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बांग्लादेश में एक और हिंदू की हत्या, चुनाव से दो दिन पहले फिर भड़की हिंसा

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने सुषेन चंद्र सरकार की हत्या करने के बाद दुकान से कई लाख बांग्लादेशी टका लूट लिए और शव को दुकान के भीतर ही छोड़कर शटर बंद कर दिया।

प्रतीकात्मक तस्वीर / IANS Infographics

 बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं। राष्ट्रीय चुनाव से महज तीन दिन पहले मंगलवार को एक और हिंदू व्यक्ति की निर्मम हत्या की खबर सामने आई है। स्थानीय मीडिया के अनुसार, मयमनसिंह जिले के त्रिशाल उपजिला में अज्ञात बदमाशों ने एक हिंदू कारोबारी को धारदार हथियार से काटकर मार डाला।

मृतक की पहचान 62 वर्षीय सुषेन चंद्र सरकार के रूप में हुई है, जो त्रिशाल में “एमएस भाई भाई एंटरप्राइजेज” नाम से कारोबार करते थे। यह घटना सोमवार रात उपजिला के बोगर बाजार चौराहे पर हुई।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमलावरों ने सुषेन चंद्र सरकार की हत्या करने के बाद दुकान से कई लाख बांग्लादेशी टका लूट लिए और शव को दुकान के भीतर ही छोड़कर शटर बंद कर दिया।

यह भी पढ़ें- बांग्लादेश में मानवाधिकार उल्लंघन के विरोध में हिंदुओं का वाशिंगटन में प्रदर्शन

बांग्लादेशी मीडिया संस्थान ITV ने पीड़ित परिवार और पुलिस के हवाले से बताया कि बदमाशों ने धारदार हथियार से हमला कर सरकार की मौके पर ही हत्या कर दी। बाद में जब परिजन उन्हें तलाशते हुए दुकान पहुंचे और शटर खोला, तो वे खून से लथपथ हालत में मिले। उन्हें तुरंत मयमनसिंह मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

मृतक के बेटे सुजन सरकार ने कहा, “हमारी किसी से कोई दुश्मनी नहीं थी। मेरे पिता की बेरहमी से हत्या करने के बाद बदमाश दुकान से कई लाख टका लूट ले गए। हम मांग करते हैं कि हत्यारों को कड़ी से कड़ी सजा दी जाए।”  घटना की पुष्टि करते हुए त्रिशाल थाना प्रभारी (ओसी) मोहम्मद फिरोज हुसैन ने बताया, “करीब रात 11 बजे बदमाशों ने धारदार हथियार से उनकी हत्या की और दुकान का शटर बंद कर फरार हो गए। परिजनों के सूचना देने के बाद पुलिस ने मौके का मुआयना किया है। मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है।”

गौरतलब है कि इससे पहले 9 जनवरी को भारत ने बांग्लादेश में हिंदुओं समेत अल्पसंख्यकों पर हो रहे बार-बार हमलों पर गहरी चिंता जताई थी। भारत ने कहा था कि वह पड़ोसी देश की स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए है और उम्मीद करता है कि सांप्रदायिक हिंसा की घटनाओं से सख्ती से निपटा जाएगा।

मुहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं के खिलाफ हिंसा में बढ़ोतरी देखी गई है, जिसे लेकर देश-विदेश में मानवाधिकार संगठनों और आम लोगों में भारी आक्रोश है।

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