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धर्मेंद्र प्रधान और JHU के प्रतिनिधिमंडल के बीच बातचीत, भारत में कैंपस खोलने पर चर्चा 

प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई JHU के प्रेसिडेंट Ronald J. Daniels ने की। इसमें भारतीय मूल के प्रमुख फेकल्टी मेंबर और प्रशासक भी शामिल थे। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस तरह के परिवर्तनकारी वैश्विक सहयोग को सक्षम करने में भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (JHU) और गुप्ता-क्लिंस्की इंडिया इंस्टिट्यूट (GKII) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की। / X/@dpradhanbjp

भारत के शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी (JHU) और गुप्ता-क्लिंस्की इंडिया इंस्टिट्यूट (GKII) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल के साथ मुलाकात की। इस मुलाकात में अकादमिक और रिसर्च साझेदारी को और मजबूत करने पर बातचीत हुई। इसमें भारत में JHU का एक ऑफ्शोर कैंपस खोलने की संभावना भी शामिल है। ये मीटिंग नई दिल्ली में हुई। इसमें शिक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और उच्च शिक्षा विभाग के सीनियर अधिकारी भी शामिल हुए।

इस प्रतिनिधिमंडल की अगुवाई JHU के प्रेसिडेंट Ronald J. Daniels ने की। इसमें भारतीय मूल के प्रमुख फेकल्टी मेंबर और प्रशासक शामिल थे। प्रधान ने इस तरह के परिवर्तनकारी वैश्विक सहयोग को सक्षम करने में भारत की राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020) की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) के साथ मजबूत साझेदारी बनाने के लिए जेएचयू की प्रतिबद्धता की प्रशंसा की, विशेष रूप से उभरते क्षेत्रों जैसे डेटा विज्ञान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और भविष्य की प्रौद्योगिकियों में। 

प्रधान ने कहा, 'ये साझेदारी दोनों देशों के स्टूडेंट्स में इनोवेशन और उद्यमिता को बढ़ावा देने की क्षमता रखते हैं। दोहरी और जॉइंट डिग्री प्रोग्राम्स, स्टूडेंट्स और फैकल्टी के लिए दो-तरफा गतिशीलता और रिसर्च पार्टनरशिप, नॉलेज एक्सचेंज के नए रास्ते खोलेंगे।' 

मीटिंग में भारत-अमेरिका के बीच शैक्षिक सहयोग को और मजबूत करने पर जोर दिया गया, जोकि बहुत अहमियत रखता है। JHU का डेलीगेशन अपने टूर के दौरान देश के विभिन्न यूनिवर्सिटी कैंपस जाएँगे और सरकारी अधिकारियों, विद्वानों और दूतावास के प्रतिनिधियों से बातचीत करेंगे। ताकि भारत में अपनी उपस्थिति को और मजबूत किया जा सके और अंतर्राष्ट्रीयकरण के प्रयासों को सपोर्ट किया जा सके।

इस 12 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में JHU के कई बड़े अधिकारी शामिल थे। इनमें फ्रिट्ज डब्ल्यू श्रोएडर, अलेक्जेंडर ट्रायंटिस (केरी बिजनेस स्कूल के डीन) और ब्लूमबर्ग स्कूल में अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य विभाग के अध्यक्ष जुड वाल्सन हैं। खास बात ये है कि इसमें भारतीय मूल के कई फैकल्टी मेंबर्स भी थे। इनमें जीकेआईआई की सह-संस्थापक और संक्रामक रोगों के विभाग की निदेशक अमिता गुप्ता और बाल रोग एवं अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य के प्रोफेसर माथुराम संतोषम शामिल हैं।

GKII के सलाहकार बोर्ड के मेंबर्स, जिनमें फिलैंथ्रोपिस्ट्स राज और कमला गुप्ता, दीपक राज, कुणाल पाल और नीतीशा बेसरा शामिल हैं, भी मौजूद थे। इससे JHU कम्युनिटी को रिसर्च, एजुकेशन, पॉलिसी और प्रैक्टिस में भारतीय सहयोगी से जोड़ने के संस्थान के मिशन पर जोर दिया गया।

इस मीटिंग से पता चलता है कि ग्लोबल एकेडेमिक पार्टनरशिप के लिए भारत कितना महत्वपूर्ण बनता जा रहा है। प्रधान ने शिक्षा में इनोवेशन और एक्सीलेंस को बढ़ावा देने पर सरकार के फोकस को भी रेखांकित किया। भारत में JHU के एक ऑफशोर कैंपस की स्थापना इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने की एक अहम पहल है, जिससे ग्लोबल नॉलेज इकॉनमी में भारत की भूमिका और मजबूत होगी।

 

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