प्रदर्शनी का पोस्टर। / Handout
बे एरिया की कलाकार प्रगति शर्मा मोहंती ने कैलिफोर्निया के रिचमंड आर्ट सेंटर में एक नई प्रदर्शनी शुरू की है जो समकालीन दृश्य कला के जरिए रामायण को नए नजरिए से पेश करती है। 'डॉटर ऑफ द अर्थ' (Daughter of the Earth) नाम की यह प्रदर्शनी छह साल की उस कलात्मक यात्रा का नतीजा है जो रिसर्च, कहानी कहने की कला और प्रयोगों पर आधारित है।
इसमें 75 से अधिक पेंटिंग, मूर्तिकला इंस्टॉलेशन, दिव्य प्रतीक, मिक्स्ड-मीडिया कलाकृतियां और 100 फीट लंबी हाथ से लिखी संस्कृत पांडुलिपि शामिल हैं। यह प्रदर्शनी रामायण के कई संस्करणों और भारत की दृश्य कहानी कहने की परंपराओं से प्रेरित है।
इस प्रदर्शनी में प्राचीन महाकाव्य को सिर्फ़ चित्रित करने के बजाय, इसके किरदारों, परिदृश्यों, रिश्तों और नैतिक सवालों को ऐसे इमर्सिव कंपोजिशन के जरिए दिखाया गया है जिनमें पौराणिक कथाओं, वास्तुकला, प्रतीकों, पेड़-पौधों, जीव-जंतुओं और छिपी हुई कहानियों की परतें हैं।
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कलाकार के अनुसार, यह प्रदर्शनी स्क्रीन-आधारित कहानी कहने के तरीके से हटकर भारत की कलात्मक विरासत से प्रेरित इमर्सिव विज़ुअल कहानियों की ओर एक बदलाव को दर्शाती है।
मोहंती ने एक बयान में कहा कि ऐसे समय में जब कहानियां ज्यादातर स्क्रीन के जरिए देखी-सुनी जा रही हैं, मैं मानवता की सबसे पुरानी परंपराओं में से एक, दृश्य और मौखिक कहानी कहने की कला की ओर मुड़ रही हूं। मेरा काम यह पता लगाता है कि प्राचीन कहानियाँ कैसे जीवित रहती हैं, बदलती हैं और नया अर्थ पाती हैं, जब उन्हें समकालीन कलात्मक भाषाओं के जरिए फिर से सुनाया जाता है।
प्रदर्शनी में एक चित्र / Handoutइस प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण मोहंती की खास शैली मैक्सिमलिस्ट-मिनिएचरिज्म (Maximalist-Miniaturism) है, जो भारतीय मिनिएचर आर्ट की बारीकी और कहानी कहने की परंपराओं को मैक्सिमलिज्म की प्रचुरता और विज़ुअल समृद्धि के साथ जोड़ती है। हर कलाकृति को इस तरह से डिजाइन किया गया है कि दूर से देखने पर वह एक पूरा कंपोजिशन लगे, जबकि पास से देखने पर उसमें छिपी बारीक कहानियां और प्रतीकात्मक विवरण दिखाई दें।
मोहंती ने कहा कि अपनी खास शैली 'मैक्सिमलिस्ट-मिनिएचरिज्म' के जरिए, मैं घनी परतों वाले कंपोजिशन बनाती हूं जहां हर विवरण एक बड़ी कहानी में योगदान देता है। भारतीय मिनिएचर परंपराओं, लोक कला, पांडुलिपियों, वास्तुकला और सजावटी शैलियों से प्रेरित मेरी पेंटिंग दर्शकों को ऐसी दुनिया में ले जाती हैं जो धीरे-धीरे खुलती हैं।
मोहंती ने कहा कि रामायण सदियों और संस्कृतियों का सफर तय कर चुकी है और अलग-अलग भाषाओं, क्षेत्रों और कलात्मक रूपों के जरिए लगातार खुद को ढालती रही है।
उन्होंने कहा कि मेरा काम उसी जीवित परंपरा को आगे बढ़ाने वाला है। यह अतीत को फिर से बनाने जैसा नहीं, बल्कि इतिहास और वर्तमान के बीच एक बातचीत है। भारत में जन्मीं मोहंती ने लखनऊ के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्किटेक्चर से आर्किटेक्चर और अहमदाबाद के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डिजाइन से इंडस्ट्रियल डिजाइन की पढ़ाई की।
आर्किटेक्चर में उनकी पृष्ठभूमि संरचना, जगह और संयोजन (कंपोजिशन) के प्रति उनके नजरिए को आकार देती है, जबकि उनके काम में पेंटिंग, मिक्स्ड मीडिया, डिजिटल प्लानिंग और हाथ से बनी चीजों की प्रक्रियाओं का मेल दिखता है।
मोहंती 'प्रगति आर्ट स्कूल' की संस्थापक भी हैं, जहां उन्होंने दो दशकों से ज्यादा समय तक भारतीय लोक और पारंपरिक कला शैलियों को सिखाने और उन्हें संरक्षित करने का काम किया है।
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