अमेरिकी सांसद एमी बेरा / X/@RepBera
भारतीय मूल के डेमोक्रेटिक सांसद एमी बेरा ने प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले सरकारी खर्च की बेहतर निगरानी और रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने के लिए एक नया विधेयक पेश किया है। इसका मकसद नीति-निर्माताओं को स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने, मरीजों के बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने और समग्र स्वास्थ्य व्यवस्था को मजबूत बनाने में मदद करना है।
‘प्रायोरिटाइजिंग प्राइमरी केयर एक्ट 2026’ नाम के इस द्विदलीय विधेयक को रिपब्लिकन सांसद डेविड रूजर और जेन किगन्स व डेमोक्रेट सांसद एमी बेरा और जो कोर्टनी ने संयुक्त रूप से पेश किया है। आपको बता दें कि चारों सांसद कांग्रेसनल प्राइमरी केयर कॉकस के सह-अध्यक्ष हैं।
विधेयक के तहत संघीय एजेंसियों को हर वर्ष कांग्रेस को यह बताना होगा कि स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले कुल खर्च में से कितना हिस्सा प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च किया जा रहा है। इसके अलावा यह कानून एक संघीय कार्य समूह के गठन का भी प्रस्ताव करता है जो विशेष रूप से ग्रामीण और चिकित्सा सुविधाओं से वंचित क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा कार्यबल को मजबूत और विस्तारित करने के लिए सुझाव देगा।
एमी बेरा का कहना है कि विभिन्न शोध लगातार यह साबित करते हैं कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं तक बेहतर पहुंच से स्वास्थ्य परिणाम सुधरते हैं, स्वास्थ्य खर्च कम होता है और उपचार की गुणवत्ता बेहतर होती है। हालांकि उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका वर्तमान में अपने कुल स्वास्थ्य खर्च का केवल लगभग 5 प्रतिशत ही प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च करता है।
एचआर 8765 नाम का यह विधेयक संघीय स्वास्थ्य कार्यक्रमों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले खर्च की रिपोर्टिंग अनिवार्य करेगा और पूरे देश में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के अवसरों की पहचान करने के लिए एक कार्य समूह स्थापित करेगा।
पेशे से चिकित्सक रहे एमी बेरा ने कहा कि एक डॉक्टर के रूप में मैं जानता हूं कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं एक अधिक स्वस्थ और किफायती स्वास्थ्य प्रणाली की नींव हैं।
बता दें कि राजनीति में आने से पहले बेरा चिकित्सक और स्वास्थ्य प्रशासक के रूप में कार्य कर चुके हैं। उन्होंने कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, इरविन स्कूल ऑफ मेडिसिन से चिकित्सा की पढ़ाई की और बाद में सैक्रामेंटो काउंटी स्वास्थ्य एवं मानव सेवा विभाग में मुख्य चिकित्सा अधिकारी के रूप में भी सेवा दी।
उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में निवेश से बीमारियों की रोकथाम, मरीजों के बेहतर स्वास्थ्य परिणाम और दीर्घकालिक लागत में कमी आती है। यह द्विदलीय विधेयक हमें यह बेहतर समझने में मदद करेगा कि संघीय स्वास्थ्य निधि कहां खर्च हो रही है और विशेष रूप से ग्रामीण तथा वंचित समुदायों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बढ़ाने के उपाय खोजे जा सकेंगे।
विधेयक के अनुसार कानून लागू होने के एक साल के भीतर स्वास्थ्य एवं मानव सेवा सचिव को एक कार्य समूह गठित करना होगा जो यह अध्ययन करेगा कि संघीय स्वास्थ्य कार्यक्रम प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं पर खर्च को किस प्रकार प्राथमिकता दे सकते हैं। यह समूह प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं तक पहुंच बढ़ाने और विशेष रूप से ग्रामीण एवं चिकितकीय रूप से पिछड़े क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता और गुणवत्ता सुधारने के लिए भी सिफारिशें तैयार करेगा।
ADVERTISEMENT
ADVERTISEMENT
Comments
Start the conversation
Become a member of New India Abroad to start commenting.
Sign Up Now
Already have an account? Login