प्रतीकात्मक तस्वीर / IANS File Photo
भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौता (FTA) बांग्लादेश के लिए बड़ी चिंता का कारण बन गया है। बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह समझौता भारतीय वस्त्र, परिधान, चमड़ा और फुटवियर जैसे क्षेत्रों को यूरोपीय बाजार में बड़ा लाभ देगा—वही सेक्टर, जिनके दम पर बांग्लादेश ने वर्षों तक यूरोप में अपनी निर्यात सफलता कायम रखी है।
बांग्लादेश के प्रमुख अखबार डेली स्टार ने लिखा है कि नवंबर 2026 में बांग्लादेश के कम विकसित देश (LDC) की श्रेणी से बाहर होने और इसके बाद तीन साल की संक्रमण अवधि में EU बाजार में मिलने वाली रियायती पहुंच के खत्म होने की आशंका के बीच यह समझौता बांग्लादेश के लिए बेहद असहज समय पर सामने आया है।
रिपोर्ट के मुताबिक, अब तक भारतीय गारमेंट्स, टेक्सटाइल, लेदर और फुटवियर उत्पादों पर EU में भारी शुल्क लगता था। लेकिन भारत-EU FTA के तहत फुटवियर पर 17 फीसदी और परिधान व वस्त्रों पर 9 से 12 फीसदी तक का शुल्क घटकर शून्य हो जाएगा। इससे भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में बड़ा इजाफा होगा।
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अब तक LDC दर्जे के कारण शुल्क-मुक्त पहुंच का फायदा उठाकर बांग्लादेश ने EU के परिधान बाजार में अपनी हिस्सेदारी तेज़ी से बढ़ाई। जहां 2010 में EU के परिधान आयात में चीन की हिस्सेदारी 45 फीसदी थी, वह 2025 तक घटकर 28 फीसदी रह गई। इसी अवधि में बांग्लादेश की हिस्सेदारी करीब 7 फीसदी से बढ़कर 21 फीसदी हो गई।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वर्ष 2005 में EU बाजार में भारत और बांग्लादेश की हिस्सेदारी लगभग बराबर थी। लेकिन अगले दो दशकों में बांग्लादेश ने अपनी हिस्सेदारी तीन गुना बढ़ा ली, जबकि भारत की हिस्सेदारी घटकर करीब 5 फीसदी रह गई। बांग्लादेश की यह बढ़त केवल टैरिफ लाभों की वजह से नहीं, बल्कि LDC देशों के लिए EU के अनुकूल ‘सिंगल ट्रांसफॉर्मेशन’ जैसे नियमों के कारण भी संभव हो सकी।
डेली स्टार ने लिखा, “विडंबना यह है कि जिन तरजीही व्यापार लाभों ने बांग्लादेश को EU बाजार में तेजी से आगे बढ़ाया, वही फायदे अब खत्म हो रहे हैं, ठीक उसी समय जब भारत जैसे प्रमुख प्रतिस्पर्धी देशों को FTA के जरिए स्थायी शुल्क-मुक्त पहुंच मिल रही है।”
रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि EU की जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रेफरेंसेज (GSP) में मौजूद सेफगार्ड प्रावधानों के कारण, भले ही LDC से बाहर होने के बाद बांग्लादेश GSP+ के लिए पात्र हो जाए, फिर भी उसके गारमेंट निर्यात पर पूर्ण MFN टैरिफ लगने का खतरा बना रहेगा। इससे EU बाजार में प्रतिस्पर्धा का संतुलन पूरी तरह बदल सकता है।
इसके अलावा, भारतीय सरकार ने 2030 तक वस्त्र और परिधान निर्यात को मौजूदा करीब 40 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसके लिए उत्पादन-आधारित सब्सिडी, निर्यात प्रोत्साहन योजनाएं, इनपुट सपोर्ट और बुनियादी ढांचा व लॉजिस्टिक्स में बड़े निवेश जैसी बहुस्तरीय नीतियां लागू की जा रही हैं।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अमेरिका द्वारा लगाए गए पारस्परिक शुल्क (reciprocal tariffs) के चलते भारतीय निर्यातकों के लिए अमेरिकी बाजार चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में भारत का रुख वैकल्पिक बाजारों, खासकर यूरोप की ओर बढ़ना तय माना जा रहा है। भारत-EU FTA इस दिशा में मददगार साबित होगा, जिससे यूरोपीय बाजार में प्रतिस्पर्धा और तेज होगी—और इसका सबसे अधिक असर बांग्लादेश पर पड़ सकता है।
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