दुनिया भर में गरीब और वंचित बच्चों की भलाई के लिए काम कर रही संस्था क्राई (चाइल्ड रिलीफ एंड यू) ने भारत में कम आय और जोखिम भरे ठिकानों पर काम करने वाले बच्चों के लिए 1.5 मिलियन डॉलर (करीब 13 करोड़) से अधिक की राशि अपने सामूहिक प्रयासों से जुटाई है। पैसा जुटाने के लिए अमेरिका में हुए पांच आयोजनों में बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल सम्मानित अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।
क्राई अमेरिका चाइल्ड रिलीफ एंड यू की धन उगाहने वाली इकाई है। क्राई मुंबई स्थित एक गैर-लाभकारी संगठन है। इसकी स्थापना 1979 में एयर इंडिया के पूर्व कर्मी रिप्पन कपूर ने की थी। रिप्पन अपने घर के पास झुग्गियों में रहने वाले बच्चों को देखकर बड़े हुए थे। जब कपूर ने संस्था की शुरुआत की तो उनके पास पैसे नहीं थे, लेकिन उन्होंने अपने नवोदित एनजीओ के वास्ते राजस्व जुटाने के लिए ग्रीटिंग कार्ड बनाए।
आज क्राई की भारत के हर राज्य में परियोजनाएं हैं जो 5,027 गांवों और मलिन बस्तियों में 796,919 बच्चों के साथ सीधे काम कर रही हैं। संगठन मुख्य रूप से बाल स्वास्थ्य और कुपोषण, शिक्षा और बाल श्रम और बाल विवाह को खत्म करने पर केंद्रित है।
28 अप्रैल को सैन फ्रांसिस्को के बे एरिया में आयोजित समारोह में रामपाल एक टेबल से दूसरी टेबल पर गए और सिलिकॉन वैली के अमीर निवासियों से अपने दिल और बटुए खोलने का आग्रह किया। इस मौके पर अभिनेता अर्जुन रामपाल ने कहा कि कुछ गंदे लोग हैं जो गंदी हरकतें करते हैं। उन लोगों को रोकने की जरूरत है। इसीलिए हम हैं। रामपाल ने यौन तस्करी के शिकार बच्चों के लिए क्राई के प्रयासों का समर्थन किया। रामपाल ने कहा कि हम यहां बदलाव लाने के लिए हैं क्योंकि हमें उन बच्चों की परवाह है। हम यहां उन लाखों बच्चों की सहायता के लिए हैं जिन्हें सहायता के लिए किसी मित्र की आवश्यकता है।
आयोजन के दौरान सीईओ पूजा मारवाह ने कहा कि क्राई की परियोजनाएं अप्रत्यक्ष रूप से अतिरिक्त 25 लाख बच्चों के जीवन को प्रभावित करती हैं। हमारी परियोजनाओं प्रभाव बहुआयामी है। यदि आप एक जिले में 10% बदलाव कर सकते हैं तो आप पूरे जिले को बदल सकते हैं। पूजा ने बताया कि बीते 15 दिनों में क्राई अमेरिका ने न्यूयॉर्क, टेक्सास, सिएटल और सैन डिएगो में भी समारोह आयोजित किए हैं।
समारोह से इतर मारवाह ने बाद में न्यू इंडिया अब्रॉड से कहा कि भारत के कम आय वाले बच्चों में एजेंसी की भावना का अभाव है। हम एक ऐसा भविष्य बनाने की उम्मीद कर रहे हैं जिसमें एक बच्चा कह सके- नहीं, मैं शादी नहीं करूंगा। नहीं, मैं स्कूल नहीं छोड़ूंगा। हम ऐसे बच्चे बनाना चाहते हैं जो बाहर जाकर दूसरों के जीवन को आकार दें।
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