कनाडाई पीएम कार्नी और पीएम मोदी / IANS/PMO
भौगोलिक या सैन्य गठबंधन के बजाय भारत और कनाडा के रिश्ते आर्थिक पूरकता और वैश्विक शासन में साझा हितों से जुड़े हैं। ये रिश्ते ऐतिहासिक रूप से मजबूत रहे हैं। पूर्व राजनयिक संजय कुमार वर्मा के अनुसार, अगर वर्तमान प्रवृत्तियाँ बनी रहती हैं, तो आने वाले दशक में भारत-कनाडा संबंध राजनीतिक उतार-चढ़ाव से कम और निवेश, ऊर्जा सहयोग, आपूर्ति श्रृंखला साझेदारी और गहरे लोग-से-लोग संबंधों से अधिक संचालित होंगे।
कार्नी के दौरे का महत्व
वर्मा ने कहा कि अगले कुछ हफ्तों में कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का भारत दौरा द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरीकरण से संरचित विस्तार की दिशा में बदलाव का संकेत दे सकता है। दौरे में व्यापार संरचना, निवेश प्रवाह और दीर्घकालिक ऊर्जा एकीकरण पर जोर रहने की संभावना है।
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आर्थिक और व्यापारिक पहल
व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते (CEPA) के लिए टर्म्स ऑफ रेफरेंस को अंतिम रूप देना सबसे महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। भारतीय निर्यात में फार्मास्यूटिकल्स, डिजिटल सेवाएं, इंजीनियरिंग वस्तुएं और रिफाइंड पेट्रोलियम उत्पाद की पहुँच कनाडा में बढ़ सकती है। कनाडा की ऊर्जा, पोटाश, दालें, लकड़ी और उन्नत कृषि तकनीक में भारत अपने बाजार खोल सकता है।
निवेश: कनाडाई संस्थागत पूंजी पहले से ही भारत के इन्फ्रास्ट्रक्चर और नवीकरणीय ऊर्जा में सबसे बड़े निवेश स्रोतों में शामिल है।
ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार
ऊर्जा सहयोग: हाइड्रोकार्बन आपूर्ति और दीर्घकालिक यूरेनियम खरीद पर चर्चा।
उद्योग और तकनीकी सहयोग: महत्वपूर्ण खनिज प्रसंस्करण, उन्नत सामग्री, एयरोस्पेस, डिजिटल तकनीक और अगली पीढ़ी के निर्माण।
साफ और हरित तकनीक सहयोग: नवीकरणीय ऊर्जा, कार्बन प्रबंधन, हाइड्रोजन वैल्यू चेन।
नवाचार और स्टार्टअप सहयोग, शोध और कौशल मोबिलिटी।
सुरक्षा और आतंकवाद विरोधी सहयोग
दौरे के दौरान सीमा पार आतंकवाद, खालिस्तानी नेटवर्क और वित्तीय सहायक तत्वों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कानून प्रवर्तन और सुरक्षा एजेंसियों के बीच साझा खुफिया जानकारी और अपराध/आतंक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर संयुक्त कार्रवाई को बढ़ावा मिलेगा।
वैश्विक स्तर पर सहयोग
दोनों देश संयुक्त राष्ट्र प्रणाली और वैश्विक शासन संस्थाओं के सुधार, सुरक्षा और विकास में प्रभावशीलता, और आतंकवाद विरोधी सहयोग को भी मजबूत करने पर जोर देंगे। इस दौरे के साथ भारत-कनाडा संबंधों में व्यापक आर्थिक, ऊर्जा, सुरक्षा और नवाचार सहयोग की नई दिशा तय होने की संभावना है।
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