विनय क्वात्रा ने कहा कि यह पहली बार है जब इतना बड़ा वैश्विक एआई सम्मेलन किसी विकासशील देश में आयोजित किया जा रहा है। / X/@FranceinSF
भारत और फ्रांस ने नई दिल्ली में होने वाले एआई इम्पैक्ट समिट को ग्लोबल आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस गवर्नेंस के लिए एक अहम मोड़ बताया है। इस सम्मेलन में समावेश, विकास और जमीन पर दिखने वाले परिणामों पर खास ध्यान दिया जाएगा।
अमेरिका में सीएसआईएस सम्मेलन के दौरान हुई एक चर्चा में अमेरिका में भारतीय राजदूत विनय एम क्वात्रा और फ्रांसीसी राजदूत लॉरेंट बिली ने कहा कि फरवरी में नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन पहले हुए वैश्विक एआई सम्मेलनों की कड़ी को आगे बढ़ाएगा। साथ ही इसमें विकासशील देशों, यानी ग्लोबल साउथ की जरूरतों को भी प्रमुखता दी जाएगी।
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विनय क्वात्रा ने कहा कि यह पहली बार है जब इतना बड़ा वैश्विक एआई सम्मेलन किसी विकासशील देश में आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका मकसद यह दिखाना है कि एआई सिर्फ विकसित देशों के लिए नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के समाजों के लिए कैसे उपयोगी हो सकता है।
क्वात्रा के अनुसार, भारत ने इस सम्मेलन को तीन मुख्य विषयों पर केंद्रित किया है – लोग, धरती और प्रगति। इसका मुख्य उद्देश्य एआई को आम लोगों तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि सोच यह है कि एआई सभी के लिए उपलब्ध हो, आसानी से इस्तेमाल किया जा सके और बड़े स्तर पर काम कर सके।
फ्रांस के राजदूत बिली ने कहा कि फ्रांस और भारत वर्ष 2025 में पेरिस में हुए एआई एक्शन समिट से शुरू हुए सहयोग को आगे बढ़ा रहे हैं। उस सम्मेलन ने एआई पर चर्चा को केवल नियम-कानून से आगे बढ़ाकर उसके व्यावहारिक उपयोग और निवेश की दिशा में मोड़ा था। उन्होंने कहा कि अब ध्यान एआई को लागू करने पर है और दिल्ली में होने वाले सम्मेलन में टिकाऊ और जनहित से जुड़े एआई पर अलग-अलग कार्यक्रम भी होंगे।
क्वात्रा ने बताया कि इस सम्मेलन में “इम्पैक्ट” यानी असर पर जोर देने का मतलब है कि अब केवल सैद्धांतिक बातों से आगे बढ़कर एआई को लागू किया जाए और उसके ठोस नतीजे देखे जाएं। उन्होंने कहा कि समाज को अब एआई के वास्तविक इस्तेमाल की ओर बढ़ना होगा।
इस शिखर सम्मेलन में एक बड़ा एआई एक्सपो होगा, जिसमें सैकड़ों प्रदर्शक शामिल होंगे। इसके अलावा शोध से जुड़े कार्यक्रम, बड़े उद्योगपतियों और मुख्य कार्यकारी अधिकारियों की राउंडटेबल मीटिंग्स और नेताओं की साझा घोषणा भी होगी। क्वात्रा ने इसे एक पूर्ण स्तर का एआई सम्मेलन बताया, जिसमें शोध, उद्योग और प्रशासन – तीनों शामिल होंगे।
दोनों राजदूतों ने कहा कि इस सम्मेलन का एक उद्देश्य यह भी है कि दुनिया में एआई से जुड़े नियम बिखरे हुए न हों, लेकिन हर देश की अपनी नीति का सम्मान बना रहे।
बिली ने कहा कि पेरिस सम्मेलन के बाद फ्रांस और यूरोप में एआई के क्षेत्र में बड़े निवेश हुए हैं, खासकर कंप्यूटिंग ढांचे और शोध में। वहीं, क्वात्रा ने बताया कि भारत में भी ऐसी ही तेजी देखने को मिल रही है, जहां बड़ी वैश्विक तकनीकी कंपनियां एआई ढांचे, कंप्यूटिंग क्षमता और ऊर्जा में निवेश कर रही हैं।
क्वात्रा के अनुसार, भारत की बड़ी जनसंख्या और डिजिटल मंचों का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल भारत को बड़े स्तर पर एआई को आजमाने और लागू करने के लिए एक अहम देश बनाता है।
एआई इम्पैक्ट शिखर सम्मेलन फरवरी 2026 में नई दिल्ली में होगा। इससे पहले ऐसे सम्मेलन ब्रिटेन, दक्षिण कोरिया और फ्रांस में हो चुके हैं।
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