रास्ता अपनाते देखा है। वे अपने बच्चों की परवरिश की चुनौतियों से गुजरते हैं और अपनी धार्मिक परंपराओं को बनाए रखने के लिए संघर्ष करते हैं।
उन्होंने कहा कि जन्मसिद्ध नागरिकता इन परिवारों को यहां आने और यहां रहने के लिए सुरक्षित महसूस कराने के लिए जरूरी है। सुप्रीम कोर्ट के सामने यह मामला ऐसे समय में आया है जब आव्रजन नीति और संविधान की व्याख्या को लेकर व्यापक बहस चल रही है। यह मुद्दा 14वें संशोधन से जुड़ा है। यह संशोधन गृह युद्ध के बाद अपनाया गया था। इसमें कहा गया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका में जन्मे या नागरिकता प्राप्त करने वाले सभी लोग उसके अधिकार क्षेत्र में आते हैं और देश के नागरिक हैं।
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