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IAMC ने छात्र विरोध प्रदर्शन पर दिल्ली पुलिस की कार्रवाई की निंदा की

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल ने परीक्षा में गड़बड़ियों और लोगों को हिरासत में लिए जाने के विरोध में संसद तक निकाले गए मार्च पर पुलिस की कार्रवाई की आलोचना की है।

 इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल का लोगो। इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल का लोगो। / IAMC

इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC) ने 21 जुलाई को नई दिल्ली में छात्रों के विरोध प्रदर्शन पर पुलिस की कार्रवाई की निंदा की। मॉनसून सत्र के पहले दिन, हजारों प्रदर्शनकारियों ने चलो संसद (संसद की ओर मार्च) के बैनर तले संसद की ओर मार्च किया था।

वॉशिंगटन स्थित इस संस्था के अनुसार, यह मार्च छात्र समूहों के एक गठबंधन ने आयोजित किया था। ये छात्र परीक्षाओं में बार-बार होने वाली गड़बड़ियों का विरोध कर रहे थे, जिनमें NEET पेपर लीक विवाद और भर्ती व प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े अन्य घोटाले शामिल थे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि इन घटनाओं ने भारत की शिक्षा प्रणाली में भरोसा कम किया है और लाखों छात्रों के भविष्य पर असर डाला है।

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प्रदर्शनकारियों ने परीक्षा से जुड़े विवादों को संभालने के तरीके को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की। कई लोगों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी जिम्मेदारी लेने की मांग की; उन्होंने इसे शासन, शिक्षा और युवाओं के रोज़गार के क्षेत्र में व्यापक विफलता बताया।

IAMC ने आरोप लगाया कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए बल प्रयोग किया। संस्था ने कहा कि पुलिस ने सेंट्रल दिल्ली में कई जगहों पर लाठीचार्ज किया, आंसू गैस के गोले छोड़े और निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया।

समूह ने यह भी कहा कि अधिकारियों ने विरोध स्थल के पांच किलोमीटर के दायरे में इंटरनेट बंद कर दिया, पांच मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए, कई बैरिकेड लगाए और सैकड़ों प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया। संस्था ने शुरुआती रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं; साथ ही कहा कि वायरल हो रहे वीडियो में प्रदर्शनकारियों के सिर पर चोटें और खून बहता हुआ दिख रहा है।

IAMC के अध्यक्ष मोहम्मद जवाद ने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से इकट्ठा होने के अपने संवैधानिक अधिकार का इस्तेमाल कर रहे भारत के ही छात्रों के खिलाफ बेरहमी से बल प्रयोग, पैलेट गन और आंसू गैस का इस्तेमाल करना, असहमति के प्रति मोदी सरकार के तानाशाही रवैये को दिखाता है और यह बेहद चिंताजनक है।

जवाद ने विरोध प्रदर्शनों पर सरकार की प्रतिक्रिया की भी आलोचना की।

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