बॉन्डी बीच हमले के बाद एजेंसियां अलर्ट / image provided
ऑस्ट्रेलिया के बॉन्डी बीच पर हुए आतंकी हमले को लेकर जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। यह पुष्टि हो चुकी है कि हमले में शामिल एक आरोपी हैदराबाद का रहने वाला था। 50 वर्षीय साजिद अकरम को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया, जबकि उसका 24 वर्षीय बेटा नावेद अकरम घायल अवस्था में अस्पताल में भर्ती है।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, साजिद अकरम हैदराबाद के टॉली चौक इलाके की अल हसनाथ कॉलोनी का निवासी था। हालांकि हैदराबाद का नाम पहले भी आतंकी गतिविधियों और कट्टरपंथ से जुड़ता रहा है, लेकिन एजेंसियों का कहना है कि साजिद का कट्टरपंथीकरण भारत में नहीं हुआ। यह प्रक्रिया सिडनी में हुई और पिता-पुत्र ने अपने स्तर पर ही इस हमले को अंजाम दिया।
आईएस विचारधार से प्रेरित था हमलावर
जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों को सिडनी में इस्लामिक स्टेट (आईएस) की विचारधारा से प्रभावित किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक यह पूरी तरह विचारधारा से प्रेरित हमला था, जिसमें 16 लोगों की जान गई। जांच की कड़ी एक कुख्यात मौलवी विस्साम हद्दाद तक पहुंची है, जो इस्लामिक स्टेट से जुड़ा बताया जाता है। हद्दाद लंबे समय से कट्टरपंथी विचारों का प्रचार करता रहा है, लेकिन कई चेतावनियों के बावजूद ऑस्ट्रेलियाई एजेंसियां उसके खिलाफ कार्रवाई करने में विफल रहीं।
यह भी पढ़ें- धार्मिक आजादी ही अमेरिका की असली ताकत, रामास्वामी ने बॉन्डी बीच हमले का भी दिया हवाला
भारतीय खुफिया एजेंसियों का कहना है कि हद्दाद कोई नया नाम नहीं है। वह पहले से ही विवादित रहा है। यह इस्लामिक स्टेट का एक जाना-पहचाना तरीका है, जिसमें सीधे ट्रेनिंग देने के बजाय विचारधारा के जरिए लोगों को कट्टर बनाया जाता है। इसी रणनीति के तहत लोग खुद ही हमलों को अंजाम दे देते हैं।
अधिकारियों का कहना है कि इस मामले की तुलना भारत के फरीदाबाद मॉड्यूल से की जा सकती है, जिसने दिल्ली के लाल किले में विस्फोट की घटना को अंजाम दिया था। वह भी एक आत्म-प्रेरित मॉड्यूल था, जिसके सदस्य कट्टरपंथी मौलवी मुफ्ती इरफान अहमद से प्रभावित थे।
खुफिया एजेंसियों ने नए साल के जश्न के दौरान संभावित हमलों को लेकर राज्य पुलिस को अलर्ट किया है। एजेंसियों ने यह भी चेतावनी दी है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद विवादित और कट्टरपंथी प्रचारक युवाओं को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं। इस्लामिक स्टेट ऐसे प्रचारकों को खास तौर पर पहचान कर भर्ती और कट्टरपंथ फैलाने का काम सौंपती है।
ऑस्ट्रेलिया मामले में जांच से पता चला है कि पहले बेटा नावेद हद्दाद की कक्षाओं में शामिल हुआ और बाद में उसने अपने पिता को भी इससे जोड़ा। एजेंसियों के अनुसार, हद्दाद के भाषणों की भाषा इतनी प्रभावशाली होती है कि वह युवाओं के साथ-साथ बुजुर्गों को भी आसानी से प्रभावित कर लेता है। हाल के वर्षों में उसने खास तौर पर इजरायल-हमास संघर्ष को अपने भाषणों का केंद्र बनाया और इजरायल से जुड़े लोगों को निशाना बनाने के लिए उकसाया। अधिकारियों के मुताबिक, हनुक्का के पहले दिन यहूदी समुदाय पर हुआ बॉन्डी बीच हमला इसी सोच का नतीजा था।
खुफिया अधिकारियों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया में खतरे के संकेत पहले से मौजूद थे। ASIO के एक अंडरकवर एजेंट ने बैंकस्टाउन स्थित अल मदीना दावाह सेंटर में युवाओं को कट्टर बनाने की चेतावनी दी थी, लेकिन फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। हद्दाद पर अब तक आतंकवाद से जुड़ा कोई मामला दर्ज नहीं किया गया है और उसने बॉन्डी बीच हमले में किसी भी भूमिका से इनकार किया है।
एजेंसियों का कहना है कि यह इस्लामिक स्टेट की रणनीति का अहम हिस्सा है। प्रचारक सीधे हमले की योजना, ट्रेनिंग या लॉजिस्टिक्स में शामिल नहीं होता, जिससे उसे इनकार करने का मौका मिल जाता है और जांच की कड़ी उस तक नहीं पहुंच पाती।
जांच में सामने आया है कि हद्दाद ने करीब पांच साल में पिता-पुत्र को कट्टर बनाया। हालांकि पुलिस को अब तक हमले और हद्दाद के बीच कोई सीधा सबूत नहीं मिला है, लेकिन दोनों की फिलीपींस यात्रा की जांच की जा रही है। एजेंसियों को शक है कि वहां उन्हें ट्रेनिंग दी गई हो सकती है।
भारतीय खुफिया एजेंसियां भारत में भी बढ़ती प्रो-हमास गतिविधियों पर नजर रखे हुए हैं। एजेंसियों का कहना है कि कुछ कट्टरपंथी प्रचारक इजरायल-हमास मुद्दे का इस्तेमाल कर यह दावा कर रहे हैं कि भारत इजरायल समर्थक है और इसलिए भारत में भी हमले होने चाहिए। फरीदाबाद मॉड्यूल की जांच में भी सामने आया था कि उसके सदस्य हमास समर्थक थे और भारत के इजरायल से करीबी संबंधों का बदला लेने के लिए बड़े हमलों की योजना बना रहे थे।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login