कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी और पीएम मोदी / IANS/PMO
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी इस सप्ताह के अंत में भारत की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। उनकी इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य भारत और कनाडा के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नई ऊंचाई पर ले जाना और व्यापार, ऊर्जा तथा रक्षा जैसे क्षेत्रों में सहयोग को विस्तार देना है। प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) द्वारा सोमवार को जारी एक बयान के अनुसार, कार्नी अपनी यात्रा की शुरुआत मुंबई से करेंगे, जिसके बाद वे नई दिल्ली पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होगी।
दोनों नेताओं के बीच होने वाली वार्ता का मुख्य केंद्र व्यापार, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), प्रतिभा, संस्कृति और रक्षा क्षेत्र में नई और महत्वाकांक्षी साझेदारी विकसित करना होगा। भारत के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए कार्नी मुंबई में व्यापारिक नेताओं से भी मिलेंगे, ताकि कनाडा में निवेश के नए अवसरों की पहचान की जा सके और दोनों देशों के व्यवसायों के बीच मजबूत गठजोड़ बनाया जा सके।
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भारत की यात्रा समाप्त करने के बाद, कनाडाई प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया और जापान के दौरे पर जाएंगे। 26 फरवरी से 7 मार्च तक होने वाली उनकी यह तीन देशों की हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) यात्रा क्षेत्र के सबसे मजबूत भागीदारों के साथ संबंधों को गहरा करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। कार्नी के कार्यालय ने कहा कि अनिश्चित वैश्विक परिवेश में कनाडा अपने व्यापार में विविधता लाने और नई अंतरराष्ट्रीय निवेश को आकर्षित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
गौरतलब है कि भारत और कनाडा के बीच व्यापारिक संबंधों में हाल के वर्षों में काफी प्रगति हुई है। साल 2024 में भारत, कनाडा का सातवां सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार रहा और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 30.8 बिलियन डॉलर तक पहुँच गया। पिछले साल नवंबर में जोहान्सबर्ग में G20 शिखर सम्मेलन के दौरान पीएम मोदी और मार्क कार्नी के बीच हुई मुलाकात में 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 50 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था।
इस महीने की शुरुआत में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन के दौरान भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद के बीच हुई मुलाकात ने भी इस यात्रा की जमीन तैयार की। दोनों देशों के बीच 2025 में हुए नए रोडमैप के आधार पर अब ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और रक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में ठोस प्रगति की उम्मीद की जा रही है। कनाडाई पेंशन फंडों की भारतीय कंपनियों में बढ़ती रुचि भी इस आर्थिक साझेदारी को और मजबूती प्रदान कर रही है।
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