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ह्यूस्टन के उद्यमी वेंकट चित्तूरी ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर दो किताबें जारी कीं

इन किताबों का आधिकारिक विमोचन इस महीने सैन फ्रांसिस्को में आयोजित तकनीकी सम्मेलन रीप्ले 2026 में हुआ। इन्हें टेम्पोरल टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समर अब्बास ने लॉन्च किया।

 Replay 2026 में 'Durable Agents' और 'Built to Endure' पुस्तकें लॉन्च की गईं। Replay 2026 में 'Durable Agents' और 'Built to Endure' पुस्तकें लॉन्च की गईं। / Technoidentity

ग्रेटर ह्यूस्टन में रहने वाले भारतीय-अमेरिकी लेखक और टेक्नोआइडेंटिटी कंपनी के संस्थापक वेंकट चित्तूरी ने दो नई किताबें जारी की हैं। इन किताबों में बताया गया है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सिस्टम नियंत्रित माहौल में तो अच्छे चलते हैं, लेकिन असली दुनिया की परिस्थितियों में अक्सर क्यों विफल हो जाते हैं।

दोनों किताबें ब्लूरोज पब्लिशर्स द्वारा प्रकाशित की गई हैं। इनमें एंटरप्राइज एआई, संचालन की मजबूती और लंबे समय तक टिकाऊ तकनीकी ढांचे पर चर्चा की गई है। यह ऐसे समय में आई हैं जब कई कंपनियां एआई को प्रयोग स्तर से निकालकर वास्तविक और भरोसेमंद इस्तेमाल तक पहुंचाने में संघर्ष कर रही हैं।

इन किताबों का आधिकारिक विमोचन इस महीने सैन फ्रांसिस्को में आयोजित तकनीकी सम्मेलन रीप्ले 2026 में हुआ। इन्हें टेम्पोरल टेक्नोलॉजीज के मुख्य कार्यकारी अधिकारी समर अब्बास ने लॉन्च किया। किताबों में बताया गया है कि संचालन संबंधी कमजोरियां, छिपी तकनीकी समस्याएं, कार्यप्रणाली में टूटन और निगरानी की कमी ऐसे सिस्टम बना देती हैं जो प्रदर्शन के दौरान तो सफल दिखते हैं, लेकिन असली परिस्थितियों में काम नहीं कर पाते।

पहली किताब बिल्ट टू एंड्योर इस बात पर केंद्रित है कि आधुनिक कंपनियां एआई के दौर में संचालन की मजबूती, अनुशासित कामकाज, बड़े स्तर पर काम करने वाले सिस्टम और भरोसेमंद उत्पाद ढांचे के जरिए लंबे समय तक प्रतिस्पर्धा में कैसे टिक सकती हैं। दूसरी किताब ड्यूरेबल एजेंट्स एआई के सफल परीक्षण और बड़े स्तर पर उसके इस्तेमाल के बीच मौजूद भरोसे की कमी पर ध्यान देती है।

किताब का कहना है कि अब एंटरप्राइज एआई की सबसे बड़ी चुनौती सिर्फ मॉडल की बुद्धिमत्ता नहीं है, बल्कि उसके आसपास काम करने वाली पूरी व्यवस्था है। इसमें रिकवरी सिस्टम, आपसी तालमेल, जांच, निगरानी और मानवीय नियंत्रण जैसी चीजों को अहम बताया गया है।

वेंकट चित्तूरी ने अपनी किताबों के बारे में कहा कि ज्यादातर कंपनियां सोचती हैं कि उनके पास एआई की समस्या है, जबकि असल में उनके सिस्टम में समस्या होती है। उन्होंने आगे कहा कि बुद्धिमत्ता अब आसानी से उपलब्ध हो रही है। जो चीज दुर्लभ है, वह है टिकाऊपन ऐसे सिस्टम जो असली दबाव में भी भरोसेमंद, जांच योग्य, बदलने योग्य और बड़े स्तर पर इस्तेमाल किए जा सकें। एआई के दौर में वही कंपनियां सफल होंगी जो सिर्फ तेजी से स्वचालन नहीं करेंगी, बल्कि लंबे समय तक टिकने वाले सिस्टम बनाएंगी।

चित्तूरी का मानना है कि ये दोनों किताबें मिलकर कंपनी प्रमुखों, तकनीकी अधिकारियों, सिस्टम आर्किटेक्ट्स और उद्यमियों को एआई के अगले दौर के लिए मजबूत और टिकाऊ सिस्टम बनाने का व्यावहारिक तरीका देंगी। वेंकट चित्तूरी ने हैदराबाद के उस्मानिया विश्वविद्यालय से कंप्यूटर विज्ञान में इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की है। टेक्नोआइडेंटिटी शुरू करने से पहले वह माइक्रोसॉफ्ट में एप्लिकेशन डेवलपर के रूप में काम कर चुके हैं। वह फोर्ब्स बिजनेस काउंसिल के सदस्य भी रह चुके हैं।
 

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